108 Names of surya dev in hindi

सूर्य भगवान के 108 मंगलमय नाम 108 names of surya dev in hindi

सूर्य भगवान को वेदों की भाषा में इस समस्त जीव सृष्टि की आत्मा कहा जाता है.अगर सूर्य एक दिन भी अपना कार्य चुक जाये. तो पृथ्वी पर प्रलय आजायेगा. सजीव अपना प्राण खो बैठेंगे.यह एक कुदरती (सृष्टि) का अटल सच है.सूर्य का अर्थ है सभी को जीवन रूपी ज्योति से प्रकाशमान करने वाले. हमारे भारत में वैदिक काल से ही सूर्य की पूजा होती आ रही है.

भारत का सबसे प्रसिद्ध सूर्यदेव का मंदिर कोणार्क सूर्य मन्दिर है. जो उड़ीसा राज्य स्तिथ में है. कोणार्क सूर्य मन्दिर को यूनेस्को द्वारा १९८४ में विश्व धरोहर स्थल होने मा सन्मान दिया है. सूर्य भगवान पुरे विश्वभर में पूजे जाते है.

इस ब्लॉग पोस्ट में हम 108 names of surya dev in hindi और 108 नाम दे रहे है. इन सभी नाम को जपने के बहुत सारे फायदे है. जैसे . इन्हें पढने से मन एकाग्रचित होता है.मानव शरीर रोग विरहित और सूर्य की तरह तेजस्वी हो जाता है.

सूर्य देवता के नाम जपने से संतान(बच्चा )प्राप्ति होती है. और भी बहु सारे फायदे है. 108 names of surya dev in hindi  पढने के जो इस एक पोस्ट में बताना मुश्किल है.

सूर्य भगवान के 108 मंगलमय नाम 108 names of surya dev in hindi

1.नाम: अरुण
मंत्र: ॐ अरुणाय नमः।
भावार्थ: तांबे जैसे रंग वाले –लालिमायुक्त भूरा

2.नाम: शरण्य
मंत्र: ॐ शरण्याय नमः।
भावार्थ: सबको शरण देने वाले.

3.नाम: करुणारससिन्धु
मंत्र: ॐ करुणारससिन्धवे नमः।
भावार्थ: जो करुणा दया का महासागर है.

4.नाम: असमानबल
मंत्र: ॐ असमानबलाय नमः।
भावार्थ: जिनके पास अवकाश का बल है.

5.नाम:आर्तरक्षक
मंत्र: ॐ आर्तरक्षकाय नमः।
भावार्थ: पीड़ित होने से बचाने वाले.

6.नाम: आदित्य
मंत्र: ॐ आदित्याय नमः।
भावार्थ: देवी अदिति की संतान.

7.नाम: आदिभूत
मंत्र: ॐ आदिभूताय नमः।
भावार्थ: ब्रह्मांड के सबसे पहले जीव.

8.नाम: अखिलागमवेदिन
मंत्र: ॐ अखिलागमवेदिने नमः।
भावार्थ: जिनको सभी शास्त्रों का ग्यान प्राप्त है.

9.नाम: अच्युत
मंत्र: ॐ अच्युताय नमः।
भावार्थ: जिनका कभी विनाश नहीं हो सकता. और जो स्थिर है.

10.नाम: अखिलज्ञ
मंत्र: ॐ अखिलज्ञाय नमः।
भावार्थ: जो सबकुछ जानने वाले है.

11.नाम: अनन्त
मंत्र: ॐ अनन्ताय नमः।
भावार्थ: जिनकी कोई सीमा नहीं. अंत नहीं.

12.नाम: इना
मंत्र: ॐ इनाय नमः।
भावार्थ: जो शक्तिमान है. बलवान है.

13.नाम: विश्वरूप
मंत्र: ॐ विश्वरूपाय नमः।
भावार्थ: जो सभी रूपों में दिख सकते है. इसलिय विश्वरूप है.

