Bhoot Ki Kahani In Hindi

Bhoot Ki Kahani In Hindi वीरान घाटी के भूत प्रेत Bhoot Pret Ki Hindi Kahaniya 2021

Bhoot Ki Kahani In Hindi :- ये कहानी वीरान घाटी के भूत प्रेतों के बारे में है .आपने भी शायद ऐसी  घटियों के बारे में सुना होगा .जहाँ पर भूत प्रेतों का साया रहता है. दिनभर तो ये घटिया कुछ हद तक शांत रहती है. पर रात होते ही वन्यप्राणी तक उस घाटी को छोड़ देते है. और जिन इंसानों को घाटी के कारनामो के बारे में कुछ पता नहीं. या फिर घाटी को पार करने के अलावा उनके पास कोइए दूसरा रास्ता नहीं होता. वो लोग इन भूत प्रेतों का शिकार बनजाते है. ये कहनी ऐसी  ही एक भूतहा घटना की है .कहानी को अतं तक जरुर पढ़े और अंत में कमेंट जरुर करे.

वीरान घाटी के भूत प्रेत Bhoot Ki Kahani In Hindi

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम है श्यामसुंदर। यह भूतहा घटना  मेरे साथ तब घटी थी। जब मेरे गांव की कंपनी बंद हो गई  और मुझे दुसरे गांव में जॉब के लिए जाना पड़ा।

उस नई कंपनी में मुझे जाने के लिए एक छोटीसी विराना घाटी को पैदल ही पार करना पड़ता था। उस घाटी से बहुत कम लोग आते जाते थे। कुछ भूत प्रेत की अफवाये भी सुनी थी। पर मैंने कभी कुछ देखा नहीं था और रात को घने कोहरे की वज़ह से घाटी की नज़दीक भी कोई नहीं जाता था।

नई नौकरी पर जब मुझे नाईट शिफ्ट मिली तब मैंने मेरी पत्नी मीरा को बताया कि अबसे मुझे नाईट शिफ्ट करनी पड़ेगी। उसने कहा कि परेशान मत होना श्यामसुंदरजी ये दिन भी बीत जायंगे आप मेरा ये सोने के झुमके गिरवी रखके एक पुराणी बाइक खरीद लिजिए।

मेरी ज़िन्दगी में मुझे पत्नी अच्छी मिली यही मेरी खुश नसीबी थी। सुबह उसका मुखड़ा देखता हु। तो मुझे में पूरी दुनियासे लड़ने की हिम्मत आजाती है। उसी दोपहर को मैंने हार गिरवी रखके मेरे एक दोस्त की पुरानि बाइक खरीद ली।

  • प्रेतों का आभास   Bhoot Ki Kahani In Hindi

रात को मैं ठीक समय पर घर से निकला जब मैने घाटी में प्रवेश किया तब वहा मुझे एक परिंदा तक नहीं दिखा।  और जब में घटिके बिचो बिच पंहुचा तब अचानक मेरे आस पास ठंड बढने लगी और कही से घना कोहरा जमा होने लगा।

जब में कोहरे से बाहर निकला तब मुझे बाइक कुछ वजनदार लग रही थी। पर उस बात पर मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। बिना रुके और पीछे मुड़े काम पर पोहोंच गया। रास्ते में कुछ एक्का-दुक्का आवाजे आयी थी पर मैंने गाड़ी नहीं रोकी।

दुसरे दिन मुझे घाटी से आता-जाता देखके मेरे दोस्त विकास और वीरू में हिम्मत आ गई। फिर उसी कंपनी में वह भी वह भी जॉब पर लग गये। और उन्हें भी मेरे साथ नाईट शिफ्ट का ऑर्डर मिला। कंपनी में उन दोनों का पहला दिन था। हम तीनो रात को एक साथ घाटी से काम पर जाने वाले थे।

 भूत प्रेत लीला आरंभ  Bhoot Ki Kahani In Hindi

पर विकास और मैं आगे निकल आये क्योंकि वीरू की गाड़ी में कुछ खरबी की वज़ह से थोडा देर से आने वाला था। मुसीबत की शुरुवात तब हुई जब घाटी के बीचो बिच विकास की बाइक बंद पड गई थी। इसलिए हमें घाटी में रुकना पड़ा। घाटी इतनी शांत थी की जरा-सी आहट से रुह कांप जाने लगी।

