Horror Stories In Hindi

7 Best Horror Stories In Hindi Bhoot Ki Darawni Kahaniya Real Ghost Story 2020 hindi kahaniyon ka blog

Hello, I am presenting the latest Horror Stories In Hindi. This is completely new and best Horror Stories In Hindi available on blogs. Kindly comment after reading how much you like this Ghost Stories In Hindi. आप पढ़ रहे है दिल दहलादेनेवाली हॉरर स्टोरीस इन हिंदी.यह कहानिया मैंने खुद लिखी है और इनसमेसे कुछ सच्ची भी है .जिनको घोस्ट स्टोरीज , भूत प्रेत की कहानिया पढना पसंद है उनको ये कहनिया जरुर पसंद आयेगी.वही कहानिया है जो आपको डर का एहसास कराएगी.मेरे ब्लॉग की और रचनाये जरुर पढ़े.

1. डाक बंगला ||New Horror Stories In Hindi

Ghost Stories In Hindi
Ghost Stories In Hindi

 

 

 

 

 

 

 

आरव गाड़ी से निचे उतरा और उसने घडी पर नज़र डाली.उस वक़्त रातके ठीक 09:00 बजे थे.फिर उसने गाड़ी का बोनेट खोला.और गाड़ी ठीक करने की कोशिश की.पर लगभग 15 से 20 बार गाड़ी स्टार्ट करनेकी कोशिश करके भी गाड़ी स्टार्ट हो न सकी.

गाड़ी में शायद कुछ बड़ा प्रॉब्लम था. जिस वज़ह से वह उसे ठीक नहीं कर पा रहा था.उसने मोबाइल चेक किया.पर उसमे नेटवर्क नहीं था.फिर उसने गाड़ी के पिछली सिट पर सोई हुई उसकी पत्नी मितला को आवाज़ दी मितला अरे ओ मिताली उठो. हमे नजदीकी कोई.रेस्ट हाउस और हो सके तो गराज जल्दी धुंडना होगा.

क्योंकि गाड़ी खराब हो गई है.और अब मैकेनिक के बिना ठीक नहीं होगी.मिताली नींद में है बड बड़ा ते हुई उठी.तुमसे एक काम ढंग से नहीं होता आरव.कब से बोल रही हु.ये बैलगाड़ी बेचके कमसे कम एक सेकेंडहैंड गाड़ी लेलो. तो तुमसे वह भी नहीं होता.

जवाब में अराव बोला खरीद लेंगे माता रानी अब अपना हैंडबैग उठाव और चलो कही.रेस्ट हाउस तलाश ते है.फिर दोनों जंगल की कच्च्ची सडक छोडके मेन रोड पर आगए.उसी वक़्त उन्हें नजदीकी पहड़ी एलाखे से भेडियोके रोने की आवाजे आने लगी.

वह आवाजे उस भयानक कलि रातको और भी डरावना बना रही थी.दोनों लगभग आधा घंटा चलते रहे.पर ना कोइ गाड़ी दिखी और नाही  कोइ होटल .मिताली बोली आरव तुम्हारे बेवकूफ दोस्त मिंटू ने ये कौनसे वीराने में फार्महाउस ख़रीदा है. उसि वक़्त अचानक आसमान में तेजीसे बिजली कडकी.बिजले के कडकने की आवाज़ के साथ ही मिताली अराव के बगल में कसके चिपक गई.

आरव के चेहरे पर मुसकान चमक गई. बारिश के आसार नज़र आने लगे थे.चलेते-चलते बिजली की ही चम-चमाती तेज रौशनी में उन्हें एक पुराना डाक बंगला साफ़-साफ़ दिखाइए दिया. वह दोनों तेजी से दौड़ते-दौड़ते डाक बंगले के गेट के पास पहुचे.गेट पर कोइ वाचमन नहीं था.

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वीरान घाटी के भयानक प्रेत

  • भूतहा डाक बगंले में प्रवेश

इसलिए वह दोनों सीधे अंदर दरवाजे के पास पहुचे.दरवाजे के पास डोर बेल के नाम पर एक पुराणी रस्सी किसी साप की तरह लटक रही थी.उसे उन्होंने दो तीन बार खिंचा पर अंदर  से किसी भी बेल या घंटी की आवाज़ नहीं आयी.फिर मिताली ने दरवाजे पर खट-खटाने. के लिए हात आगे बढ़ाया.

उससे पहले ही अंदर से एक भारी आवाज़ आयी अंदर आजाव दरवाज़ा खुला है.उन्हें थोडा अजीब लगा क्योंकि उन्हें अंदरसे किसी भी घंटी की आवाज़ नहीं आयी थी.और नहीं उन्होंने कोई आवाज़ की थी.

फिर वह दोनों दरवाज़ा खोलके के अन्दर गए. दरवाजे के ठीक सामने झूले पर बैठके एक आदमी शाही अंदाज़ में सिगार पि रहा था.अराव बोला सर हम यहा से कुछ ही किलो मीटर दूर हमारे दोस्त के घर फार्महाउस देखने जा रहे थे.और बीच  रस्ते में हमारी गाड़ी खराब हो गई.