14.नाम: इज्य
मंत्र: ॐ इज्याय नमः।
भावार्थ: जो सभी के लिए आदरणीय , पूजनीय है.

15.नाम: इन्द्र
मंत्र: ॐ इन्द्राय नमः।
भावार्थ: जो देवगन के अधिपति है.

16.नाम: भानु
मंत्र: ॐ भानवे नमः।
भावार्थ: जो तेजपुंज है, सबसे अधिक तेजवाले है.

17.नाम: इन्दिरामन्दिराप्त
मंत्र: ॐ इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः।
भावार्थ: जिनको इंदिरादेवी (लक्ष्मी) का घर मिला है.

18.नाम: वन्दनीय
मंत्र: ॐ वन्दनीयाय नमः।
भावार्थ: जो प्रशंसनीय है. देवता जिनके गुण गाते.

19.नाम: ईश
मंत्र: ॐ ईशाय नमः।
भावार्थ: जो सभी के स्वामी है.

20.नाम: सुप्रसन्न
मंत्र: ॐ सुप्रसन्नाय नमः।
भावार्थ: जो सबसे अधिक तेजस्वी है.

21.नाम: सुशील
मंत्र: ॐ सुशीलाय नमः।
भावार्थ: जो अतिशय सज्जन है.

22.नाम: सुवर्चस्
मंत्र: ॐ सुवर्चसे नमः।
भावार्थ: जो प्रतिभाशाली है.

23.नाम: वसुप्रद
मंत्र: ॐ वसुप्रदाय नमः।
भावार्थ: सभी को संपत्ति प्रदान करने वाले.

24.नाम: वसु
मंत्र: ॐ वसवे नमः।
भावार्थ: जो उत्कृष्ट भगवान है.

25.नाम: वासुदेव
मंत्र: ॐ वासुदेवाय नमः।
भावार्थ: जो वासुदेव स्वरूप है.

26.नाम: उज्ज्वल
मंत्र: ॐ उज्ज्वल नमः।
भावार्थ: जिनकी काया रूप हमेशा प्रज्वलनशील रहता है.

27.नाम: उग्ररूप
मंत्र: ॐ उग्ररूपाय नमः।
भावार्थ: जिनका रूप अतिभयंकर है.

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28.नाम: ऊर्ध्वग
मंत्र: ॐ ऊर्ध्वगाय नमः।
भावार्थ: जो सबसे ऊपर उठे हए है. सबसे बड़े आकार के है.

29.नाम: विवस्वत्
मंत्र: ॐ विवस्वते नमः।
भावार्थ: जो सबके ऊपर चमक (तेजपुंज) रहे है.

30.नाम: उद्यत्किरणजाल
मंत्र: ॐ उद्यत्किरणजालाय नमः।
भावार्थ: जो प्रकश और उर्जा की निर्मिती करते है.

31.नाम: हृषीकेश
मंत्र: ॐ हृषीकेशाय नमः।
भावार्थ: जो इंद्रियों के स्वामी है. इंद्रियों को नियंत्रित कर सकने वाले.

32.नाम: ऊर्जस्वल
मंत्र: ॐ ऊर्जस्वलाय नमः।
भावार्थ: जो सामर्थ्यवान है

33.नाम: वीर
मंत्र: ॐ वीराय नमः।
भावार्थ: जो बहादुर वीर है.

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34.नाम: निर्जर
मंत्र: ॐ निर्जराय नमः।
भावार्थ: जिनका भी नाश नहीं हो सकता.

35.नाम: जय
मंत्र: ॐ जयाय नमः।
भावार्थ: जो विजेता है.

36.नाम: ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथी
मंत्र: ॐ ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथये नमः।
भावार्थ: जिनके सारथी के पास जांघ(Thighs) नहीं है

37.नाम: ऋषिवन्द्य
मंत्र: ॐ ऋषिवन्द्याय नमः।
भावार्थ: जिनकी पूजा ऋषियों को प्रिय है.