Bhoot Ki Kahani In Hindi
Bhoot Ki Kahani In Hindi
  • प्रेत ने रचा मायाजाल

विकास बाइक  स्टार्ट करने के कोशिश कर रहा था। तभी अचानक एक आदमी की चीख सानेटे को चीरते हुए हमारे कानोसे आके टकराई। हम सिहर उठे। तभी घाटी के घने कोहरे ने आके हमें घेर लिया। मैंने विकास से कहा भाई तू गाड़ी यही रख बाद में दिन में आके ले जायंगे।

अभी यहां रुकना खतरेसे खाली नहीं लगरह।  फिर हम दोनों मेरी बाइक पर निकले दोनों के मुह से एक शब्द भी निकल नहीं रहा था क्योंकि बस एक ही बात दोनों के दिमाग़ में थी जल्दी घाटी पार करनी है। तभी अचानक पीछे से हॉर्न बजाते हुए वीरू ने हमें ओवरटेक किया। बाइक पर उसके साथ एक और आदमी भी था।

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  • प्रेत ने किया मजाक

मैंने वीरू से पूछा आज तूने अपने साथ ये कौनसे चाचा को लाया है। हमसे भी तो पहचान करवा। वो बोला कोणसे चाचा मैं अकेला ही तो आया हु। मैंने कहा फिर बाइक पर तेरे पीछे कोण बैठा है। वीरू बोला सुंदरभाई तू क्या मेरी फिरकी ले रहा है। और उसने बाइक के हैण्डल से एक हात हटाके पीछे घुमाके दिखाया।

और उसका वह हात उस आदमी के शरीर से आर पार चला गया। फिर वह आदमी हमारी तरफ़ देखके मुस्कुराने लगा। ये सब देखकर विकास और मेरे हात पैर ठंडे हो गए। हम कुछ बोल नहीं पा रहे थे। आवाज जैसे गले में ही अटक गई थी।

मैंने गाड़ी उसके आगे भगनी चाही थी पर गाड़ी नाहीं आगे जापा रही थी और नाही उसमे ब्रेक लग रहा था लग रहा था कि बाइक का हैंडल मेरे हात में है पर चलाने वाल कोई और है। हम वीरू की तरफ़ न देखने की कोशिश कर रहे थे। विकास ने मुझे कसके पकडके रखा था।

दोनों कांप रहे थे। वीरू हमारी बाइक के बराबर बाइक चलाने लगा और हमारी नज़र ना चाहते हुए भी उस भूत पर पड रही थी। वह अभी भी हमरी तरफ़ ही देखरहा था उसके चहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी। अब तक हमारी फट के हात में आचुकी थी।

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  • डर का एहसास

आगे घना कोहरा फैला हुआ था। वीरू को अचानक कुछ हुआ और वह स्पीड से कोहरे में घुस गया। और बादमे हम घुस गए। कोहरा जब ख़तम हुआ। तब वीरू की बाइक हमारे आगे ही थी। पर उसके पीछले सिट पर वह भूत नहीं था। हमें जरासी राहत मिली। घाटी अब खतम होने ही वाली थी।

जब हमारी बाइक वीरू के नज़दीक पोहोंची तब हम उसे सब कुछ बताने ही वाले थे। पर हमसे पहले ही वीरू बोला अरे सुंदरभाई कोहरे में से ये कौनसे चाचा को उठा लाये हो। ट्रिपल सिट बाइक नहीं चलनी चाहिए मालूम हैना।

 कहानी का अंत Bhoot Ki Kahani In Hindi

उसके मुह से ये बात सुनके विकास ने बाइक की सिट गीली करदी और मैं तो अधमरा हो गया और बाइक से नियंत्रण खो दिया फिर हमारी बाइक जाके रोड साइड वाले दल-दल में घुस गई।

विरुने हमें नजदीकी कंपनी के हॉस्पिटल में पहुचाया। हम दोनों को चोट लगी थी पर हात पैर और सिर सलामत थे। बाइक दलदल में घुसने की  वजह से हम बच गए। पर वीरू हैरत में ज़रूर था कि आख़िर उस वक़्त हुआ क्या?

कहानी को अंत तक पढने के लिए धन्यवाद. आपके पास अगर कोइए भी कहानी .या भूतहा घटना का अनुभव है और आप उसे दुनिया को बताना चाहते है. तो मरे उस कहानी को  मरे फ़ेसबुक पेज पर मेसेज करदे. आपके नाम और अगर चाहोतो फोटो के साथ वो  कहानी मेरे इस ब्लॉग पर पब्लिश कर दी जाएगी मरे फ़ेसबुक पेज की लिंक इस पोस्ट में उपलब्ध है और ये  Bhoot Ki Kahani In Hindi  आपको कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया कमेंट करके ज़रूर बताये.

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