bhoot ki kahani lyrics in hindi

भूत प्रेतों की खौफनाक कहानियां Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

1. खंडाला घाटी के प्रेत Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

मैं और मेरी पत्नी ६ महीने बाद ब्रेक लेकर बाहर घुमने निकले थे, हम दोनों पेशे से डॉक्टर है. हॉस्पिटल से छुट्टियाँ लिए हुए बहुत दिन हुए थे, सचमे उस दिन मेरी पत्नी राधिका बहुत खुश दिख रही थी. छुट्टियाँ बिताने के लिए, मैंने खंडाला घाटी के एक गाँव में पुराना फार्म हाउस बुक किया था.

जहाँ सिर्फ मैं और मेरी पत्नी एक साथ वक्त बिता सके और इस हसीन जिंदगी में कुछ खुबसूरत यादें बना सके. हम मुंबई से श्याम ४ बजे निकले थे. मुंबई से खंडाला हाईवे पर पुराने नगमे गुनगुनाते हुए, दोनों बड़ी खुशीसे फार्म हाउस पर छुट्टियों में क्या-क्या करेंगे ये प्लान कर रहे थे.

फार्म हाउस घाटी के निचले हिस्से में बसे गाँव में था, इसलिए हमें जंगल वाले वीरान इलाखे से जाना पड़ा था, रास्ते में एक मोड पर मैंने पानी पिने के लिए गाड़ी रोकी, वहा एक बोर्ड लिखा हुआ था.

“कोठारी फार्महाउस 25 किलोमीटर आगे है”  और वही हमारी मंज़िल थी, मैंने राधिका को बोर्ड दिखया, वह बोली ये क्या आलोक तुमने कौन से जंगल में वेकेशन प्लान किया है, अभी और 25 किलोमीटर गाड़ी चलानी होगी, मुझे तो अब भूक भी लगी है.

मैंने कहा सब्र रखो मेरी जान फार्म हाउस तुम्हारे लिए, कोई रलवे स्टेशन के बाजु में नहीं बनाएगा. फिर हम दोनों गाडी में बैठे, तभी हमें सामने से एक बीडी पीती हुई अधेड़ उम्र की औरत आति हुई दिखाई दी. वह हमारी तरफ ही देख रही थी, उसके चेहरे पर एक अजीब-सी शैतानी मुस्कान थी, मानो उसे जो चाहिए वह मिल गया हो.

राधिका मजाक-मजाक में बोली देखो, तुम्हारी पुणे वाली काकी कैसे बीडी पिरही है. मैंने कहा मेरी नहीं, वह तुम्हारी मुम्बई वाली काकी है, जो चुप चुपके घरके दरवाजे-खिडकी बंद करके सिगरेट फूंकती है, इस बात पर हम दोनों एक साथ हस पडे.

हमारी गाड़ी बहुत आगे आ चुकी थी, अचानक वह बीडी पीने वाली औरत हमे फिरसे दिखी. राधिका बोली आलोक देखो वह बीडी वाली औरत, इतनी जल्दी हमारे आगे कैसे पहुँच गई. उसे देखकर मुझे लगा, ये कोई दूसरी औरत होगी और में गाड़ी चलता रहा. लेकिन मेरी आंखे तब फटी की फटी रह गई, जब तीसरी बार हम दोनों ने उसी औरत को सामने से आते देखा.

मैंने अर्जेंट ब्रेक लगाकर गाड़ी रोक दी और हम दोनों गाड़ी से बाहर निकले और देखा कि हम उसी मोड़ पर थे. जंहा से शुरू किया था, लगा कि हम कही गए ही नहीं, गाड़ी उसी मोड़ पर ही खड़ी थी, फिर जब हम उस औरत की तरफ मुडे, तब वो वहा नहीं थी, लकिन जमींन पर आधी जलती हुई बीडी देखकर. राधिका  भूत-प्रेत के डर से कांपने लगी.

और मुझे भी अचानक ठंड महसूस होने लगी, फिर हम दोनों जल्दी से गाड़ी मैं बैठे. और U टर्न मारके गाड़ी पीछे की ओर भागा.

पर कहते है ना, मुसीबत जब भी अति है, जल्दी पीछा नहीं छोडती. मै तेजी से गाड़ी भगा रहा था. राधिका को डर के मारे पसीना छुट रहा था, तभी अचानक हमारी गाड़ी धक्के खाकर बंद पड़ गई. मैं कार से बाहर निकला और बोनेट खोलके चेक करने लगा, लेकिन बहुत कोशिस करने पर भी गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही थी.

मैंने मोबाइल से मदत बुलानी चाही, पर ना मेरे मोबाइल में सिग्नल था न राधिका के. में मदत तलाश रहा था, तब तक  सूरज ढल चूका था, फिर वहा पर लालटेन हात में लिए, एक बुढा आदमी आया. मैंने उनसे पूछा बाबा आपके पास मोबाइल है क्या? मुझे एक कॉल करनी है, हमारी गाड़ी खराब हो गई है, इसीलए हमे मदत बुलानी थी.

बाबा बोले बेटा मेरे पास तो कोई मोबाइल नहीं है, पर मेरा घर यही पास में ही है, चाहो तो तुम वहा चलके मेरे लैंडलाइन से फोन कर लो. मेरे पास भी कोई पर्याय नहीं था, फिर मैं और राधिका पैदल ही बाबा के पीछे-पीछे चल दिए.

झड़ियो के तेडे-मेढे रास्तो से, लालटेन की टिम टिमाती रौशनी में कुछ 10 मिनिट में, हम उनके घर पहुँच गए. राधिका मेरे कान में धीरे से बोली ये घर नहीं, कोई पुराणी हवेली जैसा लग रहा है. मैंने कहा तुम्हे तो पसंद है न पुराने घर और भूतो वाली कहानिया. यह सुनते ही वो मेरी तरफ़ गुस्से से देखने लगी, फिर मै चुप हो गया.

