Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

|Bhoot Pret Ki Kahani Hindi | वीरान घाटी के प्रेत | Darawni Bhooton Ki Kahani | Hindi Kahaniya

Bhoot Pret Ki Kahani Hindi :- I am Sharing the Bhoot Pret Ki Kahani Hindi. This is completely new horror story on internet आप पढ़ रहे है वीरान घाटी के भूत प्रेत की कहानी हिंदी में .जिनको हिंदी हॉरर स्टोरीज पढना पसंद है. उनको ये स्टोरी डर और रोमांच का एक नया एहसास दिलाएगी  .मेरे ब्लॉग  की और  भी  डरावनी  Bhoot Pret Ki Kahani Hindi जरुर पढ़े.

वीरान घाटी के प्रेत | Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम है श्यामसुंदर। यह भूतहा घटना  मेरे साथ तब घटी थी। जब मेरे गांव की कंपनी बंद हो गई  और मुझे दुसरे गांव में जॉब के लिए जाना पड़ा।

उस नई कंपनी में मुझे जाने के लिए एक छोटीसी विराना घाटी को पैदल ही पार करना पड़ता था। उस घाटी से बहुत कम लोग आते जाते थे। कुछ भूत प्रेत की अफवाये भी सुनी थी। पर मैंने कभी कुछ देखा नहीं था और रात को घने कोहरे की वज़ह से घाटी की नज़दीक भी कोई नहीं जाता था।

नई नौकरी पर जब मुझे नाईट शिफ्ट मिली तब मैंने मेरी पत्नी मीरा को बताया कि अबसे मुझे नाईट शिफ्ट करनी पड़ेगी। उसने कहा कि परेशान मत होना श्यामसुंदरजी ये दिन भी बीत जायंगे आप मेरा ये सोने के झुमके गिरवी रखके एक पुराणी बाइक खरीद लिजिए।

मेरी ज़िन्दगी में मुझे पत्नी अच्छी मिली यही मेरी खुश नसीबी थी। सुबह उसका मुखड़ा देखता हु। तो मुझे में पूरी दुनियासे लड़ने की हिम्मत आजाती है। उसी दोपहर को मैंने हार गिरवी रखके मेरे एक दोस्त की पुरानि बाइक खरीद ली।

  • प्रेतों का आभास Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

रात को मैं ठीक समय पर घर से निकला जब मैने घाटी में प्रवेश किया तब वहा मुझे एक परिंदा तक नहीं दिखा।  और जब में घटिके बिचो बिच पंहुचा तब अचानक मेरे आस पास ठंड बढने लगी और कही से घना कोहरा जमा होने लगा।

जब में कोहरे से बाहर निकला तब मुझे बाइक कुछ वजनदार लग रही थी। पर उस बात पर मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। बिना रुके और पीछे मुड़े काम पर पोहोंच गया। रास्ते में कुछ एक्का-दुक्का आवाजे आयी थी पर मैंने गाड़ी नहीं रोकी।

दुसरे दिन मुझे घाटी से आता-जाता देखके मेरे दोस्त विकास और वीरू में हिम्मत आ गई। फिर उसी कंपनी में वह भी वह भी जॉब पर लग गये। और उन्हें भी मेरे साथ नाईट शिफ्ट का ऑर्डर मिला। कंपनी में उन दोनों का पहला दिन था। हम तीनो रात को एक साथ घाटी से काम पर जाने वाले थे।

वीरान घाटी के भयानक प्रेत | Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

पर विकास और मैं आगे निकल आये क्योंकि वीरू की गाड़ी में कुछ खरबी की वज़ह से थोडा देर से आने वाला था। मुसीबत की शुरुवात तब हुई जब घाटी के बीचो बिच विकास की बाइक बंद पड गई थी। इसलिए हमें घाटी में रुकना पड़ा। घाटी इतनी शांत थी की जरा-सी आहट से रुह कांप जाने लगी।

Bhoot Pret Ki Kahani Hindi
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  • प्रेत ने रचा मायाजाल | Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