38.नाम: रुग्घन्त्र्
मंत्र: ॐ रुग्घन्त्रे नमः।
भावार्थ: जो सभी प्रकार के रोग का नाश करते है.

39.नाम: ऋक्षचक्रचर
मंत्र: ॐ ऋक्षचक्रचराय नमः।
भावार्थ: जो सितारों के पहिये के माध्यम से चलते है.

40.नाम: ऋजुस्वभावचित्त
मंत्र: ॐ ऋजुस्वभावचित्ताय नमः।
भावार्थ: जिनका मूल स्वाभाव ईमानदार है. जो अपने काम से कभी चुकाते नहीं.

41.नाम: नित्यस्तुत्य
मंत्र: ॐ नित्यस्तुत्याय नमः।
भावार्थ: जो हेमशा स्तुति करने योग्य है.

42.नाम: ऋकारमातृकावर्णरूप
मंत्र: ॐ ऋकारमातृकावर्णरूपाय नमः।
भावार्थ: ऋकारा पत्र के आकार वाले महान ईश्वर.

43.नाम: उज्ज्वलतेजस्
मंत्र: ॐ उज्ज्वलतेजसे नमः।
भावार्थ: जो धधकती आग के तेज वाले है.

44.नाम: ऋक्षाधिनाथमित्र
मंत्र: ॐ ऋक्षाधिनाथमित्राय नमः।
भावार्थ: जो सितारों के भगवान का चंद्रमा चंद्रग्रह के देव है.

45.नाम: पुष्कराक्ष
मंत्र: ॐ पुष्कराक्षाय नमः।
भावार्थ: जिनकी आंखे कमल के सामान है

46.नाम: लुप्तदन्त
मंत्र: ॐ लुप्तदन्ताय नमः।
भावार्थ: जिन्होंने अपने दाँत खो दिए.

47.नाम: शान्त
मंत्र: ॐ शान्ताय नमः।
भावार्थ: जो शांत है.

48.नाम: कान्तिद
मंत्र: ॐ कान्तिदाय नमः।
भावार्थ: जो सबको सौंदर्य देते है.

49.नाम: घन
मंत्र: ॐ घनाय नमः।
भावार्थ: जो विनाशक भी है.

50.नाम: कनत्कनकभूष
मंत्र: ॐ कनत्कनकभूषाय नमः।
भावार्थ: जिन्होंने शानदार सुनहरे आभूषण पहने हुए है

51.नाम: खद्योत
मंत्र: ॐ खद्योताय नमः।
भावार्थ: जो आकाश में प्रकाश के निर्माता है.

52.नाम: लूनिताखिलदैत्य
मंत्र: ॐ लूनिताखिलदैत्याय नमः।
भावार्थ: जो सभी राक्षसों के विनाशक है.

53.नाम: सत्यानन्दस्वरूपिण्
मंत्र: ॐ सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः।
भावार्थ: वह जिनका स्वभाव सच्चा आनंद है.

54.नाम: अपवर्गप्रद
मंत्र: ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।
भावार्थ: जो मुक्ति प्रदान करते है.

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55.नाम: आर्तशरण्य
मंत्र: ॐ आर्तशरण्याय नमः।
भावार्थ: जो व्यथित सजीव को आश्रय देते है.

56.नाम: एकाकिन्
मंत्र: ॐ एकाकिने नमः।
भावार्थ: जिन्हें एकांत पसंद है.

57.नाम: भगवत्
मंत्र: ॐ भगवते नमः।
भावार्थ: जो पवित्र ईश्वर है.

58.नाम: सृष्टिस्थित्यन्तकारिण्
मंत्र: ॐ सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे नमः।
भावार्थ: जो सबकुछ निर्माण करते है .उसे संभलते है और फिर उसका विनाश भी करते है.

59.नाम: गुणात्मन्
मंत्र: ॐ गुणात्मने नमः।
भावार्थ: जो सबसे अधिक सर्वगुण संपन्न है.

