Bhayanak Horror Story

Bhayanak Horror Story भयानक कहानिया.

Bhayanak Horror Story: I am Sharing the Bhayanak Horror Story. This one is new Ghost Story available on Websites. Kindly comment after reading how much you like this Darawni Kahani..नरभक्षियों का जाल. यह कहानी 3 दोस्तों की है. जब वो तीनो साल के आखरी दिन 31 डिसेम्बर को पार्टी करने.  बाहर निकलते है. तब उनका सामना भयानक नरभक्षियों से होता है. अब वह तीनो उनके चंगुलसे खुदको कैसे छुडाते है. ये जानने के लिए पढ़िए ये भयानक हॉरर  स्टोरी नरभक्षियों का जाल.

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नरभक्षियों का जाल Bhayanak Horror Story

हेल्लो दोस्तों कहानी यह उस भयानक रात की है. जब हमने हमारी मौत को करीब से देखा था. ये कहानी शुरू होती है. 31 December 1986. मैंने और मेरे 2 दोस्त रमेश और सुरेश ने प्लान किया कि हम 31 December को नानेघट में कैंपिंग करेंगे. और नए साल का पहला दिन वह जगह  एक्स्प्लोर करेंगे. हम कल्याण से रात 9: 00 बजे निकले थे. उस रात कार में चला रहा था.

रातके वक्त हाईवे वीरान दिखरहा था. बिच-बिच में बैलगाड़ी या साइकिल वाले दिख रहे थे. कार चलाते-चलाते हमने शिवाले क्रॉस किया. फिर हमें भूख लगने लगी थी. हम ढूंढ़ने लगे की रोड साइड में कोई होटल. या रेस्टोरेंट दिखता है. या नहीं. वह दौर था 1986 का तब ज़्यादा डेवलपमेंट नहीं हुआ था. इसलिए हाईवे पर रेस्टोरेंट तो नहीं थे. मगर गाँव के आसपास छोटे ढाबे हुआ करते  थे.

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साल की आखरी गलती

हमें हाईवे की Left side में एक पुराना घर दिखाई दिया. वहापर ढाबे का बोर्ड लगा हुआ था. और बाहर की लाइट भी  चालू थी. पर दरवाज़ा बंद था. हमने सोचा कि अंदर कोई ना कोई तो ज़रूर होगा. मैंने कार रोड साइड में लगाई. और हम तीनों ढाबे की ओर चल दिए. ढाबे के दरवाजे पर अंदर स कुंडी नहीं लगी थी. हम धीरेसे अंदर गये. और देखा की अन्दर कोई नहीं था. Bhayanak Horror Story

पर चूल्हा जल रहा था. उसपर कुछ पक रहा था. और एक बात हमें अजीब लगी उस ढाबे में बिग साइज़ फ्रीजर था. जिसकी उस छोटे ढाबे पर ज़रूरत भी नहीं थी. मैंने दोस्तों से कहा चलो यहाँ से निकलते हैं. मुझे ये जगह अजीब लग रही है. कोई और ढाबा या होटल ढूँढ लेंगे. सुरेश ने भी मेरी हाँ में हाँ मिला दी थी.  पर रमेश बोला कि तुम दोनों जानते हो मुझसे भूख बर्दाश्त नहीं होती. और जब भूक लगती है तो में चिड़ चिड़ा हो जाता हूँ.

नजर में आयी ढाबे की अजीब चीजे 

और इस वीराना सड़क पर मुझे नहीं लगता कि कोई और ढाबा होगा. तो थोड़ी देर रुकते हैं. उसकेबाद  हम ढाबे में रखे  पलंग पर इंतज़ार करने लगे. तकरीबन 10 मिनट बीत गए  थे. इन 10 मिनट में सुरेश पूरे ढाबे का गोल चक्कर लगाकर आ गया. उसने हमें बताया कि यहाँ तो कोई भी नहीं दिख रहा है. पर घर के पीछे कटे हुए इंसानी बालो और कपड़ो का ढेर पड़ा हुआ हैं. लगता हा ये जगह किसी सलून का शॉप रही होगी.

चलो यहाँ से निकलते हैं. फिर हम तीनों ढाबे से बाहर निकले और कार की तरफ़ चल दिए. जैसेही  हम कार के पास पहुँचे और हमने डोअर खोलने के लिए हाथ आगे बढ़ाया. तभी पीछे से आवाज़ आई. “बिना भूक मिटाए ही यहाँ से जा रहे हो”. हमने पीछे मुड़कर देखा तो BLACK DRESS में एक सुंदर लड़की थी. जो ढाबे के आंगन से हमें आवाज़ दे रही थी. Bhayanak Horror Story

फिर हम वापस मुड़कर उस ढाबे में गए. अंदर उस लड़की के साथ दाढ़ीवाला आदमी था. उसकी शक्ल किसी तांत्रिक जैसी थी. उस आदमी ने कहा यहाँ सिर्फ़ NON VEG ही मिलेगा साहब. रमेश सुरेश ने मटन मंगवाया और फिर मेरे पासभी OPTION नहीं था. खाने का आर्डर देने के बाद हमने उस आदमी से कहा. कि हम हमारे कार में बैठकर थोड़ी देर ड्रिंक करेंगे. उसके बाद आकर खाना खाएंगे. उसने ने कहा कि आप यहाँ बैठकर भी पी सकते हैं.