और मदत बुलाने के लिए हमारे मोबाइल में सिग्नल भी नहीं है.क्या हम आपके फ़ोन से कॉल कर सकते है. उस आदमी के चहरे पर कोइ भावना नहीं था. उसने कहा ज़रूर कीजिये.ऊपर आखरी कमरे में लैंडलाइन है.

  • डाक बंगले की अजीब चीजे

आरव ने उन्हें पहले परिचय देना उचित समझा वह बोला मेरा नाम आरव है.और ये है मेरी पत्नी मिताली.फिर वह आदमी बोला मेरा नाम दादाठाकुर है. मैं इस हवेली का मालिक हूँ. अराव और मिताली बंगले की शान देख ही  रहे थे.की उनकी नज़र दादा ठाकुर के पीछे वाली दिवारकी सबसे बड़ी पुराणी फोटो फ्रेम पर पड़ी.

जो खाली थी और पूरे घर में तस्वीरे ही तस्वीरे थी. सब में एक बात समान थी की किसी भी तस्वीर में कोइ भी हस नहीं रहा था. भावना हीन तस्वीरे.फिर आरव और मिताली दोनों उपरी मंज़िल पर गए और कमरे में जाके लैंडलाइन मिंटू को फ़ोन लगाने लगे.

पर फ़ोन लाइन में बार-बार दिकते आने की वज़ह से फोने लग नहीं रहा था. तभी मिताली की नज़र उस दीवार पर पड़ी वहा और एक फोटो फ्रेम टंगी थी जिसमे कोइ तस्वीर नहि थि.

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रक्तपिसचिनी की भूक

  • डाक बंगले की बदकिस्मत  रात

उन्हें ये बात थोड़ी अजीब लगी. वह दोनों निचे गए और दादाठाकुर को बोले आपके लैंडलाइन से फोने नहीं लग रहा है.ठाकुर बोले फ़ोन लाइन में यह हमेशा गड़बड़ी रहती है.दुबारा से प्रयास करे या फिर चाहे तो आज की रात यही काट लीजिये.

मिताली और अराव कमरे में जाकर फिर कॉल लगाने की कोशिश करने लगे .पर सब बेकार आख़िर में दोनों ने रात को वही रुकने का निर्णय लिया. बेड पर लेटते   ही दोनों की आँख लग गई.और रात को ठीक 1:30 बजे अराव की नींद खुल गई.

  • होश उड़ने वाला दृश दिखा

और उसने एक बार फिर लैंडलाइन ट्राय किया पर इसबार फ़ोन पूरी तरह से डेड था. लैंडलाइन निचे रखते हुए अराव की नज़र दिवार पर गई. और सामने का नजारा  देखकर उसके चेहरे की हवाइयाँ उड़ गई.

क्योंकि उस खाली फ्रेम में उन दोनों की तस्वीर थी और उसके निचे लिखी थी उनके मौत की तारीख.उसने मितालि को उठाया और वह तस्वीर दिखाई.वोबोली यहाँ  कुछ गड-बड है. आरव हमें अभी के अभी यहाँ से निकलना चहिये.फिर दोनों ने वहा से सरपट दौड़ लगाई.

  • अदृश्य रूह ने किया पीछा |Horror Stories In Hind

सीढियों से वह दोनों तेजी से उतरने लगे पर सीढियों पर आवाज़ 6 पैरो की थी.अब वह दोनों काफ़ी डर चुके थे.कुछ भी करके उन्हें बस दरवाज़ा खोलके बाहर भागना था.वो दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगे.

पर दरवाज़ा किसीने बाहर से बंद किया था.और अब  वह दोनों उस डाक बंगले में क़ैद हो चुके थे.अराव और मिताली दरवाज़ा पिट रहे थे.मदत के लिए चिल्ला रहे थे.उसी वक़्त बदकिस्मती से बिजली चली गई. और मौत ने अँधेरे की चादर से सबकुछ ढक लिया.

  • आखरी भयानक मंजर

चारो तरफ़ शमसान घाट की शांति फ़ैल गई. मिताली ने अपने थर-थर करते हातो से मोबाइल टॉर्च  चालु करने लगी.और जैसे ही उसने टोर्च चालूकी की उसकी रौशनी सबसे पहले उस तस्वीर पर पड़ी जो तस्वीर कुछ समय पहले खाली थी.

उसमे अब दादा ठाकुर झूले पर बैठे शैतानी मुस्कान दे रहे थे. और अगले ही पल वह तस्वीर से धिरे-धिरे गायब होने लगे.और उसके निचे रखा हुआ झुला बिना हवाके हिलने लगा.

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बीडी मांगने वाला भूत

  • कहानी का दर्दनाक अंत | Horror Stories In Hindi

इस भयानक मंज़र को दखकर मिताली की घिग्गी सि बंद हो गई.और आरव बस बेसुद देखता ही रहा. कुछ ही पालो में मोबाइल भी स्विच ऑफ हो गया. और अबतक अंधेरे में मिताली और आरव को वहापर एक दुसरे के सांसो की ही  आवाज़ आ रहीथी.