60.नाम: घृणिभृत्
मंत्र: ॐ घृणिभृते नमः।
भावार्थ: जो प्रकाश ,रोशनी पर एकमेव अधिकार रखते है.

61.नाम: बृहत्
मंत्र: ॐ बृहते नमः।
भावार्थ: सबसे महान और बढ़कर.

62.नाम: ब्रह्मण्
मंत्र: ॐ ब्रह्मणे नमः।
भावार्थ: जो अनन्त ब्राह्मण है.

63.नाम: ऐश्वर्यद
मंत्र: ॐ ऐश्वर्यदाय नमः।
भावार्थ: जो शक्ति के दाता है.

64.नाम: शर्व
मंत्र: ॐ शर्वाय नमः।
भावार्थ: जो पीड़ा भी देते है.

65.नाम: हरिदश्व
मंत्र: ॐ हरिदश्वाय नमः।
भावार्थ: जो हमेशा गहरे पीले के रंग के घोड़े के साथ होते है.

66.नाम: शौरी
मंत्र: ॐ शौरये नमः।
भावार्थ: जो वीरतापूर्ण है.

67.नाम: दशदिक्संप्रकाश
मंत्र: ॐ दशदिक्संप्रकाशाय नमः।
भावार्थ: जिनका तेजोमय प्रकश चारों दिशाओं में फैला हुआ है.

68.नाम: भक्तवश्य
मंत्र: ॐ भक्तवश्याय नमः।
भावार्थ: जो अपने भक्तों के लिए चौकस है.

69.नाम: ओजस्कर
मंत्र: ॐ ओजस्कराय नमः।
भावार्थ: जो शक्तियों का निर्मान करते है.

70.नाम: जयिन्
मंत्र: ॐ जयिने नमः।
भावार्थ: जो हमेशा विजयपूर्ण है.

71.नाम: जगदानन्दहेतु
मंत्र: ॐ जगदानन्दहेतवे नमः।
भावार्थ: जो सृष्टि के लिए खुशी का कारण है.

72.नाम: जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जित
मंत्र: ॐ जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः।
भावार्थ: जो भगवान जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था, दुख इत्यादि से मुक्त है.

73.नाम: उच्चस्थान समारूढरथस्थ
मंत्र: ॐ उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः।
भावार्थ: जी रथ में स्थापित है और जो बुलंद कदमों के साथ चलते है.

74.नाम: असुरारी
मंत्र: ॐ असुरारये नमः।
भावार्थ: जो असुर राक्षसों के परम शत्रु है.

75.नाम: कमनीयकर
मंत्र: ॐ कमनीयकराय नमः।
भावार्थ: जो इच्छापूर्ण करते है.

76.नाम: अब्जवल्लभ
मंत्र: ॐ अब्जवल्लभाय नमः।
भावार्थ: जो अबजा (धनवंतरि) के सबसे प्रिय है.

77.नाम: अन्तर्बहिः प्रकाश
मंत्र: ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः।
भावार्थ: जो अंदर और बाहर से चमकते है.

78.नाम: अचिन्त्य
मंत्र: ॐ अचिन्त्याय नमः।
भावार्थ: जो अकल्पनीय है.

79.नाम: आत्मरूपिण्
मंत्र: ॐ आत्मरूपिणे नमः।
भावार्थ: जो आत्मा का पहला स्वरूप है.

80.नाम: अच्युत
मंत्र: ॐ अच्युताय नमः।
भावार्थ: जिनका कभी नाश नहीं होता .

81.नाम: अमरेश
मंत्र: ॐ अमरेशाय नमः।
भावार्थ: अमर भगवान

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82.नाम: पर ज्योतिष्
मंत्र: ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः।
भावार्थ: सर्वोच्च प्रकाश

83.नाम: अहस्कर
मंत्र: ॐ अहस्कराय नमः।
भावार्थ: दिन का निर्माण करनेवाले.

