लिली फूल की सभी जानकारियां | Information about lily flower in Hindi

लिली का फूल दुनिया के १० सबसे खुबसूरत फूलों में से एक है. और आज हम इसी फूल की पूरी जानकरी प्राप्त करनेवाले है. (Lily Flower in Hindi) ये फूल विश्वभर में इसकी सुंदर बनावट और मोहक सुगंध के लिए विख्यात है. लिली की प्रजातियों में “ओरिएण्टल लिली” यह  दुनिया की सबसे ज्यादा और तेज सुगंध देनी लिली है.

अगर आप लिली के फूलों को घर के अंदर गमलों में या बगीचे में लगाते है, तो इन फूलों की सुगंध से आपका घर-आंगन किसी रूम फ्रेशनर की तरह सदा महकता रहेगा. लिली के फूलों का सुगंध एक तरह का प्राकृतिक एरोमा होता है, जो हमे तनाव जैसी बिमारियों से दूर रख सकता है. इसीलिये अधिकतम परिवार अपने इसे घर या बगीचे में लगाते है.

इस फुल के पौधों को लगाना बेहद आसन होता है और इसे लगाने के लिए ज्यादा चीजों की आवश्कता भी नहीं होती है. आप घर के अंदर गमलों में, बाहर बगीचे में, या बिल्डिंग के ऊपर टेरिस पर भी इसे उगा सकते है.

इस लेख में हम आपको लिली के फूलों की जानकरी के  साथ-साथ इसे उगाने और देखभाल करने की जानकरी भी प्रदान करनेवाले है. तो चलिए दोस्तों शुरू करते है हमारा लेख Lily Flower in Hindi

lily flower in hindi

लिली के फूल की जानकारी | lily flower in Hindi

लिली के फूलों का मुख्य उगम स्थान उत्तरी शीतोष्ण क्षेत्र है. इन नायाब व खुबसूरत फूलों की खेती बीज, शाल्कीकंद और पत्र प्रकलिकाओं (bulbils) के माध्यम से की जाती है. जिसके विषय में आगे हम बात करनेवाले है. मैडोना लिली, चीनी लिली, जापानी लिली ये इसकी कुछ मुख्य प्रजातियाँ है.

अभीतक हमने पढ़ा की lily ka fool वसंत ऋतू में खिलता है. हालाँकि, लिली की कुछ प्रजातियाँ ऐसी भी है जो वसंत ऋतू के बजाय गर्मी के मौसम में खिलती है.

गर्मी में खिलने वाली लिली का नाम Asiatic Lily है. जिसे Asiatic hybrids भी कहा जाता है. इसकी तस्वीर आप निचे देख सकते है.

Asiatic Lily
Asiatic Lily

लिली के फूलों की खेती धरतीपर हजारों सालो से की जा रही है, इसका उल्लेख बाइबिल में भी मौजूद है.

इसकी बहुतसी प्रजातियाँ साल १८३७ से १९०१ तक अर्थात विक्टोरियन युग के दौरान खोजी गई थी.

इन फूलों की अभीतक १०० प्रजातियाँ अस्तित्व में है, जो दुनिया के विविध हिस्सों में उगाई जा रही है. Lily flowers की सबसे अधिक खेती नीदरलैंड, फ्रांस, चिली, अमेरिका, जापान और न्यूजीलैंड में होती है.

पुरे विश्व में युरोप ही एक ऐसा महाद्वीप है, जहाँ लिली के फूल अन्य महाद्वीपों के मुकाबले ज्यादा उगाए जाते है. वहां के लगभग हर घर के आगन में ये फूल नजर आते है.

इन फूल का सबसे अधिक उत्पादन मार्च  से लेकर अप्रैल महीने तक होता है, यानिकी वसंत ऋतू में होता है.

लिली के पौधे लगभग 5 सालों तक फूल दे सकते है. हालाँकि, बहुत बार ऐसा भी हो सकता है की डेढ़ या दो साल के भीतर इसमें फूल आना कम हो जाए या बंद जाए, तो आप समझ जाना की पौधों को हटाने की नहीं, सही देखभल की आवश्यकता है.

लिली के पौधे आठ फीट की ऊंचाई तक बढ सकते है. हालाकिं, इनकी कुछ प्रजातीय सिर्फ दो फीट तक ही बढ सकती है.