पर अब वह और लोगों के सांसो की आवाज़ भी सुनाई देने लगी. एक-एक करके सभी आवाजे नज़दीक आ रही थी. और कुछ ही पलो में दोनों की एक बड़ी चीख के साथ.

उन दोनों की तस्वीर भी और लोगों के साथ डाक बंगले की दीवारों पर टंग गई. और दादाठाकुर झूले पर बैठके सिगार पिते हुए. किसी और मेहमान का इंतज़ार करने लगे.

2. जंगल की चुडेल || Best Horror Stories In Hindi

Darawni Bhoot Ki Kahani
Darawni Bhoot Ki Kahani

 

 

 

 

 

 

 

मीर और उसका छोटा भाई वीरू अपने मामा के घरसे.छुट्टिया बिता के घर लौट रहे थे. घर जल्दी पहुंचे इस वज़ह समीर ने जंगल वाले शोर्ट कट से जाने का निर्णय लिया. मगर वीरू उस रस्ते से आने के लिए तय्यार न था.क्योंकि बड़े-बुढो से उसने जंगले में चुडेल और भूत प्रेत की कहानिया सुन रखी थी.

 वह बोला भय्या मैं जंगले के रस्ते नहीं आऊंगा क्योंकि वहा भूत प्रेतों का साया है.समीर बोला तू क्यों डर रहा  है छोटे.तेरा बड़ा भाई है न तेरे साथ.और ये भूत प्रेत नहीं कुछ नहीं होता. सिर्फ मन घडन कहनियाँ होती है.और हम घर जल्दी भी तो पहुँचेगे.

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हॉन्टेड फ्लैट नंबर 303

  • जंगल का रास्ता चुना 

किसी तरह समझा बूझा के समीर ने उसे मना लिया और कार पक्क्की सड़क छोडके  जंगल के रास्ते मोडली. तक़रीबन 10 मिनिट गाड़ी चलाते रहने के बाद उन्हें एक झोपडी दिखाई दी.जिसके आंगन में एक बुढिया झाड़ू लगा रही थी.समीर बोला देख छोटे यहा कोइ रहता भी है.

वीरू बोला भाई पक्का इंसान ही है ना. याफिर कोई चुडेल.समीर बोला फट्टू साले तू कही ले जाने के लायक नहीं है. तू सोजा इतना बोलके समीर उसपे हसने लगा .थोड़ी देर बाद आगे उन्हें फिरसे वही झोपडी दिखी और वही बुढिया आंगन में बैठी थी.

  • चुड़ैल से सामना

वीरू बोला समीर भाई -समीर भाई देखो वही बुढिया और झोपडी यहा फिरसे आ गई.लगता है हम आज मरने वाले है.समीर बोलो फिरसे या होगया तेरा चालू कोई और झोपडी और दूसरी बुढिया भी तो होसकती है. बुढिया को हमने नजदीकसे थोड़ी न देखा है.

ये बोलकर उसने वीरू का मुह बंद करा.पर थोड़ी देर बाद जब वही झोपडी फिरसे दिखी अब वीरू की फट के हात में आचुकी थी. डर से उसके चहरे पिला पड़ गया था.और समीर के चहरे का रंग भी उड़चूका था.समीर  बोला मुझे तेरी घडी दे वीरू रोते-रोते बोला क्यों मरने से पहले मरे घडी लेना चाहते हो क्या. बोला था न जंगले के रस्ते मत चलो .

समीर बोला तू सिर्फ़ घडी दे.और रोना बंद कर बाकि मैं संभलता हूँ. विरु ने घडी निकाल के गुस्से में समीर की और फैक दी.समीर ने घडी में टाइम देखा. श्याम के 5 बज चुके थे.उसने घड़ी कार से उस घर के नज़दीक रस्ते में ही गिरा दी.

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ट्रिप टू खंडाला

  • जंगल का छलावा

और गाड़ी तेजी से भगाइ  थोड़ी देर बाद उन्हें वह झोपडी वापस दिखी पर इसबार बुढिया वहा नहीं थी.वीरू रोते-रोते  बोला भाई अब हम पक्का मरने वाले है.समीर कुछ नहीं बोला घर के नज़दीक पहुचकर उसी जहग उसने गाड़ी रोकी और उसे वीरू की घडी वही पड़ी मिली.

उसमे समय हुआ था.5 बजके 10 मिनट समीर समझ गया था. की वह किसी छलावे के फंदे में फस गए है.उसने वीरू को घडी दी उसने रोते-रोते वह पहन ली. समीर ने उससे कहा की तू गाड़ी में ही रुक में उस भूतनी से मिलकर आता हूँ. और झोपडी की और चल पड़ा.

  • कहानी का अंत

वीरू चिल्ला रहा था भय्या मत जाव भय्या वहा चुडेल है चुडेल.फिर अचानक वीरू के गाल पर एक चमाट पड़ा और आवाज़ आयी.घर आय गया छोटे उठ्जा.