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फिर मैं गाड़ी में से  हमारे लिए ड्रिंक्स लेकर आया. ड्रिंक करते हुए उस आदमी से भी हमने थोड़ी बातचीत की.  उसने खुदका नाम अधीरा और लड़की का नाम वसुंधरा बताया. और कहा कि वह पास ही गाँव में रहते हैं. और बस समय बिताने और शॉक पूरा करने के लिया ढाबा चलाते है. हमारे ड्रिंक ख़तम करने तक. टेबल पर हमारे लिए प्लेट्स लगा के रखी थी. Bhayanak Horror Story

 

नर भक्षियों का आतंक Bhayanak Horror Story

खाने के टेबल पर बैठते वक़्त मैंने एक बात नोटिस कि. अधीर और वसुंधरा एक दूसरे की तरफ़ देख कर मुस्कुरा रहे थे. और उनकी वह मुस्कान किसी शैतान से कम नहीं थी. खाना खाते वक़्त रमेश ने पूछा कि यह मटन के पीस इतने बड़े क्यों है. तो अधीरा ने अजीब-सी आवाज़ में जवाब दीया कि बड़े टुकड़े खाने में ही मज़ा आता है. यहाँ हमेशा बड़े टुकड़े ही परोसे जाते हैं.

हम खाना खाने और बातचीत करने में व्यस्त हो गए. उसवक्त हम काफ़ी नशेमे थे.तभी मेंने उन दोनों को जल्दी-जल्दी में ढाबे से बाहर जाते देखा. पर नशे की वजह से मैने उसपर ध्यान नहीं दिया. और फिर से हसी मज़ाक में BUSY हो गया. हम तीनो में सिर्फ़ सुरेश ही ड्रिंक नहीं करता था. इसलिए खाना ख़त्म करने के बाद. मैंने सुरेश से कहा तुम बिल दे आओ. हमें जल्दी निकलना है. फिर सुरेश अधीरा को ढूँढने लगा. उसने ढाबे के आसपास चेक किया. पूरे ढाबे का गोल चक्कर लगाया.

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वीराने के प्रेत

आँखों देखा भयानक मंजर

पर वह दोनों कहीं नहीं मिले. और फिर हम दोनों ने  भी ढूँढा पर कोइ फायदा नहीं हुआ. इस बीच उस जगह काहीसे धुआ आने लगा हमें घबराहट-सी होने लगी. और डर के मारे हम तीनों कार की ओर दौड़े. और जब कार के दरवाजे खोले. तो पीछे से फिर आवाज़ आई “तुम्हीरी भूक मिटगई हमारी भूक का क्या”.यह आवाज सुनते ही. ही हम तीनों ने  झटसे पीछे मुड़कर देखा. और उसवक्त हमारे सामने जो भयानक नजारा दिखा था. उसे याद कर आज भी  हुमारी रूह कांपती है. 

सामने खड़ी उस लड़की वसुंधरा  के चहेरे पर खून लगा हुआ था. और सबसे भयानक बात उसके हातो में एक कटा हुआ इन्सान का सिर था. जो उसने फ्रीजर से निकला था. और वसुंधरा की बगल में अधिरा भी खड़ा था. जो की एक हैवान की तरह खून में नहाया हुआ था. और  उसके हाथ में  एक कटा हुआ इंसानी हाथ था. जिसे वह बार बार अपने दांतो से किसी जानवर की तरह तोड़-तोड़ कर खा रहा था. ये सब देखकर डर के मारे हमारी तो हालत खराब हो गई थी.

नरभक्षीयो ने हमपर  हमला किया 

Bhayanak Horror Story
Bhayanak Horror Story

हम तीनों फट से गाड़ी में बैठे. और मैं गाड़ी स्टार्ट करने लगा. पर हमारी नजरे उन दोनों पर ही थी. वह हमारी तरफ़ तेजी से  बढ़ रहे थे. जैसे कि हम उनका शिकार है.  उसवक्त BAD LUCK से हमारी गाड़ी भी स्टार्ट नहीं हो रही थी. और वह दोनों हमारे कार के आसपास मंडराने लगे. वह शैतान गाड़ी के छत पर चढ़कर जोर-जोर से कूदने लगा और वह चुड़ैल औरत गाड़ी के बोनट पर चढ़कर कांच के ऊपर मारने लगी.

