Shaitan Ki Kahani

वैम्पायर डायरीज भा.4 (अंत) Shaitan Ki Kahani 

इस Shaitan Ki Kahani में आप पढेंगे की कैसे कुछ खलनायको ने एक प्राचीन एक नर पिसाच को कुंवारी लड़की की बलि देकर जिन्दा किया है. कब्र से उठने के बाद उस नर पिसाच का इरादा पुरे गाँव को निगलना है. पर १०० पहले प्राचीन भविष्यवाणी में जिस नायक को उस गाँव के लोगो की रखवाली के लिए  चुना गया था. वो वहा पोहोच चूका है.और दोनो एक दुसरे की मौत बनके आमने सामने खड़े है.रहस्य डर और रोमाचं से भरपुर इस कहनी को पूरा जरुर पढ़े ये 4th भाग इस कहानी का अंत है. अगर आप पहली बार इस कहानी को पढ़ रहे है तो. में आपसे गुजारिश करता हूँ की आप इस ब्लॉग पोस्ट में उपलब्ध पहले पार्ट की लिंक से शुरुवात करे .तो ही आपको इस कहनी की पूरी कडिया समझ में आयेंगी.ये कहनी मेरी लिखी हुई सबसे ज्यादा पढ़ी जानेवाली हॉरर स्टोरी है. और भी एक से बढ़कर एक दिलदहला देनेवाली Shaitan Ki Kahani इस ब्लॉग पोस्ट में उपलब्ध है. लिंक पर क्लिक कीजिये और डरने के लिये तैयार हो जाइये.

वैम्पायर डायरीज भा.4 (अंत) Shaitan Ki Kahani

मैंने कमर से तलवार निकली और उसपर वार करने ही वाला था. तभी बहुत सारे जंगली चमगादडो ने हम पर एक साथ हमला कर दिया.

जैसे की उन्हें किसी ने हमे रोकने का आदेश दिया हो. हम थोडा पिछे हट गए. किस्मत से बाबुकाका के पास इसका उपाय पहलेसे ही था. उन्होंने जेब में से लकड़ी की छोटी डंडी निकली और सिटी की तरह उसे फूंकना शुरू किया. और  फिर किसी चमत्कार की तरह सारे चमगादड वापस चले गए.

लेकिन  सामने खडा नंदू उसिवक्त मुझपर कूद पड़ा. वह मुझे अपने नुकीले दांतों से काटना चाहता था.ताकि मै भी उन जैसा बन जाऊ. पर मैंने उसके मुह में पत्थर भरदिए. और उसके जबड़े पे एक जोरदार मुक्का मारा. जिस वजह वह पत्थर उसके पेट में चलेगये.और उसके मुह से खून बहने लगा. तभी

काका बोले जल्दी करो हमें ऊपर भी पहुचना है. और मैंने म्यान से तलवार निकलकर  नंदू का सिर धड से अलग कर दिया.

मै जब पहाड़ की चोटी पर पहुंचा. तबतक चंद्रग्रहण शुरू हो चूका था. और वह शैतानो का सरताज एक बड़े काले पत्थर के उपर मेरी और पीठ करके बैठा था.

वह मौत का मंजर देखकर. मेरे दिल मे बिजली का झटका सा लगा. जिससे मुझे डर और ताकत का एहसास एक साथ हुआ.

शैतानों का बादशाह मेरी ओर पीठ करके चन्द्र ग्रहण के आखरी पल गिन रहा था.और शायद अपनी मौत का इंतजार कर रहा था. बाबुकाका चोटी पर पोहोचने से पहले ही मुझे इशारा करके छुपकेसे घनी झाड़ीयों में चले गए थे.

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मै आगे चलते-चलते उसकी पीठ के सामने जाके खड़ा हुआ. चंद्रग्रहण खतम होने में थोडा सा समय बाकि था. तभी वह एक अजीब और जानलेवा आवाज निकलते हुए पीछे मुड़ा.