लिली के फूल का वैज्ञानिक नाम Lilium है. यह लिलिएसी (Liliaceae) कुल का जीनस है.

लिली के फूलों के आंतरिक भाग में नेक्टर नाम का रस होता है, जिसका सेवन करने के लिए विविध प्रकार के कीडे और पंछी लिली की ओर आकर्षित होते रहते है.

आप यह बात भी जानले की इंसान भी लिली के फूलों का सेवन बडे चाव से करते है.

इन फूलों को गर्मी के मौसम के खाया जाता है. लिली के भीतर गर्मी को संतुलित करनेवाले विशेष गुण होते है, जिनकी  वजह से हमारे शरीर की आंतरिक गर्मी को कम किया जाता है.(lily flower in Hindi)

वाटर लिली  बांग्लादेश का राष्ट्रिय फूल है, यह लोगों की मासूमियत और पवित्रता को दर्शाता है. साल १९७१ में बांग्लादेश की तत्कालीन सरकार ने वाटर लिली को बांग्लादेश को राष्ट्रिय फूल घोषित किया था.

क्या आप जानते है? सिरोय कुमुदिनी यह मणिपुर का राजकीय फूल है.

क्या आप जानते है? सफेद लिली को ही ईस्टर लिली के नाम से पहचाना जाता है, और इस फूल को जापान देश में गुड लक विश करने के लिए भेंट किया जाता है.

टाइगर लिली, और ईस्टर लिली, ये लिली की सामान्य प्रजातियां हैं, जो आपको लगभग सभी फूलों के बाजारों में एवं घरों में देखने मिल सकती है.

इन फूलों से एक विशेष प्रक्रिया द्वरा तेल निकाला जाता है, जो हमारी त्वचा की देखभाल के लिए काफी गुणकारी साबित हुआ है. इस तेल की मदत से त्वचा रेशम सी मुलायम और कोमल हो सकती है.

लिली के फूल खिलते समय इनके मुँह की दिशा तय नहीं होती, इनका मुख नीचे, बाहर या ऊपर की ओर हो सकता हैं.

लिली के रंगों में लाल, सफेद, पिला, गुलाबी, और नारंगी रंग के फूल मुख्य है, जो दुनिया के अधिकांश बगीचों की शान है.

इस फूल की सभी प्रजातियों के रंग भिन्न-भिन्न और बेहद खूबसूरत होते है, lily flower in Hindi लेख में आगे हम लिली के फूलों को उगाने की एवं देखभाल करने की विशेष जानकारी देखनेवाले है. इसे अंततक जरुर पढ़े.

Oriental Lily
Oriental Lily

Lily Flower Meaning in Hindi | लिली के फूल को हिंदी में क्या कहते है?

असल में लिली यह इस फूल का अंगेजी नाम है, जबकि लिली को हिंदी भाषा में कुमुदनी नाम से पहचाना जाता है. लेकिन यह फुल लिली नाम से ही ज्यादा प्रसिद्ध है.

लिली के फूल का पौधा घर पर कैसे लगाएं | lily flower in hindi

अपने घर पर लिली के फूलों का एक छोटा या बड़ा बगीचा बनाना काफी आसान है.

लिली के पौधे के इसके बीज के जरिये उगाने में बहुत ज्यादा समय की आवश्कता होती है, इससे बेहतर यही होगा की पौधे को उगाने के लिए बल्ब का इस्तेमाल किया जाये, जोकि काफी आसन और आधुनिक तकनीक है.

अब आपका सवाल होगा की यह बल्ब क्या होता है? तो इसका जवाब है – बल्ब एक विशेष प्रकार का तना होता है. जिसे जमीन या गमलों में रोपण करके लिली के पौधे जलद और आसानी से उगाए जाता है. बल्ब को वसंतऋतू के आगमन से पहले ही बीज की तरह ही जमीन या गमले में लगाया जाता है.

बल्ब की तकनीक बेहतर समझने के लिए निचे दी गई तस्वीर दिखिए.

Lily bulbils
Lily bulbils

अब हम लिली के फूल उगाने की संपूर्ण प्रक्रिया को समझते है.

लिली के फुल सही तरीके से उगाने के लिए मिट्टी और खाद के मिश्रण का सही फार्मूला कुछ इस प्रकार है.