विकास बाइक  स्टार्ट करने के कोशिश कर रहा था। तभी अचानक एक आदमी की चीख सानेटे को चीरते हुए हमारे कानोसे आके टकराई। हम सिहर उठे। तभी घाटी के घने कोहरे ने आके हमें घेर लिया। मैंने विकास से कहा भाई तू गाड़ी यही रख बाद में दिन में आके ले जायंगे।

अभी यहां रुकना खतरेसे खाली नहीं लगरह।  फिर हम दोनों मेरी बाइक पर निकले दोनों के मुह से एक शब्द भी निकल नहीं रहा था क्योंकि बस एक ही बात दोनों के दिमाग़ में थी जल्दी घाटी पार करनी है। तभी अचानक पीछे से हॉर्न बजाते हुए वीरू ने हमें ओवरटेक किया। बाइक पर उसके साथ एक और आदमी भी था।

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  • प्रेत आया सामने

मैंने वीरू से पूछा आज तूने अपने साथ ये कौनसे चाचा को लाया है। हमसे भी तो पहचान करवा। वो बोला कोणसे चाचा मैं अकेला ही तो आया हु। मैंने कहा फिर बाइक पर तेरे पीछे कोण बैठा है। वीरू बोला सुंदरभाई तू क्या मेरी फिरकी ले रहा है। और उसने बाइक के हैण्डल से एक हात हटाके पीछे घुमाके दिखाया।

और उसका वह हात उस आदमी के शरीर से आर पार चला गया। फिर वह आदमी हमारी तरफ़ देखके मुस्कुराने लगा। ये सब देखकर विकास और मेरे हात पैर ठंडे हो गए। हम कुछ बोल नहीं पा रहे थे। आवाज जैसे गले में ही अटक गई थी।

  • मुश्किल घड़ी  Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

मैंने गाड़ी उसके आगे भगनी चाही थी पर गाड़ी नाहीं आगे जापा रही थी और नाही उसमे ब्रेक लग रहा था लग रहा था कि बाइक का हैंडल मेरे हात में है पर चलाने वाल कोई और है। हम वीरू की तरफ़ न देखने की कोशिश कर रहे थे। विकास ने मुझे कसके पकडके रखा था।

दोनों कांप रहे थे। वीरू हमारी बाइक के बराबर बाइक चलाने लगा और हमारी नज़र ना चाहते हुए भी उस भूत पर पड रही थी। वह अभी भी हमरी तरफ़ ही देखरहा था उसके चहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी। अब तक हमारी फट के हात में आचुकी थी।

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  • डर का एहसास

आगे घना कोहरा फैला हुआ था। वीरू को अचानक कुछ हुआ और वह स्पीड से कोहरे में घुस गया। और बादमे हम घुस गए। कोहरा जब ख़तम हुआ। तब वीरू की बाइक हमारे आगे ही थी। पर उसके पीछले सिट पर वह भूत नहीं था। हमें जरासी राहत मिली। घाटी अब खतम होने ही वाली थी।

जब हमारी बाइक वीरू के नज़दीक पोहोंची तब हम उसे सब कुछ बताने ही वाले थे। पर हमसे पहले ही वीरू बोला अरे सुंदरभाई कोहरे में से ये कौनसे चाचा को उठा लाये हो। ट्रिपल सिट बाइक नहीं चलनी चाहिए मालूम हैना।

 कहानी का अंत | Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

उसके मुह से ये बात सुनके विकास ने बाइक की सिट गीली करदी और मैं तो अधमरा हो गया और बाइक से नियंत्रण खो दिया फिर हमारी बाइक जाके रोड साइड वाले दल-दल में घुस गई।

विरुने हमें नजदीकी कंपनी के हॉस्पिटल में पहुचाया। हम दोनों को चोट लगी थी पर हात पैर और सिर सलामत थे। बाइक दलदल में घुसने की  वजह से हम बच गए। पर वीरू हैरत में ज़रूर था कि आख़िर उस वक़्त हुआ क्या?

तो दोस्तों आपको ये Bhoot Pret Ki Kahani Hindi कैसी लगी ये कमेंट करके जरुर बताना

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