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बाबा ने घर का दरवाजा खोला और हम तीनो अंदर गए. अंदर घुप अँधेरा था, बाबा बोले अरे बेटा लगता है, लाइट चली गई है, फोन सामने वाले कमरे में है. तुम वहा जाकर थोडी देर रुको, लाइट आते ही फ़ोन चालू हो जाएगा. फिर तुम जिसे चाहे कॉल कर लेना.

हमारे पास भी रुकने के अलावा और कोई चारा नहीं था, मै और राधिका उस कमरे में चले गए  और फ़ोन के पास बैठ के लाइट आने का इंतजार करने लगे. आधा घंटा हुआ लाइट आ नहीं रही थी. मैंने राधिका के हैण्ड बैग में से छोटी टॉर्चलाइट निकली और कमरे से बाहर निकल के बाबा को ढूँढने लगा.

मैंने बाबा को आवाज दी पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मैंने सोचा शायद घर के बाहर बैठे होंगे, ऐसा सोचके मैं दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा. और उसी वक्त मेरी टोर्च का फोकस दरवाजे के ऊपर टंगी एक बड़ी-सी तस्वीर पर गया और उसे देखके डर से मेरी आंखे फटी की फटी रह गई. 

मैंने जोर से आवाज़ लगाकर राधिका को बुलाया और वह तस्वीर दिखाई. उसे देखके उसकी आवाज़ गले में ही अटक गई. वो तस्विर थी उस बूढ़े बाबा कि जिसने हमें उस घर में लाया था. उस तस्वीर पर चढ़ा हुआ फूल का हार सुख चूका था, बस धागा और कुछ सूखे फूल बाकि थे और उसपर तारिख 23 साल पुराणी थी. यानकी उस बूढ़े को मरके २३ साल बीत चुके थे.

हम दोनों तुरंत घर से बाहर निकलने के लिए, दरवाजे की ओर भागे. जैसे ही हम दरवाजे के पास पहुचने वाले थे, दरवाज़ा हमारे सामने एक झटके में बंद हो गया. मैंने दरवाजा खोलने में पुरी ताकत लगा दी थी, पर सब बेकार और हम उस भूतहा घर मैं कैद हो गए.

राधिका मेरे सीने से लग के रोने लगी. डर से मेरे दिल की धडकने तेज हो गई थी, पर बुरा होना अभी भी बाकि था. घर की सारी खिड़कियाँ एक-एक करके बंद हो रही थी, जैसे की कोई उन्हें अपने हातो से बंद कर रहा हो. वह खौफनाक मंजर देखकर हम दोनों की हालत ऐसी हो गई थी की काटो तो बदन में खून नहीं.

इस कहनी का अंत

राधिका और मैं दरवाजे के पास थर-थर कापंते जमीन पर बैठ हुए थे. हमारी टॉर्च की चार्जिंग भी खत्म हो रही थी और शायद वहां पर जो कोई भी था, वह भी टोर्च खतम होने काही इंतज़ार कर रहा था. हमारे सामने रखी आराम कुर्सी धिरे-धिरे हिल रही थी.

जैसे की उसमे कोई बैठा हो, हमारी निगाहे भी उसी कुर्सी पर थी, अब तक कमरे में सिर्फ 2 लोगों के सांसो के चलने की आवाज थी, एक मेरी और एक राधीका की थोडी ही देर में हमारी टौर्च बंद हो गई और कमरे में नरक का अँधेरा छा गया था और फिर मुझे राधिका कि आवाज आयी.ऊठो आलोक उठो जल्दी उठो फार्म हाउस आ गया है. मेरी आँख खुली तब मैं कार की पिछली सिट पर सो रहा था और तब मुझे पता चला कि सब एक भयानक सपना था.

2. भूतहा फ्लैट नंबर १३ Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

दोस्तों ये एक सच्ची भुतहा घटना है, जो बंगलौर की एक पुरानी बिल्डिंग के फ्लैट में घटी थी. यह कहानी हमे “अविनाश क्षीरसागर” ने भेजी है.

अविनाश एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, ठाणे  मुंबई का रहने वाला है. १९९३ में अविनाश को बंगलौर की एक सॉफ्टवेयर कंपनी से जॉब का कॉल आया, कंपनी ने अविनाश को तत्काल ड्यूटी पर जॉइन होने को कह दिया,इसलिए कॉल आने के बाद दुसरे दिन ही उसने कंपनी में जाकर रिपोर्ट किया.

बंगलौर शहर में उसका पहला दिन था, इसलिए वो रात उसने कंपनी में ही बिताई

और दुसरे दिन ही ऑन ड्यूटी वक्त निकालकर, एक रियल एस्टेट ब्रोकर से अर्जेंट फ्लैट की बात की, उसने एक पुराणी बिल्डिंग में १३ नंबर का फ्लैट दिखाया. 

फ्लैट काफी अच्छा था, सुंदर सी बालकनी भी थी और ऊपर से कंपनी के नजदीक भी था, इसलिये अविनाश ने तुरंत ही उसे भाडे पर ले लिया और सामना फ्लैट में रखवा दिया.

अविनाश के साथ भुतहा घटनाओं की शुरुवात,पहले दिन से ही हो गई थी क्योंकि काम पर से वापस लौटने पर वो जैसा फ्लैट को छोड़ के गया था, वो वैसा बिलकुल नहीं था.

उसके खाने की चीजे जैसेकी ब्रेड, चिप्स और चॉकलेट जैसी चीजे पुरे घर में फैली हुई थी.

कपडे और अदि सामान भी बिखरा पड़ा था, अविनाश ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. क्योंकि उसे लगा की कोई बिल्ली या बंदर होगा.