मुसबत से छुटकारा

कांच बस टूटने ही वाला था. मेंने एक लम्बी सांस भरी और दिल से हनुमानजी का नाम लेकर.  गाड़ी की चाबी घुमाई. और गाड़ी स्टार्ट हो गई. मैंने गाड़ी यू टर्न मार के कल्याण की ओर भगाई. वह दोनों जानवरों की तरह गाड़ी के पीछे भागने लगे थे. वह लड़की जोर-जोर से चिल्ला रही थी. और वह शैतान जानवर की तरह दहाड़ रहा था. काफ़ी लंबी दूरी तक उन्होंने हमारा पीछा किया. बादमें वह दोनों अचानक गायब से हो गए.

उस भयानक नज़ारे को देखने के बाद हम घर वापस लौट गए और सुबह तक रमेश के घर रुके सुबह होते ही अपने-अपने घर लौट गये.

बिना चेहरे का प्रेत Bhayanak Horror Story 

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विजय है. अभी जो छोटासा भूतिया किस्सा मै बताने जा रहा हूँ. वो मेरी आँखों देखी सच्ची घटना है. ये घटना मेरे बचपन की है. जब मै अपने परिवार के साथ आंबेवाडी गाँव में रहता था. बारिश का मौसम चलरहा था.   

और मेरे पिताजी, ताऊजी, और मुझे मसाला केकड़ा डिश खाने की तलब हुई. पर नदी पर केकड़े पकड़ने जाने के लिए. बारिश दिन भर रुकी नहीं थी. और जब रात को बारिश रुक गई.

तब पिताजी और ताऊजी ने उसी वक़्त नदी किनारे जाकर केकड़े पकड़ने का निर्णय लिया. उनके साथ पडोस के पाटिल अंकल और उनका बेटा विक्की भी आ रहा था. Bhayanak Horror Story इसलिए ताऊजी ने मुझे भी साथ में ले लिया. हमने 3 मशाल साथ में ली थी.

नदी किनारे पोहोचकर सभी बड़े लोग केकड़े पकड़ने में जुट गए. और विक्की और मै थैला पकड़ कर खड़े थे. और वो तीनो आकार उसमे एक के बाद पकड़े हुए केकड़े जमा कर रहे थे. तभी अचानक नदी की दूसरी तरफ झाड़ियों में कुछ हलचल होने लगी.

सब लोग उधर ही देखने लगे. फिर ताऊजी बोले की कोई लोमड़ी या खरगोश होगा. पर झाड़ियों की हलचल देखके वो लोमड़ी होगी. ऐसा तो बिल्कुल नहीं लग रहा था. मुझे ये सोचकर भय लग रहा था.

की नदी की दूसरी तरफ पुराना श्मशान घाट भी है. उसीके बारे में विक्की और मैंने ने भूत प्रेतों के काफी किस्से सुन रखे थे. और ऊपर से वो डरावनी काली रात और वो भयानक आकार वाली घनी झाडिया.

ये सब देखकर तो मुझे उस वक्त ऐसा महसूस हो रहा था. की आज कुछ अनहोनी जरुर होने वाली है. केकड़ों की थैली 2 परिवारों की जरूरत के हिसाब से भर चुकी थी. फिर सब लोग एक पेड़ के निचे बैठ कर केकड़ों का बटवारा करने लगे. Bhayanak Horror Story

सभी बंटवारे में व्यस्त थे. पर मेरा ध्यान अभी भी उन हिल रही झाड़ियों पर था. तभी मशाल की उस धीमी-धीमी रौशनी में. मैंने देखा की एक काला साया झाड़ियो से निकल कर नदी में कूदा. और अचानक हुए उस पानी की आवाज से सब डर गए.

इस तरह सबको अचानक डराने वाला. वो मनहूस कौन है. ये देखने के लिए. पाटिल अंकल और पिताजी पानी के नजदीक गए. और कौन है करके आवाजे दने लगे. 

तभी अचानक  मशाल की रौशनी में. सबको जो भयानक नजारा दिखा. उसे देखकर दहशत से सबकी आंखें फट पड़ी. क्योंकि पानी में एक जला हुआ प्रेत खड़ा था. जिसका चेहरा नहीं था. मतलब बिना आंख, नाक और मुह का सपाट चेहरा.

उसके खौफ से भागते हुए. उन दोनों की मशाले वही कीचड़ में गिर गई. फिर हम 5 लोग एक ही मशाल लेकर गाँव की तरफ भागे थे.

और जब भागते-भागते आधे रस्ते तक पहुँचे. तब ताउजी को वो केकड़ो की थैली कुछ ज्यादा ही वजनदार महसूस हुई. पाटिल अंकल को भी वैसा ही महसूस हुआ.

फिर जब  हमने दोनों थैले खोलके देखे. तो हम सबके रोंगटे खड़े हो गए. क्योंकि उसमे जिन्दा केकड़ो के बजाय. बेजान काले गोल-गोल पत्थर थे.

हमने दोनों थैले वही फेंक दिए. और घबराहट के मारे भूत-भूत चिल्लाते हुए. जो सरपट दौड़ लगाई फिर हम गाँव के मंदिर में ही जाकर रुके थे.

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