६०% बगीचे के उपजाऊ मिट्टी + २०% रेतीली मिट्टी + २०% गोबर या वर्मी कंपोस्ट खाद और इन सबके साथ बोनेमाल पाउडर का इस्तेमाल भी जरुर करे, यह पौधे की फास्फोरस की कमी को पूरा कर देगा, और आपके लिली के पौधे तेजी से बढ़ने के लिए तैयार हो जाएंगे.

सबसे पहले बगीचे की मिट्टी, रेतीली मिट्टी, खाद और नीम खली को एक साथ मिश्रित कर ले, नीम खली के उपयोग से लिली फ्लावर की जड़ों में फफूंदी नहीं लगती.

मिट्टी का चुनाव करतेवक्त एक बात का खास ध्यान रखने की जरुरत है, मिट्टी इस तरह की होनी चाहिए की जिसमे नमी बनी रह सके.

गमलो में मिट्टी डालने से पहले उसके निचे एक छोटासा छेद कर के उसके ऊपर छोटा कंकड़ रख दे ताकि गमलो में अगर पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है. तो अतिरिक्त पानी उस छेद में से बाहर निकल सके.

लिली के बल्ब को लगाते वक्त आप इसे ३ से ५ बल्बों के समूहों में भी लगा सकते है. पर रोपण करते वक्त पौधों में सही अंतर जरुर रखे. जो लगभग ८ से १० इचं का होना चाहिए.

गमलों को मिट्टी से आधा भरकर उसम बोनेमाल पाउडर की पतली परत बनाये, उसके ऊपर फिरसे मिट्टी डालकर उसमे लिली के बल्ब का चार या पांच इंच की गहराई पर रोपण कीजिये. और अंत में उसपर मिट्टी डालकर हलके से दबा दे. रोपण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गमले में पानी भरले. पानी भरने के बाद दो से तीन दिन के लिए गमलों  को ऐसी जगह पर रखे जहाँ बहुत तेज धुप ना आती हो. यह थी लिली फ्लावर की रोपण की प्रक्रिया हिंदी में.

लिली के फुल का उपयोग एवं फायदे | Benefits & uses of lily flower in hindi

लिली के फूलों का इस्तेमाल आयुर्वेद में भी किया जाता है, इसके फूलों से निकाला गया तेल त्वचा संबधित रोगों के लिए गुणकारी होता है, इसके अलावा और भी बहुत से सौंदर्य प्रसाधन को बनाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है.

जापान देश में सजावट के लिए लिली के फूलों का बहुत ही ज्यादा महत्व है. वहांपर होनेवाली लगभग हर एक शादी में सजावट के लिए इन्ही फूलों का ही उपयोग हो रहा है.

घर में लिली के फुल होने से हवा का शुद्धिकरण होते रहता है, जिससे हमे बेहतर ऑक्सीजन प्राप्त होती है.

लिली के पौधे के घर में होने की वजह से कार्बन मोनोऑक्साइड और फॉर्मलाडेहाइड जैसे अनुपयोगी और घातक वायु से भी हम सुरक्षित हो जाते है.

Lily ka phool |About lily flower in hindi

लिली एक ऐसा फूल है, जो एक साथ कई संकल्पनाओं का अकेला प्रतिक है. इसके फूलों का उपयोग धार्मिक कार्यों से लेकर अपने प्रेम का इजहार करने के लिए भी किया जाता है. लिली की प्रजातियों के हिसाब से इसका महत्व भिन्न-भिन्न है.

पुरे विश्व में इसके फूल विविध कार्यों में भेंट दिए जाते होता है, जैसे की गुलाबी लिली को जापान में होनेवाली शादियों में भेंट किया जाता है. टाइगर लिली के फुल किसी के सफलाता हासिल करने के अवसर पर उपहार स्वरूप दिए जाते है और लाल लिली को अपने प्रेम का इजहार करने के लिए, अपने साथी को दिए जाते है.

लिली के फूलों की देखभाल कैसे करे | How to take care of lily flower in hindi

लिली के पौधे को लगाने के लिए हमेशा जलोढ़ मिट्टी(उपजाऊ) के साथ रेतीली मिट्टी को मिक्स करना जरूरी होता है. क्योंकि रेतीली मिट्टी से पौधे में इकट्टा हुए अतिरिक्त जल का निकास आसानी से हो जात. इससे  पौधों में लंबे समय के लिए सडन या फफूंदी नहीं लगती.