क्योंकि किचन की खिड़की का कांच टुटा हुआ था और उसको लोहे की सलाखें भी नहीं थी. उसने सब सामान समेट लिया और वह कुछ ज्यादा ही थक गया था, इसलिए उसने खाने से पहले ड्रिंक कुछ ज्यादा ही ले ली थी.

खाने के तुरंत ही बाद वो सोने चला गया, पर नींद में उसे रात भर किसी बच्चे की आवाज आ रही थी और  आस पास कदमो की आहट भी महसूस हो रही थी.

पर ड्रिंक कुछ ज्यादा होने की वजह से अविनाश रात भर वैसे हो पडा रहा.

सबह जब उसकी आंख खुली, तो उसे कुछ धुंदला धुंदला याद था. लेकिन सामने दिख रहे बिखरे कमरे की  हालत देखके उसे यकीन हो चूका था, की शायद वह उस घर में अकेला नहीं है.

उसी रात को उसका शक यकिन में बदल गया, जब उसने वो रात एक प्रेत आत्मा के साथ गुजारी.

हुआ यूँ की अविनाश जब रात को घर वापस आया.

तब उसने साथ में आइसक्रीम भी लायी थी और रात के खाने के बाद जब वो आइसक्रीम खाने बैठा,  तो उसे महसूस होने लगा की कोइ उसेक आस पास मंडरा रहा है. वो बस आइसक्रीम खाने ही वाला था.

की अचानक चमच में से आइसक्रीम गायब हो गई. उसने पल भर के लिए, उस चीज को आँखों का धोखा मानलिया, लेकिन अविनाश को थोड़ी-थोड़ी घबराहट होने लगी. 

जब उसने आइसक्रीम के कटोरे में फिर से चमच डाला, तब सामने का भयानक मंजर देखकर. उसकी रूह कांप उठी, उसके हाथ-पैर बर्फ की तरह ठंडे पड गए, क्योंकि उसका हाथ एक ७ साल के बच्चे ने पकड़ रखा था.

उसका शरीर बिलकुल सफेद था, मानो उसमे में खून का एक कतरा भी ना हो.

और उसकी आंखे एसी थी जैसे खून उगल रही हो, ऐसा अमानवीय और भयंकर नजारा देखकर, डर से अविनाश की घिग्घी बंध गई.

वो उस जिंदा प्रेत की पकड से जैसे-तैसे हाथ छुडाकर थर थर कांपते हुए, एक कोने में जाकर बैठ गया. उसे समझ में नहीं आ रहा था की अब क्या करू. डर के मारे वो पसीने से नहा गया था.

उस पिसाच जैसे दिखने वाले बच्चे ने, वो आइसक्रीम का भरा हुआ कटोरा पल भर में खत्म कर दिया. मानो जैसे सालो से भूका हो. आइसक्रीम खतम होने के बाद उसने गर्दन टेढी करते हुए.

अविनाश की ओर  देखा और अपनी तोतली जबन में बोला “अंकल और आईचक्लिम दो ना”, उसकी आवाज सुनकर अविनाश डर से कांप उठा और वह एडी चोटी का जोर लगाकर दरवाजे की तरफ भागा था.

लकिन दरवाजा कुछ भी किये वो खोल नहीं पा रहा था,  उसवक़्त अविनाश ऐसी स्थिति में था, जब उसे लगरहा था की ये उसके जिंदगी की आखरी रात है.

वो जब पीछे मुडा तब वह प्रेतात्मा घर में गाना गाते-गाते गोल-गोल घूम रही थी. अविनाश दरवाजे को पीठ लगाके, उस पिसाच की तरफ ही देख रहा था.

इस डर से की कही वह प्रेत उस पर हमला ना कर दे और आखिर में अविनाश ने इतना ही बताया की वो पिशाच  उसके सामने आकार खड़ा हुआऔर अपनी तोतली जबन में फिरसे बोला “अंकल और आईचक्लिम दो ना” , फिर डर के मरे अविनाश बेहोश हो गया था.

 सुबह जब उसकी आंख खुली, तो अविनाश दरवाजे के पास ही पडा था.

और फिर एक बार घर का सारा सामान बिखरा पडा था, पर उसकी इतनी हिम्मत नहीं हुई की किसी चीज को छुए.

फिर वही दरवाजे के नजदीक वाले टेबल पर उसका वालेट रखा था, वो उठाकर उसने जेब में रखा और बिना कपडे बदले उसी चड्डी बनियान में नजदीक रहनेवाले दोस्त श्रीकांत के घर पर गया.

फिर कुछ दिन वह दोस्तों के साथ रहा और बाद मे दुसरे घर में शिफ्ट हो गया, अविनाश फ्लैट नंबर १३ में सामान लेने भी नहीं गया.

उसने ब्रोकर को कहकर बाहर ही मंगवालिया, पर अविनाश आस-पास के लोगों को पूछ ने जरुर गया था की उस भूतहा घर की कहानी क्या है?

पडोसियों बताया की  13 नंबर फ्लैट में 8 साल पहले  3 लोगों की फॅमिली रहा करती थी. माँ बाप और उनका एक ७ साल का बेटा.

एक दिन किसी बीमारी की वजह से बेटे की मौत हो गई थी, फिर उसके बाद वो मिया बीवी कही चले गए, पर मौत के बाद भी वो बच्चा अभी भी वही भटक रहा है.

अमावस्या, पौर्णिमा या कभी रात को,  उस बिल्डिंग की बालकनी या छत पर वह दीखता है. उस फ्लैट में बहुत से लोग आकार गए, लगभग सभीको वो प्रेतात्मा दिखी थी.

पर उसने आजतक किसी को हानी नहीं पहुंचाई, पर वह तंग जरुर करता है, क्योंकि है तो वो एक बच्चे की अतृप्त आत्मा ना.

जो ठीक से बचपन तक देख नहीं पाई.

