शिर्डी साई बाबा के १०८ नाम अर्थसहित | sai baba ke 108 naam | sai baba 108 names in hindi

शिरडी के साई बाबा भारतीय गुरु, संत एवं फ़क़ीर के रूप में जगप्रसिद्ध है. इस पोस्ट हमने Sai baba ke 108 naam अर्थसहित दिए है.यह नाम बहुतसे साई बाबा भक्त नित्य जपते है.

शिर्डी साई बाबा के १०८ नाम अर्थसहित – Sai baba ke 108 naam

1. साईंनाथ:- ईश्वर साई.
2. लक्ष्मी नारायण:- लक्ष्मी नारायण के स्वरूप.
3. कृष्णमशिवमारूतयादिरूप:- भगवान कृष्ण, शिव, राम तथा हनुमान के स्वरूप.
4. शेषशायिने:- आदि शेषनाग पर विश्राम करने वाले.
5. गोदावीरतटीशीलाधीवासी:- गोदावरी के किनारे पर रहने वाले. (शिर्डी)
6. भक्तह्रदालय:- सदैव भक्तों के दिलों में निवास करने वाले.
7. सर्वह्रन्निलय:- सबके मन में रहने वाले.
8. भूतावासा:- सभी प्राणियों में रहने वाले.
9. भूतभविष्यदुभवाज्रित:- भूत, भविष्य और वर्तमान से अवगत करने वाले.
10. कालातीताय:- भगवान जो समय से भी परे है.
11. काल:- समय को जीतनेवाले.
12. कालकाल:- मृत्यु के देवता को वश में करने वाले.
13. कालदर्पदमन:- अकाल मृत्यु के भय को दूर करने वाले.
14. मृत्युंजय:- मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले.
15. अमत्य्र:- धरती के श्रेष्ठ मानव.
16. मर्त्याभयप्रद:- मनुष्य को मुक्ति का मार्ग दिखानेवाले.
17. जिवाधारा:- जीवन का समर्थन करने वाले.
18. सर्वाधारा:- समस्त क्रियाओं का समर्थन करने वाले.
19. भक्तावनसमर्थ:- अपने भक्तों को सामर्थ प्रदान करने वाले साईबाबा.
20. भक्तावनप्रतिज्ञाय:- अपने भक्तों के रक्षण का वचन निभाने वाले.
21.अन्नवसत्रदाय:- भक्तों को अन्न, वस्त्र प्रदान करने वाले.
22. आरोग्यक्षेमदाय:- मनुष्य को शारीरिक स्वास्थ्य और राहत पहुचाने वाले.
23. धनमाङ्गल्यप्रदाय:- मनुष्य को धन और स्वास्थ्य का अनुदान देने वाले.
24. ऋद्धिसिद्धिदाय:- बुद्धि और शक्ति प्रदान करने वाले.
25. पुत्रमित्रकलत्रबन्धुदाय:- पुत्र, मित्र, बंधू और आदि का सुख देने वाले.
26. योगक्षेमवहाय:- मनुष्य जीवन रक्षा का भार उठानेवाले.
27. आपदबान्धवाय:- दुर्गम समस्या के समय में भक्तों के साथ रहने वाले साईंबाबा.
28. मार्गबन्धवे:- सही और सुखी जीवन का मार्ग दिखाने वाले साईंबाबा.
29. भक्तिमुक्तिस्वर्गापवर्गदाय:- मनुष्य को सांसारिक सुख,वैभव, धन, परमानंद और अंत में मुक्ति के बाद स्वर्ग सुख देने वाले साईंबाबा.
30. प्रिय:- भक्तों के अत्यंत प्रिय.
31. प्रीतिवर्द्धनाय:- परमात्मा के प्रति आस्था बढ़ाने वाले.
32. अन्तर्यामी:- जिनको भूत, भिवष्य और वतर्मान समय का ज्ञान है.
33. सच्चिदात्मने:- ईश्वरीय परम सत्य.
34. नित्यानन्द:- हमेशा शाश्वत आनंद में डूबे रहने वाले.
35. परमसुखदाय:- भक्तों को असीम सुख एवं शांति देनेवाले.
36. परमेश्वर:- श्री हरी स्वरुप है साईबाबा.
37. परब्रह्म:- जो स्वयं ब्रह्म है.
38. परमात्मा:- श्रेष्ठ परम विष्णु समान.
39. ज्ञानस्वरूपी:- जो सबसे अधिक बुद्धिमान है.
40. जगतपिता:- ब्रह्मांड के लिए पिता सामान.
41. भक्तानां मातृ दातृ पितामहाय:- भक्तों के प्रति माता और पिता का कर्तव्य निभानेवाले.