इसके लिए आप इस बाद का भी ध्यान रखे की पौधे में सिर्फ उतना ही पानी डाले जितनेसे मिट्टी में नमी बरकरार  रहे.

जब लिली के पौधे बड़े हो जायेंगे,तब याद से इनको महीने में एक बार खाद जरुर डालिए. इससे लिली के फूलों  को सही मात्रा में जरुरी पोषणतत्व मिलते है, और पौधों में फूल भी ज्यादा मात्रा में लगते है.

लिली के फुल अगर बढती ऊँचाई और अपने अतिरिक वजन से झुकने लगे. तो पौधों को एक सुखी लकड़ी का सहारा जरुर दे

इस प्रकार आप लिली के फूलों की देखभाल अच्छी तरह से कर सकेंगे.

lily ka phool बढाने के लिए टिप्स | lily flower in hindi

लिली के बल्ब लगाने के लिए पतझड़ का मौसम सबसे सटीक होता है, क्योंकि पतझड़ के बाद आनेवाले वसंत ऋतू से पहले ही लिली की जड़ें के स्थापित हो जाती है, और  बढ़ते मौसम के साथ लिली के फूल काफी बेहतर तरीके से बढ़ते है.

लिली के बल्ब को उनके व्यास के लगभग ३ गुना की गहराई तक लगाना सबसे बेहतर तरीका होता है, यह  गहराई लगभग ४ से ६ इंच हो सकती है.

ध्यान दीजिये, अगर आप इसे छोटे गमले या प्लास्टिक बैग में  लगा रहे है, तो पौधा ज्यादा गहराई तक ना लगाए.

लिली फ्लावर की मिट्टी में नमी को अच्छी तरह से बनाए रखने के लिए, आप पीट या वर्मी क्यूलाइट जैसे  खनिज का उपयोग कर सकते हो.

लिली के पौधों का रोपण करने के लिए बहुत पहले से ही बल्ब खरीदकर कर ना रखें, जब आप रोपण की प्रक्रिया के लिए तैयार होंगे उससे कुछ समय पहले ही बल्ब खरीदे, क्योंकी घर पर सही तरीके से बल्ब ना रखने से ये खराब भी हो सकते  है.

लिली के फूलों की बेहतर तरीके से बढ़ने के लिए, इसे प्रतिदिन ६ से ८ घंटे सीधी धूप मिलना बहुत जरूरी होता है.

Tiger lily
Tiger lily

लिली के फूलों का कीट और रोग प्रबंधन | Pest and Disease Management of lily flower in hindi

दूषित वातावरण या मौसम में होनेवाले अचानक बदलाव के कारण, कभी-कभी लिली के फूलों में कीट या रोग फैलने की संभवना रहती है. तो ऐसे मामलों में फूलों को सुरक्षित रखना बहुत जरुरी हो जाता है.

इसीलिये, अब हम जानलेते है की लिली के फूलों कौनसे कीट और रोगों नूकसान हो सकता है? और उनसे फूलों को सुरक्षित कैसे रखे.

बल्ब लगाते वक्त अच्छी रोपण की प्रक्रिया का इस्तेमाल करने से हम आनेवाली अधिकांश समस्याओं को आसानी से रोक सकते है.

नीम खली: मिट्टी में नीम खली पाउडर को मिलाने से लिली की जड़ों को नुकसान पहुंचानेवाली सफेद चीटियाँ, दीमक और फफूंद, से जड़ों बचाया जा सकता है.

लिली के पौधे लगाते वक्त आप २ पौधों में, या पौधों के समूह में उचित अंतर रखे. उचित दूरी रखने से पौधों में पर्याप्त मात्रा में वायु परिसंचरण होता रहता है. यह अंतर लग भग ७ से ९ इंच को होना आवश्यक है. इससे आप लिली के फूलों को कवक रोग और एफिड्स जैसे किट से बचा सकते हो.

एफिड्स (Aphids)

एफिड्स एक तरह के किट होते है, जो लिली के फूलों को रस चूसकर हानि पंहुचाते है. इन्हें रोकने के लिए आप लिली के फूलों एवं पौधों पर पानी का तेज फव्वारा मारकर एफिड्स को हटा सकते हो. इसके लिए आपको समय समय पर पौधों पर नजर रखना जरुरी होता है.