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3. एक मुलाकात प्रेत आत्मा से साथ Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

ये कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है, जो मुझेअहमदनगर जिले से सत्यकांतजी ने इ-मेल करके भेजी है. सत्यकांतजी कहते है की आत्मा का अस्तित्व सच में होता है और मरने के बाद भी, वो किसी से मिलने के लिए इंतजार करती है.

इस विषय में उन्होंने अपना अनुभव बताया है.

सत्यकांतजी लगभग 2 सालो के बाद अपने गाँव में गए थे.  रातके खाने के बाद, वह अपनी मोटर साइकिल लेकर खेत को फसल को पानी देने गए थे.

कुएँ से पानी की मोटर चालू करके, वह अपने खेतों को निहार रहे थे, तभी उनके कानो पर एक जानी पहचानी आवाज आयी.

बेटे सत्यकांत कैसे हो तुम?

उन्होंने पीछे मुडकर देखा, तो सामने गनु काका खडे थे, गनु काका सत्यकांत जी के खेत से 3 किलोमीटर दूर श्मशान घाट पर पहरा देने का काम करते थे.

सत्यकांतजी ने कहा मैं ठीक हु काका. आपकी तबीयत कैसी है? काका बोले, अब तो ठीक ही हूँ बेटा. बस तुमसे मिलने की इछा थी, इसलिए यहाँ चला आया.

सत्यकांतजी ने सवाल किया,  काका आपको कैसे पता चला की मै आया हु? उन्होंने इस सवाल का जवाब तो दिया नहीं, पर बात को काटते हुए मदत मांगी और बोले “बेटा मेरे घुटनो में दर्द है”,  क्या तुम मुझे श्मशान के नजदीक छोड सकते हो?  सत्यकांतजी उन्हें मना नहीं कर पाए.

फिर दोनों मोटर साइकिल पर बैठ गए, रास्ता गड्डो और पथरों से भरा पड़ा था, इसलिए सत्यकांतजी ने काका से कहा की अपना हाथ मेरे कंधे पर रखलो, वैसे भी आपकी पीठ में दर्द रहता है.

आप ठीक से बैठ नहीं पाते, सत्यकांत के कहने पर काका ने उनके कंधे पर हाथ रखा. उस समय सत्यकांतजी को कुछ अलगही महसूस हुआ था.

उनका हाथ कुछ ज्यादा ही ठंडा था, पर उन्होंने काका से कुछ पूछा नहीं.

फिर वो दोनों काका के श्मशान वाले घर पर गए. सत्यकांत वहा 2 मिनिट बैठे, काका बोले मै 2 साल हो गए तुम्हारी राह देख रहा हूँ और तुम आज मिल रहे हो.

सत्यकांतजी ने पूछा आपको कुछ मदत चाहिये क्या काका?

वो बोले नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है, बस तुझे देखने के इछा थी.  उसके बाद सत्याकांतजी सुबह आऊंगा कहकर अपने घर लौट गए.

सुबह नहाने के बाद जब वह नाश्ता कर रहे थे, तब उनका दोस्त रोहित वहांआया और बोला सत्याकांत चल हमें  श्मशान वाले गनु काका के घर जाना है.

सत्यकांत ने कहा क्यों क्या हुआ, तो रोहित ने जवाब दिया की आज उनकी १३ वी है.

ये सुनते ही सत्यकांत के हाथो से नाश्ते की प्लेट छुट गई. वह बोले भाई क्यों डरा रहा है?

कल रात को ही तो मै काका को अपनी मोटर साइकिल पर घर छोडकर आया हूँ.

रोहित बोला ये क्या बोल रहा है, अगर तूझे मेरी बात पर यकीन नहीं है, तो तू खुद चल कर क्यों नहीं देख लेता.

आज गनु काका को मरके १३ दिन हो गये है, उसी श्मशान के घर में हो उन्होंने अपना दम तोड दिया था.

सत्यकांत जी को दोस्त की बात पर यकीन नहीं था, इसलिए उन्होंने माँ से जाकर पूछा, तो माँ ने भी वही जवाब दिया.

इस तरह से गनु काका की आत्मा, सत्यकांत जी आखरी बार मिलने आयी थी.

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4. नए मकान में पुराने प्रेतों का आतंक Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

ये कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है. जो मुझे मुंबई से शिरीष जी ने भेजी है. इस कहानी को उनके शब्दों में दे रहा हूँ.

शिरीष:- मेरे पिताजी एक पुलिस अफसर थे, ये बात 1993 की है, जब उनका तबादला मुंबई में हुआ था,  इसी वजह से हम मुंबई में शिफ्ट हो गए थे.

तबादले के बाद दुसरे महीने में ही, पिताजी ने मुंबई में दो मकान खरीदे, दोनों मकान दो मंजिला और खूबसूरत थे.

मानो किसी पाटिल की हवेली जैसे और ऊपर से काफी सस्ते में बिक रहे थे.

उसमे से एक में हम रहने लगे और दूसरा मकान पिताजी की पहचन से तुरंत ही भाड़े पर चढ़ा दिया.

जब पहले दिन हम वहा रहने गए, उसी दिन से जो कोई दूसरी मंजिल पर सोता, उसे रात को एक धीमी-धीमी रोने की आवाज सुनिई देती थी.

मानो कोइ औरत या बच्चा हमारे सिरहाने बैठ के रो रहे हो. हम 3 भाई बहन और मम्मी-पापा 5 लोगो का परिवार है.

सबने वहा रात मे सोकर देखा, सबको यही अनुभव मिला और एक दिन मम्मी के चहरे पर तो किसि बच्चे के नाखूनों से खरोंच के निशान भी मिले.

उसी से दिन से पिताजी ने उपरी मंजिल बंद कर दी और हम सब निचे की मंजिल का ही इस्तेमाल करने लगे.