जब उसने मुझसे नजरे मिलाई. तब मुझे ऐसा लगा काँटों तो मेरे बदन में खून नहीं.वो मेरी जिंदगी  गा सबसे भयानक मंजर था. वह नर पिसाच उठके दो पैरो पर खड़ा हुआ. उसका कद तक़रीबन ७ फिट का था.  Shaitan Ki Kahani

कान लम्बे और नुकीले, तेजाब सी लाल आंखे थी.  सिर पे एक भी बाल नहीं हाता पांव बांस की लकड़ी जैसे पतले पर मजबूत. मुह किसी जंगली चमगादड़ जैसा था. और उसके मुहं से लगातार लार टपक रही थी. नजाने कितनी सदियों से भूका था.

मेरी नजर उसपे ही थी वो धिरे धिरे निचे झुकाने लगा. मै भी तैयार था. वो मेरी और किसी जंगली भेडिये  की तरह झपटा. एक  बड़ी छलांग लगते हुए. वह मुझपर कूदा मै उसका निशाना चुकाकर आगे निकल गया. क्योंकि मै बस समय निकाल रहा था.

चंद्रग्रहन खतम होने का इंतजार  Shaitan Ki Kahani

चन्द्रग्रहण खतम होने में. बस कुछ ही पल बाकि थे और तभी  मैं ने उस शैतान को ललकारा बस शैतानो के बादशाह इतना ही कर सकता है तू. मेरे यह शब्द सुनने के बाद वह पागलो की तरह चिल्लने लगा. एक पल के लिए मुझे लगा शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही भड़का दिया है.

वह आसमान की तरफ देखकर दहाड़ रहा था.उसकी दहाड़ इतनी डरावनी थी की. मेरे दिल की धडकने दो गुना तेज हो गई थी.

मै उसकी बैठने की जगह पर जाकर खड़ा हुआ. तब तक ग्रहण खतम हो चूका था. चाँद की रोशनी जमीन तक आने लगी थी. मैंने कमर से खंजर निकल के आसमान में चाँद की रौशनी में चमकाया.

गुप्त योजना रची  Shaitan Ki Kahani

और डट के उसकी आँखों से आंखे मिलाई. वह  गुस्से से तिलमिला रहा था. तब तक मेरी योजना अपने अंतिम चरण में थी. और मेरे पीछे खड़े थे बाबुकाका जो अपना काम कर चुके थे. उन्हें मैंने संदूक लाने भेजा था. जो कि शैतान का जन्म स्थान है. उसके जरिये ही वह इस दुनिया में आया था.

और उस शैतान का दिल उसके सिने में नहीं बल्कि  उस बक्से में छुपाया गया था. यही वो पल था जी सके लिये मेरा जन्म हुआ था. बाबू काका ने संदूक मे से वह  धड़कता हुआ. काले खून वाला दिल निकलके मेरी और फैंका| Shaitan Ki Kahani 

उसी वक्त मैंने भी उस दिल की तरफ बिजली की रफ्तार से छलांग लगाई. और वह  नर पिसाच भी अपनी पूरी शक्ति से मरे पीछे पीछे झपटा. पर इसबार इंसानियत का पलड़ा भारी था. और मेरा हाथ के खंजेर से शैतान का धडकता हुआ दिल बिचमेसे कट गया. पर अनहोनी अभी बाकि थी|

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 शैतान ने मरते-मरते मुझे काट लिया है. बाबू काका छोटे सरकार छोटे सरकार कहते हुए मेरे पास आऐ. उनकी आँखों में आसू है.  मैंने कहा मेरा काम पूरा हुआ काका अब गाँव वापस बस सकता हे|

मेरे पास समय कम है. क्योंकि वो दंश नर पिसाच का है |जिसका मौत के अलवा कोई इलाज नहीं|मैं एक पत्थर को पीठ लगाके बैठा हूँ और बाबुकाका को अलविदा कहदिया है|

क्योंकि मुझे महसूस हो रहा है की मैं भी नर पिसाच बन रहा हूं. मेरी बात मानके काका गाँव को सूचित करने निकले हें.

सूर्योदय  में कुछ ही क्षण बाकि है. और में अपनी पर्सनल डायरी में मेरी जिंदगी के आखंरी शब्द लिख रहा हूँ. और मेरे सामने पड़ा है. वही तीसरा खंजर जिसपर शैतान के बाद अब मेरा खून लगने वाला है. अलविदा प्यारी दुनिया.

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