सूचना:  पानी का फव्वारा मारते वक्त पौधों को मजबूती से पकड़ना ना भूलें.

लिली के पत्तों पर बीटल – Lily Leaf Beetle

लीफ बीटल एक प्रकार का लार्वा होता है, जो पत्तों को खाता है. जिससे पौधों को बढ़ने में रुकावट निर्माण होती है. नीम के तेल का प्रयोग करके आप इन कीड़ों से छुटकारा पा सकते हो. इसके लिए आपको लिली के पत्तों पर नीम के तेल का छिडकाव करना पड़ता है.

चूहे व गिलहरी: आस पास रहने वाले चूहे और गिलहरी लिली के बल्बों को कुतर सकते है. इनसे बचने के लिए बल्ब एक  उचित गहराई लगाये और चूहे व गिलहरी को रोकने के लिए, आप ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते है. अगर आप गमला,प्लास्टिक बैग या बकेट में लिली के फूलों का रोपण कर रहे है. तो इसे चूहे व गिलहरी की पहुँच से दूर रखे.

बोट्रीटिस (Botrytis): अत्यधिक ठंड और पौधों में जरूरत से ज्यादा पानी के होने से लिली के फुल बोट्रीटिस नाम के रोग से प्रभावित हो सकते  है. यह एक प्रकार का सामान्य कवक रोग होता है. जो पत्तियों, तनों और फूलों के लिए नुकसानदायक होता है.

लिली मोज़ेक वायरस (Lily Mosaic Virus): यह वायरस खासकर टाइगर लिली को संक्रमित करता है, इससे लिली के पत्ते विकृत या धब्बेदार हो जाते है.

बोट्रीटिस और लिली मोज़ेक वायरस की परिस्थितयों में आप संक्रमित बल्ब और पौधों को जल्दी से हटा दे एवं नष्ट कर दे ताकि बाकि पौधों को इस रोग के संक्रमण से बचाया जा सके.

विशेष सूचना : लिली मोज़ेक वायरस से बचने के लिए टाइगर लिली के नजदीक किसी भी और लिली प्रजाति का फूल ना लगाये.

lily ke phool से बिल्लियों रखे दूर

लिली की बहुत सी प्रजातियां बिल्लियों के लिए जहरीली होती है. विशेष रूप हम Lilium longiflorum का नाम सूचित करना चाहेंगे, जिसे हम Easter lily के नाम से भी पहचान ते है.

बिल्लियों द्वरा लिली के किस भी हिस्से को खाने से उनके गुर्दे विफल हो सकते है, यानिकी बिल्लियों की किडनियाँ फेल हो सकती है. इससे उनको सरक्षित रखने के लिए, बिल्लियों को लिली के फूलों एवं पौधों से कोसों दूर रखें.

रंग और प्रजाति अनुसार lily ke phool का महत्व | lily flower information in hindi

दोस्तों लिली के फूल रंग और प्रजाति अनुसार किसी न किसी चीज का प्रतिक माने जाते है, अब हम इसी विषय पर गौर करने वाले है.

ईस्टर लिली – यह सफेद लिली नाम से भी प्रसिद्ध है. ईस्टर लिली के फुल निर्मल, बेदाग, निर्दोषता, पवित्रता, उम्मीद और शिष्ट व्यवहार का प्रतिक है.

गुलाबी लिली – यह वैभव, धन और समृद्धि की निशानी है. गुलाबी लिली के फूल शादि और जन्मदिन जैसे खास और यादगार लम्हों में भेट किये जाते है.

ऑरेंज लिली (Lilium bulbiferum) – ऑरेंज लिली को इसकी चत्तिदार और अनोखी बनावट की वजह से टाइगर लिली भी कहा जाता है. यह  लिली के फुल  धन-दौलत, आत्मविश्वास और उन्नति का प्रतिक है. ऑरेंज लिली के फुल किसी व्यक्ति की सफलता हासिल करने के अवसर पर भेंट कर सकते है.

पिली लिली – पिली लिली के फुल धन्यवाद, प्रसन्नता, उल्लास और बेहतर स्वास्थ्य का प्रतिक है. अगर कोई बीमार है, तो उसे आप ये फुल दे कर उसे ठीक होने का दिलासा दे सकते है.