जो दूसरा मकान हमने भाड़े पे चढ़ाया था, उसमे तो गजबी की प्रेत आत्मा थी. वो मकान दो बार भाड़े पे चढाया गया. उस प्रेत आत्मा ने दोनों को भी बुरी तरह से डरा दिया था.

पहली बार एक अकेला लड़का रहने आया था, पहले दिन से ही उसके साथ भुतहा घटनाएं होने लगी. उसका ये कहना था की उसका लैपटॉप कोई बार-बार शट डाउन करता था.

वो जब वो टीवी देखते-देखते खान खाता था. तब उसकी थाली में से रोटी गायब हो जाती, या फिर पानी के ग्लास में से आधा पानी गायब हो जाता, एक बार तो नहाते वक्त उसे बाथरूम में किसीने धक्का भी दिया था.

उसने दुसरे दिन सुबह ही घर खाली कर दिया.

दूसरी बार वहा पर तीन लोगो की फॅमिली रहने आयी.

उन्होंने ने तो दुसरे दिन सुबह चार बजे ही रूम खाली कर दिया था, वो फॅमिली चाबी हाथ में लिए बाहर आंगन में रुके थे.

जब पापा ने आंगन से आवाजे सुनी तब दरवाज खोला, तो उन्होंने चाबी पापा के हाथ में लाकर दी थी.

उस समय उन सभी के चेहरे डरे हुए थे.

पापा ने जोर देके पूछा तब उन्होंने बताया, उस घर में दो प्रेत आत्मा है,  जिनकी झलक भी उन्होंने देखि थी.

उन प्रेतों ने बहुत बुरे तरीके से तंग किया. रात के खाने में उस परिवार ने मटन पकाया था.

पर जब वो खाने के लिए बैठे,  तब पतीले में सिर्फ हड्डिया थी मांस गायब था.

पापा ने भी ज्यादा सवाल किये नहीं और उनके पैसे वापस कर दिए और अब हमारी बारी थी.

हमे भी धीरे-धीरे वही सब अनुभव मिलने लगे. फिर मम्मी और पापा आस पास रहने वाले पुरने लोगों के घर गए.

और पूछताछ की तो पड़ोसियों ने बताया, वह मकान भुतहा है क्योंकि उस घर को हथियाने के लिए. एक बिल्डर ने एकही परिवार के 4 लोगो को उसि घर ने मरवाया था.

वह बिल्डर तो एक हादसे में मर गया, पर उन 4 लोगों की प्रेत आत्मा उसी घर ने भटक रही है, इसलिए उस घर में कोई टिकता नहीं.

वो आत्माए सभी को डरा के भगा देती है. मेरे पिताजी ने एक गलती की थी की सस्ते दामो के चक्कर में आसपास पूछ-ताछ किये बिना पुराने घर खरीद लिए थे.

इसी वजह से वह अतृप्त आत्माए हमारे गले पड गई थी, फिर पिताजी ने थोडा पुलिस पावर दिखाकर,

उसी ब्रोकर को ही दोनों  मकान वापस बेच दिए. उसके बाद हम पुलिस कॉटेज में शिफ्ट हो गए और 1 साल बाद हमने खुदका मकान खरीद लिया.

मै अभी भी मुंबई में ही रहता हु, उस भुतहा मकान की जगह अब फूलो और फवारो वाला पार्क बना है.

5. भूतहा पागलखाना Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

अविनाश जिस हॉस्पिटल में काम कर रहा था, उस पर किसी रईस आदमी ने केस कर दिया था और अब हॉस्पिटल बंद होने की वजह से अविनाश नई नौकरी की तलाश कर रहा था.

वो ये बात जनता था की उस केस की वजह से उसे नइ नौकरी मिलने में तकलीफ होगी. रातको सोने से पहले जब उसने अपना लैपटॉप खोला, तो उसे एक ईमेल आया हुआ था.

दुर्गावती मेंटल हॉस्पिटल ने डॉक्टर की एक पोस्ट के लिए, उसे आमंत्रित किया गया है. उसने उस मेल की प्रिंटआउट निकाल कर अपने पास रखली.

अपना जरुरी सामान एक बैग में भर के जाने के तैयार्री कर ली.  अगली सुबह वह उस पते पर जा पंहुचा. हॉस्पिटल के बंद गेटे के पास जाकर उसने आवाज लगायी, वाचमै वाचमैन कोइ है क्या वहा? 

पर उसे अंदर से कोई भी जवाब नहीं मिला, फिर खुद ही गेट खोलकर अविनाश अंदर गया.  तभी हॉस्पिटल में से भागते हुए. एक आदमी बाहर आया और बोला चुन्नीलाल तुम्हे आने में इतनी देर क्यों हो गई?.

अविनाश को कुछ समझ में नहीं आया,  वो अपने पीछे देखने लगा की कही वो आदमी किसी और से बात तो नहीं कह रहा है.

इतने में ही वह आदमी उसके बिलकुल नजदीक आकर खड़ा हुआ और फिर बोला हरिलाल मेरे समोस कहा है? इस बात पर अविनाश ने उत्तर दिया.

कौन से समोसे भैया, में यहाँ नौकरी करने आया हु, समोसे बेचने नहीं. अविनाश की इसी बात पर वह आदमी ने गुस्से में बोला.

साले अपने मालिक से जबान लड़ता है, यह कहकर उसने अविनाश को एक कसके कंटाप बजा दिया. अविनाश सामान समेत जमीन पर गिर पड़ा, उसे दिन में तारे दिखने लगे.

तभी हॉस्पिटल से दो वार्डबॉय और एक डॉक्टर दौड़ते हुए आये और उस आदमी को पकड के रखा.

डॉक्टर ने अविनाश को उठने में मदत की और बोले की ये एक पागल मरीज है. कभी कभी नजर चुराके भाग कर बाहर आता है.