और वीरू आँख मलते हुए उठा तो गाड़ी घर के आंगन खड़ी में थी.और समीर कार से सामन निकाल रहा था और जब विरुने घडी में समय देखा तो 5 बजके 10 मिनट होरहे थे. समीर ने आके उससे पूछा तू नीदं क्या बड बड़ा रहा था आज हम मरने वाले है.समीर की बात सुनके वीरू खुदपे ही हसने लगा.

3. आत्मा की कहनी मेरी जुबानी|| Horror Stories In Hindi

Atma Ki Kahani
Atma Ki Kahani

 

 

 

 

 

 

 

कहते है आत्माए हमारे आसपास हर वक़्त होती है.बस हम उन्हें देख नहीं सकते पर अगर चाहो तो उन्हें देखने के लिए किसी भूतिया जगह या कहो हॉन्टेड प्लेस जाने की ज़रूरत नहीं होती.

और अब दूसरा मुद्दा की आत्मा मृत्यु के बाद अगर जन्म लेती है.तो वह मरने के बाद भटक ती क्यों है.उसका जवाब है.इच्छा अगर मरते वक़्त इन्सान की किसी प्रकार की इच्छा अगर अधूरी रहजाती है. तो उस इच्छा की पूर्ति के लिये. उसकी रूह  भटकती है.

और अब आपके मन में शायद सवाल आया होगा की क्या आत्मा खतरनाक होती है? तो मैं कहूँगा की ये उस आत्मा की किस प्रकार की इच्छा अधूरी रहगई है. और वह किस तरह मरा या.मारा गया इसपर निर्भर करता है.

उदाहरन के लिय समझ ते है.अगर किसी इसना को प्यार में धोके से मारा तो वह आत्मा तो भयानक. अतृप्त और नफ़रत से भरी ही होगी ना.और अगर कसी पिता की मौत होगई तो वह अपनी संतान को सुखी देखने के बाद ही मुक्त होगी ना.

 तो इन्सान से लेकर आत्मा तक सभी की इच्छाए होती है.तो अभी में जो कहानिया यहा ब्लॉग पोस्ट करने वाला हूँ.वो आत्मा की अतृप्त के बारे में ही होगी.

4. पिता की रूह || Ghost Stories In Hindi

 

Bhooto Ki Kahani
Bhooto Ki Kahani

 

 

 

 

 

 

 

मिताली ने किरण को आवाज़ लगाई.किरण किरण श्याम होगई है बेटे तुम्हारे पापा आने का समय होगया है चोलो स्कूल का होमवर्क पूरा करलो नहीं तो पापा डाटेंगे. पापा का नाम सुनते ही.8 साल का किरण बैट और स्टंप उठाके दौड़ता हुआ चला आया.

और उपरी मंज़िल में सीढियों पर तेजी से चढ़ने लगा उसी वक़्त आखरी सीढि पर उसका पैर  फिसल गया और वह निचे गिरने हि वाला था कि किसी अदृश शक्ति ने उसे संभाल लिया. और हवामे ही उड़ते हुए कुछ क़दम की दुरी पर उसे उसके कमरे में छोड़ा.

किरण को इसमें बहुत मज़ा आया क्योंकि 8 साल के बच्चे को भूत और प्रेतों के बारे में कुछ पता नहीं था.उस रात खाने के डाइनिंग टेबल मम्मी पापा को उड़ने वाली कहानी सुनाई पर 8 साल के बच्चे पर भला कौन विश्वास करता.पर उसके दुसरे ही दिन से किरण के बर्ताव में उसकी माँ को बदलाव महसूस होने लगा था.

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नागिन पिशाच

  • पिता रूह ने की मदत

 स्कूल का होम वर्क समय पर पूरा करने लगा.सुबह स्कूल के लिए ख़ुद से तैयार होने लगा.ज्यादातर समय कमरे उसके में बिताने लगा.एक दिन मिताली सीढियों ऊपर आ रही थी. तभी उसे किरण के कमरे से हसने और बात करने की आवाजे आने लगी.

जैसे कि वह किसी के साथ मस्ती कर रहा हो. मिताली ने दबे पैरो सि जाकर कमरे की होल से झांके देखा तो डरके मारे उसकी साँस फूलने लगी क्योंकि एक आदमी की धुंदली  परछाई बालकनी के पास खड़ी थी.उसके बाजूमे  किरण उसका हात पकड के खड़ा था.

उस आदमी ने जब पीछे मुडके देखा तो मिताली डर से दहल उठी क्योंकि उस आदमी का चेहर भयानक था उसपर पर गहरी चोट के निशना थे और कुछ हो पालो में वह आदमी हवा में गायब होगया .

फिर मिताली दरवाज खोलके दौड़ती हुए आयी और किरण को सिने से लगाके बाहर की तरफ़ भागी. जब मिताली ने किरण से पूछा की वह आदमी कौन था तब किरण बोला वह विश्वास अंकल है.वो रोज़ मेरा ध्यान रखते है. कभी-कभी स्कूल में भी आते है.

  • रूह की सच्चाई | Ghost Stories In Hindi

मैंने आपको बताया था न उसदिन एक अंकल मुझे सीढियों से उड़ते हुए कमरे में लगाये थे ये वही है.विश्वास ये नाम मिताली को कही देखा-सा लग रहा था.पर उसे याद नहीं आ रहा था.