लाल लिली – लाल लिली के फुल इच्छा, उत्साह, रोमांस और सच्चे प्रेम का प्रतिनिधित्व करते है,  इसे हमारे करीबी व्यक्ति के प्रति अपनी प्रेम भावना जाहिर करने के लिए उपहार में दे सकते है.

Japanese lily
Japanese lily

लिली का फूल मार्गदर्शक | lily flower in hindi

फूल का नाम: लिली (Lilium)

कुल प्रजातियाँ : १००

उपलब्धता : बारहमासी

मूल निवास : एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका

रखरखाव आवश्कता : मध्यम

परिपक्वता का समय : ३०-१२० दिन बाद.

मिट्टी का प्रकार: उत्तम जलनिकास वाली मिट्टी और सिंचित मिट्टी का मिश्रण

किसी पौधे के साथ ना लगाये: टाइगर लिली (Lilium lancifolium)

पौधे का वशं: लिलिएसी.

द्दो पौधों के बीच अंतर:  १० – १२ इंचेस

रोपण गहराई : ४ – ६  इंचेस

पौधे की ऊंचाई:  २ – ८ फीट

पानी की आवश्कता: मध्यम व संतुलित

प्रभावित करनेवाले कीटक: एफिड्स, लिली लीफ बीटल, चूहा, गिलहरी इत्यादि.

फूलों के रंग: गुलाबी, बैंगनी, लाल, सफेद, पीला, हरा इत्यादि

पौधे को होनेवाले रोग: बोट्रीटिस ब्लाइट, लिली मोज़ेक वायरस  

Madonna Lily
Madonna Lily

Frequently Asked Questions Lily Flower in hindi

Q1) लिली का फूल खास क्यों होता है?

A-लिली का फूल उम्मीद, समृद्धि,आत्मविश्वास  और उन्नति का प्रतिनधित्व करता है. यह अकेला फुल बहुत सारी सकारात्मक संकल्पनाओं का प्रतीक है.  लिली के विविध रंगों रंगों अनुसार इसके अलग-अलग महत्व होते है. जिसके विषय में हमेने इस लेख में विस्तार से बात की है.

Q2) लिली फुल का उत्पत्ति स्थान क्या है?

A- विज्ञानिको के कहने अनुसार लिली के फूलों का उत्पत्ति “उत्तरी शीतोष्ण क्षेत्र” में हजारो साल पहले हुई थी. आज तक इसकी १०० प्रजातीय पायी गई है. इसकी सबसे अधिक खेती यूरोप, एशिया और अमेरिका में होती है.

Q3) लिली का फूल किस लिए प्रसिद्ध है?

A- लिली का फूल ज्यादातर उपहार में देने लिए प्रसिद्ध है. यह फुल अकसर शादियों में , जन्मदिन के अवसर पर एवं बहुत से शुभ कार्यो में इस्तेमाल किया जाता है.

Q4) लिली को किसका प्रतीक माना जाता है?

A- यह फुल लोगों की मासूमियत और पवित्रता प्रतिक माना जाता है. साथ ही साथ यह  प्रसन्नता, उत्साह, रोमांस , सच्चे प्रेम  का भी प्रतिक है.

Q5) लिली का फुल किस भारत के कौनसे देश का राष्टीय फुल है.

A- वाटर लिली  बांग्लादेश का राष्ट्रिय फूल है, इसे सन १९७१ में बांग्लादेश की सरकार ने राष्ट्रिय फूल घोषित किया था.

Q6) लिली किस राज्य का राजकीय फुल है.

A- लिलियम मैकलिनिया (Lilium mackliniae) यह मणिपुर का राजकीय फूल है. जिसे हिंदी भाषा में सिरोय कुमुदिनी नाम से पहचाना जाता है.

उम्मीद करते है आपको हमारा यह लेख lily flower in hindi में दी गई जानकारिया पढकर आपके समय का सदुपयोग हुआ होगा. और आपको लिली फूल के बारे में काफी कुछ सिखने को मिला होगा. इस लेख को अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी शेयर करे. हमारे पास और भी जानकारीपूर्ण लेख उपलब्ध है. निचे गई लिंक के माध्यम से आप पढ सकते है.

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