अविनाश कान के ऊपर हाथ रखकर, उस पागल की तरफ देखने लगा. जाते-जाते उस पागल ने एक और धमकी देदी. “तू मिल अंदर तुजे फ्रिज में ही बंद करता हूँ” 

हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा.

तुम अविनाश होना, जो यहाँ नए डॉक्टर की पोस्ट के लिए आये हो. अविनाश बोला जी मै वही हूँ और उसने जेब से ईमेल का प्रिंट आउट निकालकर दिखाया.

डॉक्टर ने वो प्रिंट आउट लेते हुए कहा, मै सीनियर डॉक्टर बनवारी हूँ. अविनाश तुम अबसे इन पागल मरीजों की आदत डाल लो.

इसकी तरह और पागल हॉस्पिटल में भरे पड़े है और तुम्हे उन्हें रोज देखना है, फिर डॉक्टर बनवारी अविनाश को उनकी केबिन में लेकर गए और उसके सारे जरुरी सर्टिफिकेट जमा कर लिए.

अविनाश को उसकी जिम्मेदारियां समझाने के बाद, आखिर में उन्होंने एक चतावनी भी दी की रातको हॉस्पिटल में अकेले कहीं पर भी मत घूमना. किसी डॉक्टर या वार्ड बॉय को अपने साथ में जरुर रखना.

फिर अविनाश ने पूछा की ऐसा क्यों?  तो डॉक्टर बोले अब तुम्हे वार्ड बॉय वीरू बाकि सबकुछ समझा देगा.

मेरे मरीजो को दखने का समय हो गया है,  यह कहकर डॉक्टर वहां से चले गए.

वार्ड बॉय वीरू अविनश को हॉस्पिटल दिखाने ले गया.

हॉस्पिटल देखते-देखते अविनाश ने पूछ की वो डॉक्टर बनवारी ऐसा क्यों बोल रहे थे, रात को हॉस्पिटल में अकेले मत घुमाना.

वीरू बोला साहब इस हॉस्पिटल में रातको पुराने मरे हुए मरीजो की आत्मा दीखती है. इस बात को सुनकर  अविनाश की हंसी छूट गई, वह हस्ते हुए बोला वीरू भाई ये भूत प्रेत कुछ नहीं होता,

सिर्फ मन का वहम होता है. वीरू ने इसबात का जवाब सिर्फ एक अजीब सी मुस्कान से दिया. सबसे परिचय होने के बाद, श्याम होते होते अविनाश हॉस्पिटल के सभी स्टाफ में घुल मिल सा गया.

फिर रात का खाना खतम करके, अविनाश ने सिनिअर डॉक्टर्स के साथ मरीजों के कमरों में एक राउंड लगाया.

उसके बाद सभी डॉक्टर स्टाफ रूम में बैठे, कोइ किताब पढने लगा, या कोई अपनी फाइल्स चेक करने लगा. उन्होंने अविनाश को भी अपने साथ बैठने के लिए कहा.

पर अविनाश बोला में यही पास में ही अपने केबिन में, बैठकर कुछ पुराणी फाइल पढ़ लेता हूँ.

ऐसा कहकर वह केबिन में जाकर बैठाम, दिन भर की भाग दौड से उसे नीदं आ रही थी.

इसलिए उसने सोचा क्यों ना एक छोटीसी झपकी ली जाये. उसने टेबल पर अपना सिर रखा और थोड़ी देर के लिए आंखें बंद कर ली.

तभी अचानक उसे ऐसा महसूस होने लगा की दो लोगो ने पकड़ कर उसके सिर को टेबल पर दबा रखा है.

और उसकी सांसे उसके गले में अटक रही हो, वह अपने आप को खड़ा करने की कोशिस में हाथ पैर मारने लगा. तभी उसकी आंख खुली और देखा तो उसके आस पास कोइ नहीं था. पर किसी के होने का एहसास जरुर था.

उसने अभी जो कुछ महसूस हुआ, उसे एक के बुरा सपना मन लिया और केबिन से बाहर चला गया.

उसने सोचा की थोडा ठंडा पानी मुंह पर मार के नींद को काबू में करना पडेगा,इसलिए वह बाथरूम में गया. वह आंखे बंद करके ठंडे पानी से मुंह धोने लगा और जब उसने आंखे खोली तब उसके बदन में डर से एक बिजली सी दौड़ गई, क्योंकि आईने में उसके पीछे एक आधा जला हुआ आदमी हवा में खड़ा था.

अविनाश उसे देखकर इतना डर गया की उसकी घिग्घी बंद हो गई थी, वो मदत के लिए किसी कोबुला भी नहीं पा रहा था. डर के मारे एक जगह पर जम सा गया था. अविनाश को फिर से वही एहसास हुआ, जैसे उसे किसी ने जखड रखा हो.

उसने एड़ी चोटी का जोर लगाकर, उस जखड से खुद को आजाद करलिया और दरवाजे को धकेलकर बाहर भागा. दौड़ते भागते वह स्टाफ रूम में पंहुचा, पर स्टाफ रूम एकदम खाली था.

अविनाश वीरू को आवाज देते हुए, सभी मरीजो के कमरों एक-एक करके झाँकने लगा. पर एक भी कमरे में न कोई डॉक्टर था, न कोई मरीज पुरे हॉस्पिटल में किसी कब्रिस्तान जैसा माहौल था.

उसे इस बात पर यकींन करने में देर नहीं लगी की हॉस्पिटल मे सिर्फ वह अकेला है. डर से वह थर-थर कांपने लगा और वैसे ही गिरते पड़ते चीखते चिलाते. वह होस्पिटल से बाहर भागने की  कोशिश करने लगा.

भागते-भागते अविनाश की नजर उसकी खुदकी केबिन के कांच से अंदर बैठे, एक चेहरे पर पडी और उसको देखते ही डर और हैरानी से उसकी आंखे चोडी होती चली गई.