84.नाम: रवि
मंत्र: ॐ रवये नमः।
भावार्थ: जो गरजता है

85.नाम: हरि
मंत्र: ॐ हरये नमः।
भावार्थ: जो पाप को मिटते है.

86.नाम: परमात्मन्
मंत्र: ॐ परमात्मने नमः।
भावार्थ: सर्वोच्च ईश्वर.

87.नाम: तरुण
मंत्र: ॐ तरुणाय नमः।
भावार्थ: जो हमेशा नौजवाँ है.

88.नाम: वरेण्य
मंत्र: ॐ वरेण्याय नमः।
भावार्थ: सबसे अति उत्कृष्ट भगवान.

89.नाम: ग्रहाणांपति
मंत्र: ॐ ग्रहाणांपतये नमः।
भावार्थ: जो सभी ग्रहों के स्वामी है.

90.नाम: भास्कर
मंत्र: ॐ भास्कराय नमः।
भावार्थ: जो जीवन प्रकाश के निर्माता है.

91.नाम: आदिमध्यान्तरहित
मंत्र: ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः।
भावार्थ: जो शुरुआत, मध्य और अंत में एकांत (अकेले) है.

92.नाम: सौख्यप्रद
मंत्र: ॐ सौख्यप्रदाय नमः।
भावार्थ: जो सभी को सुख प्रदान करते है.

93.नाम: सकलजगतांपति
मंत्र: ॐ सकलजगतांपतये नमः।
भावार्थ: समस्त जगत के स्वामी.

94.नाम: सूर्य
मंत्र: ॐ सूर्याय नमः।
भावार्थ: तेजपुंज ईश्वर

95.नाम: कवि
मंत्र: ॐ कवये नमः।
भावार्थ: जो महाज्ञानी है.

96.नाम: नारायण
मंत्र: ॐ नारायणाय नमः।
भावार्थ: पुरुषार्थ के दृष्टिकोण वाले भगवान.

97.नाम: परेश
मंत्र: ॐ परेशाय नमः।
भावार्थ: जो सबसे ऊँचे भगवान है.

98.नाम: तेजोरूप
मंत्र: ॐ तेजोरूपाय नमः।
भावार्थ: जो अग्नितेज का स्वरूप है.

99.नाम: हिरण्यगर्भ
मंत्र: ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
भावार्थ: जो सृष्टि के लिय सुवर्ण तेज स्रोत है.

100.नाम: सम्पत्कर
मंत्र: ॐ सम्पत्कराय नमः।
भावार्थ: जो सभी को सफलता का आशीर्वाद देते है.

101.नाम: ऐं इष्टार्थद
मंत्र: ॐ ऐं इष्टार्थदाय नमः।
भावार्थ: जो सभी को वांछित वस्तु प्रदान करते है.

102.नाम: अं सुप्रसन्न
मंत्र: ॐ अं सुप्रसन्नाय नमः।
भावार्थ: जो हमेशा प्रसन्नरहते है.

103.नाम: श्रीमत्
मंत्र: ॐ श्रीमते नमः।
भावार्थ: जो महान प्रतापी है.

104.नाम: श्रेयस्
मंत्र: ॐ श्रेयसे नमः।
भावार्थ: जो अति उत्कृष्ट है.

105.नाम: सौख्यदायिन्
मंत्र: ॐ सौख्यदायिने नमः।
भावार्थ: जो सभीको संतुष्टि देते है.

106.नाम: दीप्तमूर्ती
मंत्र: ॐ दीप्तमूर्तये नमः।
भावार्थ: जो सदैव दिये की तरह जलते रहते है.

107.नाम: निखिलागमवेद्य
मंत्र: ॐ निखिलागमवेद्याय नमः।
भावार्थ: जो सभी शास्त्रों के ज्ञाता है.

108.नाम: नित्यानन्द
मंत्र: ॐ नित्यानन्दाय नमः।
भावार्थ: वह जो हरपल आनंदित रहते है.

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जगद्गुरु भगवान श्री कृष्ण की अनमोल विचार धारा.

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