पर इन सब से उसे डर भी लग रहा था पर तसल्ली इस बात की थी की उस आत्मा ने किरण को अबतक कोई नुक़सान नहीं पहुचया था.उस दिन स्कूल में कोई फंक्शन होने की वहज से स्कूल 11 बजे था मिताली ने किरण को स्कूल बस में बिठा दिया और वापस घर लौटी.

तभी उसने पाया की बेडरूम के आयिने पर लिपस्टिक  से एक नाम लिखा था .मदर टेरेसा अनाथालय.जहा से मिताली और अराव ने किरण को गोद लिया था.

मितालीने उसी वक़्त घर को ताला लगाके अराव को कॉल करा और उसे अनाथालय में बुला लिया.और गाड़ी निकालके ख़ुद भी अनाथलय की ओर निकल पड़ी.

दोनों अनाथालीय में एकसाथ ही पहुचे और जाके  संचालक से मिले और किरण के भूतकाल के बारे बताने के लिए रिक्वेस्ट  की पर संचालक महोदय कुछ भी कुछ बताने के लिए तैयार न थे.

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भूत बंगला

तब मितालीने उन्हें सब हक़ीक़त और वह नाम बताया. तब संचालक ने सच्चाई बताने लगे की किरण के पिता का नाम है. विश्वास त्यागी.किरण को जन्म देते वक़्त उसकी माँ गुजर गई.उसके बाद उसके पिता ने ही उसे पाला. पर बदकिस्मती से एक कार एक्सीडेंट में उनकी भी मौत हो गई.

किरन भी उसी कार में था पर वह किसी तरह बच्च गया था. पर सर पर गहरी चोट लगने की वज़ह से उसकी यादे मिट गई. किसी भी रिश्ते दारने हमदर्दी नहीं दिखिई.तब कोर्ट से किरण की  जिम्मेदारी हमने लि.उसके बाद हमे भी बहुत बार एसा लगा की उसकी हिफ़ाज़तकोइ रुहानी ताकत कर रही है.

  • रूह की आखरी इछा

पर उस रूह  ने उसे कभी नुक़सान नहीं पहुचाया. ये बात भी सच है. सारी बात ठिकसे समझने के बाद मिताली और अराव जब घर पर लौटे तब हॉल के अयिने पर.

उनके सामने ही वापस से लिपस्टिक हवा में उठी और लिखा मरे किरण को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा इंसान बनाना यही मेरी आखरी इछा है.उसके बाद खिड़की के पास एक धुंदली सि आकृति दिखई दी और एक गहरी आवाज़ में बोली मैं हमेशा किरण के आस पास रहूँगा और गायब होगई.

5. गर्भवती का साया ||Real Horror Stories  In Hindi (सच्ची घटना)
Real Ghost Story In Hindi
Real Ghost Story In Hindi

 

 

 

 

 

 

 

ये कहनी एक पूरी तरह सत्य घटना पर आधारित है.जो मेरी मम्मी ने मुझे बताई है.बचपन में मेरी मम्मी  जॉइंट फॅमिली के साथ अहमदनगर जिल्हे में वडनेर नाम के गाँव में रहती थी.

उनका परिवार काफ़ी बड़ा था इसलिए बड़े बूढ़े और जानकर लोगों की कमी नहीं थी. उस वक़्त गाँव में पानी ले नल नहीं थे.इसलिए सभी औरते कपडे धोने के लिए.कुएँ पर जाती थी सुबह ज़्यादा काम होने की वज़ह से मेरी दादी कपडे धोने के लिए.

  • गाँव के कुएँ से आयी मुसीबत 

श्याम 5 बजे (बावड़ी) कुएँ पर अकली ही गइ थी. आने में उन्हें देर होगई.लगभग 7: 30 बजे का समय हो रहा था.पर जब वह लौटी तब पूरा परिवार अचंभे में पड गया था. क्योंकि दादी गई थी ठीक ठाक.

पर जब लौटी तब वह 9 महीने की गर्भवती थी.और आते ही खाने के लिए काजू बादाम पिस्ता दूध घी मांगने  लगी. मेरी परदादी एक जानकर और धीरज वाली स्त्री थी. उन्होंने मेरी माँ को हनुमान मंदिर वाले पंडितजी को बुलाने भेजा था.

  • पंडित जी से बातचीत की | Horror Stories In Hindi

और उसने दादी माँ को खाने की वह सब चीजे दी जो उसने मांगी थी .और जब पंडित जी आये तब उनमे और मेरी परदादी में कुछ बात चित हुई. पडिंतजी जाने के बाद परदादी ने घर में जितने काजू बादाम और पिस्ता था.

वो सब एक सूत की थेली में भरा और एक घड़े में दूध लिया और ठीक रातके 12: 00 बजे कुंए के पास वाले पेड़ के निचे रख के आयी.और जब वह लौटी तब तक दादी माँ का पेट खाली हो चूका था.