क्यों केबिन में अविनाश की लाश टेबल पर सिर टिका कर पडी थी, उसकी मौत कुछ देर पहले ही हो चुकी थी.

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6. अतृप्त आत्माओं का कहर Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi

आरव एक सरकारी बैंक में बड़े ओहदे काम कर रहा था, काफी कम उम्र में उसने कड़ी मेहनत से उस ओहोदे पर अपना हक़ जमाया था.

उसकी शादी को बस 3 महीने ही हुए थे और उसको तबादले का सरकारी फरमान मिला, उसमे लिखा था की बुरानगर में बैंक की एक नइ शाखा खुल रही है और उसकी पूरी जिम्मेदारी आरव को सौंपी गई है.

इस फरमान ने उसे परेशानी में डाला दिया था, उसने ये बात जब अपने माता पिता को बताई, तब उन्होंने कहा बेटा तुम हमारी चिंता मत करो.

तुम वहा जाकर अपनी पत्नी और नौकरी का खयाल रखो. हम कुछ ही दिनों में तुम्हारे पास आ जायेंगे.  माता पिता की अनुमति ले कर, आरव को तस्सली मिली.

वह अपनी बीवी सुमित्रा को लेकर बुरानगर में शिफ्ट हो गया.  सरकार ने आरव के रहने का बंदोबस्त एक पुराणी हवेली में पहले से ही कर दिया था.

वो हवेली इनामदार नामके सावकार ने बैंक के पास गिरवी रखी थी, समय पर कर्जा चुकता ना करने की वजह से उसपर सरकारने अपना हक जमा लिया था.

वहां पहुचने के बाद सुमित्रा उस आलीशान हवेली को देखकर, बहुत खुश हो गई थी और उसे खुश देखकर आरव भी खुश हुआ. नई बैंक हवेली से काफी नजदीक थी, इसलिए आरव की परेशानियां कम थी.

एक बड़ी सी हवेली की साफ सफाई के लिए, नौकरों की भी जरूरत थी.

नौकरों के लिए गाँव में पूछ ताच की तो गाँव के लोग सिर्फ एक शर्त पर कामपर आने के लिए तैयार हुए की उनमे से कोइ भी नौकर दिन ढलने के बाद हवेली में नहीं रुकेगा.

दुसरे दिन सुबह सभी कामगार समय पर आ गये, आरव उन सभी का जिम्मा सुमित्रा के पास देकर बैंक में चला गया.

सुमित्रा ने सबको अपने-अपने काम समझा दिए.

पहले दिन काम से लौटने के बाद, आरव ने बीवी से हवेली में पहला दिन कैसा गुजरा यह पूछा. सुमित्रा ने बताया की अच्छा गुजरा पर पता नहीं गाँव के लोग यहां काम करने से डरते है.

सुमित्रा ने आरव को हवेली की एक और चीज भी दिखाई, वह उसका हाथ पकड कर घर पीछे ले गई. वहां पर एक पुराना कुआँ था. उसे देखकर पता चल रहा था की वह बहुत सालो से बंद रखा था.

सुमित्रा ने आरव से कहा आप शहर से किसी को बुलाकर, इस कुएँ की सफाई करवा लीजिये, क्योंकि कोइ भी इसमें उतर ने को तैयार नहीं है.

आरव ने कुएँ के नजदीक जाकर उसमे एक दफा झांक कर देखा और वापस पीछे मुडा पर मुड़ने के बाद, उसको ऐसा लगा की अभी-अभी उसकी नजरो ने कुएँ की सीढियों पर किसी आदमी को देखा.

दिन लगभग ढल चुका था, इसलिए कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था और कुआँ गहरा होने की वजह से, उसमे घोर अँधेरा था. उसने अपने मोबाइल की टॉर्च जला के एक दफा फिर से देखा.

उसे लगा शायद उसे कोई आभास हुआ होगा, फिर भी आरव के मन में कुछ अनहोनी का डर था, इसलिए उसने सुमित्रा को हिदायत दे दी थी.

कुएँ को साफ करने से पहले तुम यहाँ मत आना. रात के खाने के बाद वह नया जोडा एक दुसरे से लिपट कर सो गया.

मध्यरात्रि में बाथरूम के नल में से पानी बहने की आवाज से, सुमित्रा की नींद खुल गई. सुमित्रा को लगा की आरव को नल बंद करने के लिए बोल दूं, लेकिन आरव की नीदं कच्ची थी, एक बार टूटने पर वापस जल्दीसे उसे नीदं नहीं अति थी, इसलिए उसने खुद से नल बंद करने का फैसला कर लिया.

बाथरूम हवेली के सबसे आखरी कमरे में था, इसलिए सुमित्रा उस तरफ जाते हुए, बीच के हर एक कमरे की लाइट चालू करते-करते वहा पहुँची. 

जब उसने बाथरूम के कमरे की लाइट जलाई, तो उसे उसकी आँखों के सामने एक ऐसा डरावना नजारा दिखा, जिसको दखते ही उसकी रगों में दौडता हुआ खून सुख गया.

सुमित्रा जोर से चीखकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पडी, क्योंकि उसके सामने हवेली के पुराने मालिक इनामदार और उसका परिवार मुस्कुराते हुए खडा था, जो लगभग 25 साल पहले मर चूका था.

उस परिवर की एक बडी सी तस्वीर सुमित्रा ने सुबह ही साफ की थी. अराव ने जब सुमित्रा की चीख सुनी वह हडबडा कर उठा और बाथरूम की और भागा.

वहा उसे सुमित्रा बेहोशी की हालत में मिली, आरव ने उसे बाहों उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया.

जब वह होश में आयी तब सामने बैठे आरव से थर-थर कांपते हुए लिपट गई. उसे तेज बुखार चढ़ गया था, अराव ने डरी हुए सुमित्रा से पूछा की तुम चीखी क्यों तब उसने बताया.