42. भक्ताभयप्रदाय:- सभी प्रकार के भय से मुक्ति देकर अपने शरण में जगह देनेवाले साईबाबा.
43. भक्तपराधीनाय:- वह भगवान जो अपने भक्तों भक्तों की इच्छा पर निर्भर है.
44. भक्तानुग्रहकातराय:- अपने भक्तों को आशीर्वाद देने वाले साईबाबा
45. शरणागतवत्सलाय:- भक्तों को अपनी शरण में लेने वाले.
46. भक्तिशक्तिप्रदाय:- भक्ति और शक्ति के दाता.
47. ज्ञानवैराग्यप्रदाय:- ज्ञान और बुद्धि के अभाव(कमी) को दूर करने वाले.
48. प्रेमप्रदाय:- अपने सभी भक्तों को प्रेम और शांति का संदेश देनेवाले साईबाबा.
49. संशयह्रदय दौर्बल्यपापकर्म वासनाक्षयकराय:- पाप दुषकर्म संशय वृत्ति और मन में बसी वासना को नष्ट करने वाले.
50. ह्रदयग्रन्थिभेदकाय:- इन्सान के दिल के में बसे बुरे विचारों को नष्ट कर देने वाले.
51. कर्मध्वंसिने:- मनुष्य के बुरे पाप कर्म को हुमेशा केलिये नष्ट करने वाले साईबाबा.
52. शुद्ध-सत्वस्थिताय:- जो निर्मल शुद्ध, सच्चे और अच्छाई के प्रतिक है.
53. गुनातीतगुणात्मने:- सभी अच्छे गुणों को धारण करने वाले.
54.अनन्तकल्याण गुणाय:- जिनके अच्छे गुणों की कोई सीमा नहीं. जो मनुष्य का अनंत कल्याण करते है.
55. अमितपराक्रमाय:- असीम शौर्य और पराक्रम के स्वामी.
56. जयिने:- जो अजर अजय है.
57. दुर्धर्षाक्षोभ्याय:- अपने भक्तों की सभी आपदाओं को नष्ट करने वाले साईबाबा.
58. अपराजिताय:- सदैव विजयी रहने वाले.
59. त्रिलोकेषु अविघातगतये:- तीनो लोको मे जिनकी गति अबाध है.
60. अशक्य-रहीताय:- जिनके आशीर्वाद से कठिन और असंभव कार्य भी आसानी से पुरे होते है.
61. सर्वशक्तिमूर्तये:- सभी शक्तियों के सिर्फ एक स्वामी साईबाबा.
62. सुरूपसुन्दराय:- जो दिखने में सबसे तेजस्वी है.
63. सुलोचनाय:- आकर्षक, सुंदर और प्रभावशाली आंखेंवाले भगवान.
64. बहुरूप विश्वमूर्तये:- भगवान जिनके अनंत रूप है. और जो स्वयं विश्व स्वरूप है.
65. अरूपाव्यक्ताय:- जिनके अतिसुंदर रूप को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता.
66. अचिन्त्याय:- भगवान जो हमारी सोचा से परे है साईबाबा.
67. सूक्ष्माय:- भगवान जी सूक्ष्म रूप भी धारण कर सकते है.
68. सर्वान्तर्यामिणे:- जिन्हें सम्पूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान है.
69. मनोवागतीताय:- जिनकी गति मन से भी अधिक है.
70. प्रेममूर्तये:- जो स्वयं प्रेम के स्वरूप है.
71. सुलभदुर्लभाय:- जो अत्यन्त सुगमता से प्राप्त जाते है.
72. असहायसहायाय:- साईबाबा उनकी मदत जरुर करते है.जिनकी कोई भी नहीं करता.
73. अनाथनाथदीनबंधवे:- अनाथों को सहारा देनवाले प्रभु साईबाबा.
74. सर्वभारभृते:- अपने भक्तों की रक्षा की जिम्मदारी उठाने वाले.
75. अकर्मानेककर्मसुकर्मिणे:- जो कोई भी कार्य नहीं करते है, लेकिन वह लगातार हरबार कार्य में शामिल रहते है.
76. पुण्यश्रवणकीर्तनाय:- जिनके पवित्र नाम का जाप हो रहा है. और वह सूनने के योग्य भी है.
77. तीर्थाय:- साईबाबा सभी पवित्र नदियों के रूप में है.
78. वासुदेव:- भगवान कृष्णा के स्वरूप है साईबाबा.
79. सतां गतये:- एक संत सामान सभी को शरण देनेवाले.
80. सत्परायण:- सत्य के प्रति जिनकी निष्ठा रखनेवाले साईबाबा.