  • मुसीबत से छुटकारा मिला

बाद में सुबह मेरी माँ ने बड़ो की बाते सुनी थी की कुछ महीने पाहिले पास के गाँव की एक गर्भवती महिला ने किसी पारिवारिक तनाव.

में आकर कुँए में कूदकर आत्मा हत्या करली थी.शायद उस बेचरी गर्भवती महिला की रूह वही भटक ती है  और शायद उसकी कुछ अच्छा खाने की इच्छा अधूरी रह गई होगी.जो उसने दादी के जरिये पूरी करली.

6. फैक्ट्री की रूह || Horror Stories In Hindi
Bhoot Pret Ki Kahani Hindi
Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

 

 

 

 

 

 

 

रात को 2:30 शशिकांत के मोबाइल की घंटी बजी.और शिशिकांत ने फोने उठाया सामने से उसे उसके फैक्ट्री के सिक्यूरिटी हेड राहुल की आवाज़ आयी वह डरा हुआ था.और सिर्फ़ 3 ही लफ़्ज़ बोल पाया.

फैक्ट्री. भूत. आत्मा उसके बाद एक दर्द भरी चीख के साथ फोने कट्गाया.शिशिकांत की नीदं पल भर में उड़गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करू. बचपन में ही उसकी माँ उसे जन्म देते वक़्त गुजर गइ.

उसके बाद उसके पिताजी ने उसे पढाई के लिए विदेश भेज दिया था और अब पिताजी कि मौत के बाद बस एक दिन पहले ही उसने विरासत में मिली फैक्ट्री की जम्मेदारी संभली थी.

फोने के बाद उसने तुरंत ही फैक्ट्री मेनेजर विश्वास को फ़ोन लगाके फैक्ट्री पर बुलाया.और ख़ुद भी फैक्ट्री की और निकल पड़ा. वो दोनों जब फैक्ट्री में पहुचे तब उन्हें मैंने गेट का गार्ड कही नहीं दिखा.

पर शशिकांत की आंखे बस राहुल को ढूंड रही थी.जिसकी दर्दनाक चीख उसके दिमाग़ में अभी भी गूंज रही थी. शशिकांत ने विश्वास को कहा की तुम पुलिस को कॉल करो और फैक्ट्री के आगे वाले हिस्से को दिखो.

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श्रापित खजाना

  • फैक्ट्री में रूह का आतंक |Horror Stories In Hindi

तब तक मैं गोदाम को चेक करता हु.जब शशिकांत गोदाम में पंहुचा तब उसने देखा की राहुल का चहरे पिला पड़ा है आंखे खुली थी साँस भी चलरही थी. पर शरीर से कोई हलचल नहीं करपा रहा था मानो उसने कोइ भयानक चीज देखली हो.

उसि वक़्त और एक दर्द भरी चीख से उसका कलेजा कांप उठा. वह चीख थी मेनेजर विश्वास की शशिकांत ने सरपट दौड़ लगाई और फैक्ट्री में जाके दिखा.तब डरा हुआ विश्वास बाथरूम के एक कोने में बैठ के रो रहा था.

और बार-बार एक ही लाइन बोल रहा था वह वापस आगई वह वापस आगई अब वह किसी को नहीं छोड़ेगी.सब मरेंगे सब मरेंगे वह मानसिक संतुलन खो बैठा था.तब तक एम्बुलेंस और पुलिस आचुकी थी.शशिकांत ने  पुलिस आने के बाद उनको  को बयान दिया.

और घर के लिए रवाना होगया.पर जाते वक़्त उसे एक बात महसूस हो रही थी की वह अकेला नहीं है.कोइ तो उसके साथ चल रहा है.वो जब कार के पास पंहुचा तब कार का पिछला दरवाज़ा खुला था.

  • एहसास रूह का

उसे अच्छी तरह से याद था.कि उसने सभी दरवाजे लॉक किये थे.कार चालते वक़्त कार की पिछली सिट पर किसी के होने का एहसास हुआ.पर अभी तक उस शक्ति ने उसे कोई नुक़सान नहीं पहुचाया था.

उसी वक़्त उसे पुलिस निरीक्षक का कॉल आया की विश्वास की अमबुलंस में ही रहस्यमय तरीके से दम घोटने से मौत होगई है. और राहुल ने भी होश में आनेके बाद एम्बुलेंस में ही एक कांच के टुकडे से खुदका गला काटलिए.

इस तरह की एक के बाद के मौत की खबरों से शशिकांत का सिर दर्द से फटा जा रहा था.शशिकांत घर पंहुचा इंतना सब देखके उसे नीदं तो नहीं आने वालिथी.इसलिए वह लाइब्रेरी में बैठके किताब पढने लगा.

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भूतिया गाँव

  • कौन है वो

उसे अचानक कुछ हलचल सि महसूस हुई. और खिड़की से अन्दर आनेवाली चाँद की खुबसूरत रौशनी मैं उसे जनि पहचनी हसीन लड़की की परछाई नज़र आयी शिशिकांत को पता नहीं पर उस परछाई से डर नहीं लग रहा था.

वह लड़की बोली कैसे हो शशि.शशिकांत हकलाते हुए बोला .क… …क….. कौन हो तुम और मेरा पीछा क्यों कर रही हो.मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है.