वह रातको पानी का नल बंद करने गई थी, वहा उसे हॉल में लगी उस तस्वीर के मरे हुए तीनो लोग दिखे थे.

वह तीनो उसे बुला रहे थे, आरव ने कहा पर में जब वहा तुम्हे देखने आया था,  तब तो कोइ नल चलू नहीं था. क्या तुमने वह बदं किया था और कमसे कम तुम वहा जाते वक़्त एक दो कमरों की लाइट तो लगाकर जाती,मै दो बार सोफे से टकराके गिरते-गिरते बचा.

सुमित्रा के चहरे पर डर के बादल छाने लगे, वह बोली मैंने तो सभी कमरों की लाइट लगा दी थी और नल भी वैसा छुट गया था.

अराव बोला सुमित्रा तुमना अपने लैपटॉप पर वह डरावनी कहनिया और फिल्मे जरा कम देखा करो.

और रही बात उन हॉल वाली मनहूस तस्वीरों की मै कल के कल ही सभी निकलवा दूंगा. डरी हुई सुमित्रा को जैसे तैसे समझा कर आरव ने अपनी बाहों में सुला दिया.

पर उसको को अब नींद नहीं आरही थी, उसे वह कुएँ के सीढियों वाला आदमी बार-बार याद आ रहा था, इसलिए वह मोबाइल पर कुछ देर गेम खेलता रहा.

फिर वह उठकर किचन में पानी पिने गया, किचन में जाते वक्त वह हॉल में थोड़ी देर रुका और उस तस्वीर को उसने ध्यान से देखा.

उसे भी लगा की यह तस्वीर सच मे कुछ ज्यादा ही भयानक है, इसलिए सुमित्रा को वह डरावना भ्रम हुआ होगा.

किचन से पानी पिने के बाद जब वह लौट रहा था, तब ना चाहते हुए भी उसकी तिरछी नजर इनामदार की उस पारिवारिक तस्वीर पर पडी और  घबराहट से उसके दिल की धड़कने तेज हो गई थी, क्योंकि वह तस्वीर खाली थी.

उसे दखने के बाद आरव ना भागा और नाही चीखा, बस कांपते हुए नाक की सीध में चलता गया.

अब उसने दिल से ठान लिया था की वह अभी के अभी सुमित्रा को लेकर हवेली से बाहर निकले गा.

उसे यकीन हो गया था की इस हवेली में वह दोनों अकेले नहीं है और सुमित्रा ने सच में प्रेत आत्माओं को देखा था.

जब वह बेडरूम में पंहुचा, तब बड़ी मुश्किल से सुलाई हुई सुमित्रा बेड पर नहीं थी.

पहले से ही डर ने उसके दिमाग में आतंक मचाया था और अब सुमित्रा?

वह हर एक कमरे की लाइट जलाते हुए, बाथरूम की ओर बढ़ा, यह सोचकर की शायद वो वही किसी कमरे में बैठी हो.

आरव के बाथरूम में पहुचंते ही, उसे किसी के पानी में कूदने की आवाज आयी.

आरव तुरंत एड़ी चोटी का जोर लगाकर, घर के पीछे जा पंहुचा और वहा का नजारा देख उसकी सांसे पल भर के लिए रुक सी गई.

क्योंकी कुएँ के किनारे पर इनामदार, उसकी पत्नी, और सुमित्रा तीनो एक साथ खड़े थे और आरव की आँखों के सामने पल भर में ही तीनो के तीनो एक साथ उस गहरी कुएँ में कूद गए.

वह देखकर आरव जोर से चिलाया और उठकर अपने बिस्तर पर बैठ गया. क्योंकि वह एक बुरा सपना था. उसकी आवाज सुनकर सुमित्रा भी उठगई और पूछने लगी. क्या हुआ तुम क्यों चीखे?

आरव ने कहा कुछ नहीं बस एक बेकार सा सपना था, ऐसा कहकर उसने बात को टाल दिया और तब तक सुबह हो चुकी थी.

नौकरों ने साढ़े छह बजे  ठीक दरवाजा खट खटाया, रात के डरावने किस्से से सुमित्रा को तेज बुखार था. इसी वजह से अराव ने उसदिन बैंक से छुट्टी ली थी.

उस दिन आरव सुमित्रा को गाँव के अस्पताल में ले गया, आते वक्त दोनों गाँव के मुखिया जी से मिले और उस मनहूस डरावनी हवेली का सच्च पूछा.

उन्होंने बताया की इनामदार के परिवार में तीन लोग थे, वह तीनो गाँव के लोगो से किस दुश्मन की तरह पेश आते थे.

उनके बेटे ने तो हर एक जुआ खाने में उधारी कर रखी थी, हर रोज मारपीट करके आता था और बाप पुरा दीन नशे धुत रहता था.

माँ ने भी कभी किसी को रोका नहीं, उन्होंने बैंक से व्यापार के लिए लोन लेकर अय्याशी की  और जब कर्जा चूका नहीं पाए, तब बैंक ने उनकी हवेली पर कब्ज़ा करने के आदेश दिए.

 वह तीनो हवेली छोडने के लिए तैयार नहीं थे.

आखिर में तीनो ने हवेली के पीछे वाले कुएँ में कूद कर आत्महत्या करली थी. पर आज भी उनकी प्रेतात्मा अमावस्या के दिन कभी कभी कुएँ पर खडी दिखती है.

कल भी अमावस्या ही थी, शायद आपको भी कोई भुतहा अनुभव मिला होगा. मुखिया की बात पूरी होने के बाद, अराव ने उन्हें उनकी आपबीती सुनाई.

आखिर में मुखियाने उन दोनों को गाँव में एक अच्छा मकान किराये पर रहने की लिए दिलवाया और उसी दिन दोपहर तक वह गाँव के नए घर में शिफ्ट हो गए.

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