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Sai baba ke 108 naam | sai baba 108 names in hindi

81. लोकनाथाय:- लोकों के प्रभु हैं.
82. पावनानघाय:- जिनका स्वरूप सबसे पवित्र है.
83. अमृतांशवे:- भगवान जो अमृत के एक अंश हैं.
84. भास्करप्रभाय:- सूर्य की तरह तेजस्वी भगवान.
85. ब्रह्मचर्यतपश्चर्यादिसुव्रताय:- ब्रह्मचर्य, तपश्चर्य आदि सुव्रतों में स्थित हैं साईबाबा.
86. सत्यधर्मपरायणाय:- हमेशा सत्य और धर्म का आचरण करने वाले.
87. सिद्धेश्वराय:- अपनी इन्द्रियों और क्रोध को वश में रखनेवाले.
88. सिद्धसंकल्पाय:- समस्त मनोरथ सफल होने का आशीर्वाद देनेवाले.
89. योगेश्वराय:- सभी योगियों या संन्यासियों के स्वामी.
90. भगवते:- समस्त ब्रह्मांड के महाप्रभु.
91. भक्तवत्सलाय:- जो अपने भक्तों में ही लीन रहते है.
92. सत्पुरुषाय:- साईबाबा अनन्त, अविनाशी, सर्वोच्च पुरुष है.
93. पुरुषोत्तमाय:- जो सर्व श्रेष्ठ पुरुष है.
94. सत्यतत्वबोधकाय:- परम सत्य और वास्तविकता का बोध करने वाले.
95. कामादिशड्वैरिध्वंसिने:- काम क्रोध, मेद, मोह लोभ,और मत्सर का नाश करने वाले साईबाबा.
96. समसर्वमतसम्मताय:- सहिष्णु और सभी के प्रति समान भाव रखनेवाले.
97. दक्षिणामूर्तये:- भगवान शिव सामान.
98. वेंकटेशरमणाय:- जो भगवान वेंकटेश्वर के सामान है.
99. अद्भूतानन्तचर्याय:- जो अद्भुत और अनंत कर्म (चमत्कार) करते है.
100. प्रपन्नार्तिहराय:- जो अपने भक्तों की समस्याओं का नष्ट करते है.
101. संसारसर्वदु: ख़क्षयकराय:- संसार के दुखों का विनाश करने वाले.
102. सर्ववित्सर्वतोमुखाय:- भगवान जो सर्वव्यापी है, जिसका चेहरा सभी दिशाओं में बदलता रहता है.
103. सर्वान्तर्बहि: स्थिताय:- जो हर सजीव के अंदर स्थित है.
104. सर्वमंगलकराय:- साईबाबा अपने भक्तों के कल्याण के शुभ कार्य करते.
105. सर्वाभीष्टप्रदाय:- भक्तों की सकारात्मक इच्छाओं की पूर्ति करने वाले.
106. समरससन्मार्गस्थापनाय:- समस्त मानव जाती को एकता का संदेश देने वाले.
107. समर्थसद्गुरुसाईनाथाय:- साईबाबा स्वयं समर्थ सद्गुरु है.
108. सतगुरु:- गुरु जो सत्य के प्रतीक है.

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sai baba ke 108 naam

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