वह बोली में वही हु जिसके साथ तुम्हारी बचपन की कुछ सुनहरी यादे है.जिसके साथ तुम स्कूल जाया करते थे. पूरा दिन हम साथ बिताया करते थे. क्या तुम मुझे भूल गए.

फिर शशिकांत के जुबान पर नाम आया स्वाति तुम और तुम्हारी ये हालत किसने की. फिर स्वाति बोली मेरे पिताजी तुम्हारे पिताजी के फैक्ट्री में काम करते थे.

  • रूह की दास्तान

वह एक दिन देररात को पूरा हिसाब किताब निपटा के घर के लिए निकल रहे थे. पर जाने से पहले आखरी बार फैक्ट्री के एक चक्कर लगाने के लिए.गोडाउन पहुचे तो उन्हें वहा कुछ नए बॉक्स दिखे.

जिनपर कंपनी का लेबल नहीं था.उन्होंने वह खोलके देखे तो उसमे अफीम और नशीले पदार्थ थे.किसी की आवाज़ सुनके वह वही छुप गए तो वहा तुम्हारे पापा और कपनी के डायरेक्टर आये थे.

तब पिताजी को पता चला की उस कम्पनी में ड्रग्स का काला कारोबार होता है.उन्होंने पिताजी को उसरात पकड़ लिया और मारके कम्पनी के पिछले वाले गोदाम में दफना दिया.मरने से पहले मेरे पापा ने ये बात मुझे फ़ोन में बता दी थी

और जब मैंने पुलिस को लेकर कम्पनी में गइ. तब पुलिस भी उनके साथ मिलिथि उन्होंने मेरी इज़्ज़त के साथ खेलकर मुझेभी उसी ज़मीन में दफना दिया जहा पर मरे पापा को दफनाया था.

  • आखरी ख्वाइश | Ghost Stories In Hindi

और आज मैंने और पिताजी ने सबको खतम करके बदला पूरा कर लिया पर.पर हमारी आत्मा को मुक्ति नहीं मिल सक्ती क्योंकि मेरे 6 साल का छोटे भाई विशाल का इस दुनिया में अब कोइ नहीं है.वो अनाथालय में दिन कट रहा है

इसलिए में मदत के लिए तुम्हारे पास आयी हूँ.क्योंकि में जानती हू. तुम एक अच्छे इन्सान हो. शशिकांत ने कहा की मैं मेरे पिताजी की गलती कभी सुधार नहीं सकता पर हमारी बचपन की दोस्ती के खातिर मैं तुम्हारे छोटे भाई के जिम्मेदारी स्वीकार ता हूँ.

और तुम्हे वादा करता हूँ मैं तुम्हारे भाई को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा इन्सान बनाऊंगा उसके बाद स्वाति और उसके पिताजी की आत्मा को मुक्ति मिलगई.

दुसरे ही दिन शशिकांत ने कम्पनी के सारे ग़लत बिज़नस बंद करवा दिए.औरउस अनाथालय से विशाल को गोद ले लिया .

7. मेंटल हॉस्पिटल || Darawni Bhoot Ki Kahani
Darawni Bhooton Ki Kahani
Darawni Bhooton Ki Kahani

 

 

 

 

 

 

 

सुबह गेट के सामने ऑटो रुका रवि ने ऑटो वाले को पैसे दिये और गेट के पास जाकर गार्ड को आवाज़ दी.पर वह कोई नहीं था. इसलिय वह ख़ुद ही गेट खोलने हो वाला था. तभी सामने से एक आदमी दौड़ता हुआ आया. और उसने गेट खोलकर रवि को अन्दर लिया.

 और हसते हुए पूछा तुम TV ठीक करने वाले होना.रवि बोला नहीं. नहीं ये शब्द सुनके उस आदमी के चहरे के भाव बदले और उसने रवि को कस के एक लाफा लगाया.रवि के आँखों के सामने अँधेरा छा गया.

  • पागल ने किया भयंकर स्वागत  | Horror Stories In Hindi

वो आदमी बोला मेरा टीवी खराब है. तो इस गेट से टीवी ठीक करने वाला आना चाहिए तुम कहासे आगये.रवि ने ख़ुद को संभला फिर अचानक 1 डॉक्टर 4 कंपाउंडर वहा दौड़ते हुए आये और उसे पकड लिया फिर डॉक्टर ने कहा लेजाव इसे और शॉक ट्रीटमेंट के लिए रेडी करो.

डॉक्टर को देखके रवि बोला सर मैं रवि हूँ आज मेरी नौकरी का पहला दिन है.मुझे डॉक्टर पाटिल से मिलना है.वो बोले हाँ में ही हूँ पाटिल.तुम्हारे बारे में मुझे बतया गया है.

तुम अपना अपॉइंटमेंट लैटर ऑफिस में जमा करो. और वर्दी पहनकर सामने वाले ऑफिस में आके मुझे मिलो.रवी थोड़ी हो देर में कंपाउंडर की ड्रेस पहनके ऑफिस में हाज़िर हुआ.

पाटिल डॉक्टर बोले अभी जो तुम्हे गेट के पास पागल मिला था. वह यहाँ बस 8 दिन पहले आया है और अभी तक सबको थपड मर चुका है.यह तक की बावर्ची को भी जाकर उसने TV क्यों नहीं चल रहा इस वज़ह से थपड मारा था.

तुम्हे इनसब की आदत डालनी होगी.और स्टाफ की कमी की वज़ह से तुम्हारी शिफ्ट कभी भी बदल सकती है.फिर डॉक्टर ने एक पुराने कंपाउंडर से रमाकांत को रवि को सभी स्टाफ से मिलवाने के लिए कहा.

  • असायलम का नजारा

सबसे मिलने के बाद रामकांत बोला चलो अब तुम्हे हमारा मुख्य काम दिखता हूँ.और वह रवि को मेन हॉल दिखाने ले गया वहा बहुत सारे पागल मरीज थे कोई फ़िल्मी डिलोग बोल रहा था कोई दर्द भरी शायरी बोल रहा था.कोई मछली पकड़ रहा था.

रमाकांत बोला अब तुम्हे भी इन सबको झेलना होगा.सबसे पहचान करने के बाद रवि और रमाकांत दोनों बताये हुए काम में जुट गए.उसी दिन रवि को नाईट ड्यूटी भी मिली थी रातको रवि पेशंट के दावा पानी करने में बिजी था.

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प्रेत आत्मा का बदला

  • रात 12 बजे के बाद 

जब रात के 12 बजने घटी बजी तब उसने नोटिस किया की सबके चहरे पर अचानक डर-सा दिखने लगा है. कुछ मरीज जो सो नहीं रहे थे वह भी दुबक के बैठ गए.रवि ने एक डॉक्टर से पूछा की सब लोग डरे हुए क्यों लग रहे है.

डॉक्टर बोले की 12 बजे के बाद इस हॉस्पिटल में पुराने मरे हुए पागलो की प्रेत आत्माये घुमती है.तुम भी संभल कर रहना. हो सके तो किसीके साथ रहना.पर रवि का भूत प्रेत पर विश्वास नहीं था.

रवि ने रात का खाना कुछ ज़्यादा हो खा लिया था.इसलिए वह टॉयलेट चला गया और जब वह टॉयलेट की ओर जा रहा था.उसे अपने पीछे किसीके होने का एहसास हुआ.

  • डरावना एहसास

पर जब उसने पीछे मुडके देखा तब वहा कोई नहीं था.वह आगे बढ़ने लगा फिर से उसे किसी के होने का एहसान होने लगा फिर उसने सोचा की वहम होगा शायद. और वह टॉयलेट में घुस गया.

और जब वह बाहर निकला तब आयिने पर लिखा था.तुम अब पागल होने वाले हो रवि को लगा कोई उसकी खिचाई कर रहा है.उसने किसी से कुछ नहीं कहा.बस वापस जाके मरीजो का ध्यान रखने लगा.अचानक हॉस्पिटल एक बड़ी चीख से गूंज उठा.

रवि आवाज़ की दिशा मैं तेजी से दौड़ा आवाज़ स्टोर रूम से आ रही थी.जब रवि स्टोर रूम के अन्दर पंहुचा तब दरवाजे के पीछे छुपे एक पागल ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया.और दरवाजे की और मुह करके खड़ा रहा.

  • रूह से मुलाकात | Horror Stories In Hindi

रवि दरवाज़ा खोलने आगे बढ़ा तब उस पागल ने रविको उठाके हवामे उछाल दिया.ज़मीन पर गिरने की वज़ह से पीठ में चोट लगी थी. उतने में ही उसे एक अजब हसी वाली आवाज़ सुनिई दी वह पागल बोला मैंने कहा था ना तुम पागल होने वाले हो.

रवि गुसे में बोला अबे पागल आदमी तुझे तो मैं शॉक दूंगा. पागल बोला उसकी वज़ह से तो मारा था. मैं और अब मुझे शॉक से कोइ डर नहीं लगता. इतना कहके उसने एक हात से रविको कान से पकड़ा और अपने दुसरे हात लाइट का स्विच बोर्ड खोले उसमे डाल दिया.

  • कहानी का अंत

और उसके बाद रवि को 440 होल्ट का झटका लगा और पूरा हॉस्पिटल रवि के आवाज़ से गूंज उठा. उसकी आवाज़ सुनकर हॉस्पिटल का स्टाफ रूम का दरवाज़ा तोडके अन्दर आया.

तब सबने देखा की रवि बेहोश है.सबने रवि को लेजाके मरीजो बेड पर लेटा दिया.और जब रवि होश में आया तब वह उसका मानसिक संतुलन खोचुका था.

आजभी भी उस पागल पण से बाहर नहीं निकल पाया है.अब रवि को लगता है कि वह एक डॉक्टर है.और अभीतक बहुत से मरीजो और डॉक्टर्स का ब्लेड से पेट काट चूका है.

और अब हर रात उस हॉस्पिटल में चीख सुनिई देती वह भी तब जब रवि को शॉक दिया जाता है.

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