हरियल पक्षी की सम्पूर्ण जानकारी एवं रोचक तथ्य | Hariyal bird in hindi

हरियल पक्षी को हरियाल पक्षी, हारिल पक्षी और पीले पैरो वाला हरा कबूतर भी कहा जाता है. यह भारतीय उपमहाद्वीप पर बहुतायत में पायी जाने वाली हरे कबूतर की एक जाती है.इस पक्षी के विषय में एक मान्यता काफी प्रचलित है कि हरियल पक्षी कभी जमीन पर पैर नहीं रखता और अगर यह निचे उतरता भी है, तो अपने पैरों में लकडी का एक टुकडा पकडकर उतरता है.

अब यह पक्षी जमीन पर क्यों नहीं उतरता है, इस विषय पर भी आगे हम बात करनेवाले है.इस लेख में हम हरियल पक्षी की पूरी जानकरी एवं रोचक तथ्य देखनेवाले है.तो चलिए दोस्तों शुरू करते है.

हरियल पक्षी जमीन पर क्यों नहीं उतरते

हरियल बर्ड के जमीन पर ना उतरने के दो कारण है. जो कुछ इस प्रकार है.

१) हरियल पक्षी ताजा फुल, फल एवं कलियाँ खाते है. जिस वजह से इन्हें पानी की आवश्यकता कम होती है और जब इन्हें पानी की आवश्यकता पड़ती है, तो यह पत्तों पर जमी हुई (ओंस) पानी की बूंदों से भी अपनी प्यास बुझा सकते है.

२) इस पक्षी का स्वभाव शर्मीला होता है, यह इंसान एवं अन्य परजीवों के सामने ठहराना ज्यादा पसंद नहीं करते. इसीलिए हरियल बर्ड को जमीन पर आने की आवश्यकता कम एवं यह कम नजर में आते है. इस पक्षी की तस्वीर आप निचे देख सकते है.

hariyal bird

हरियल पक्षी के रोचक तथ्य

  • अपने बच्चों को नर और मादा दोनों हरियल पक्षी मिलकर अपने सिने से दूध पीलाते है.
  • हरियल पक्षी वास्तव में अधिक मुखर नहीं होते अर्थात यह ज्यादा आवाज नहीं करते.
  • इस पक्षी के विषय में एक और बात भी कही जाती है, हरियल पक्षी को अगर अपने आस पास किसी शिकारी की भनक लगती है, तो यह जमीन पर गिरकर मरने का नाटक करता है अथवा आवाज करना पूरी तरह से बंद कर देते है.
  • इस पक्षी को अधिकतर पीपल के पेड़ के इर्द गिर्द देखा जा सकता है. क्योंकि पीपल के पेड़ पर मिलनेवाला फल इसका मुख्य आहार होता है.
  • मादा हरियल पक्षी नर के मुकाबले अधिक सुस्त होती है.
  • यह पक्षी स्थानीय होते है. अर्थात यह “प्रवासी पक्षी” नहीं होते. (Non-migratory birds)
  • जैसा की हमने देखा की ये प्रवासी पक्षी नही है लेकिन ये प्रजनन के बाद अपनी एक सीमा के भीतर स्थान बदल सकते है.
  • स्वभाविक रूप से ही हरियल पक्षी अकेला रहने में असुरक्षित महसूस करते है. इसलिए यह ज्यादातर समूह में ही रहते है. इनके समूह ५ से १० हरियल पक्षियों के होते है.
  • हरीयाल पक्षी ज्यादातर नजर नहीं आते लेकिन सुबह- सुबह घने पेड़ों की सबसे उपरी डाली पर धुप सकते हुए इन्हें देखा जा सकता है.
  • हरियल पक्षी फल वाले पेड़ अर्थात बाग व घने जंगल के इलाके में रहना अधिकतम पसंद करते है. प्रजनन के आलावा खाने की तलाश में भी यह अपना स्थान बदल सकते है.
  • यह पक्षी अक्सर झुंड में रहने के लिए जाने जाते है. हालाकिं, कभी कभी इन्हें दिन के समय में जोड़ों में भी देखा जा सकता है.
  • अन्य कबूतरों की जातियों की तरह हरियल पक्षी को पालने में भी लोगों की रूचि बढ रही है. हालाकिं यह पक्षी पालतू बनाने के लिए बने ही नहीं है. लेकिन इनकी खूबसूरती की वजह से लोग इनकी तरफ आकर्षित हो रहे है.

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हरियल पक्षी की शारीरिक बनावट व उम्र

हरियल पक्षी का आकार २९ सेंटीमीटर से लेकर ३३ सेंटीमीटर तक होता है. इसका वजन २३० ग्राम से २७० ग्राम के बीच होता है. इनके पंखो का फैलाव १८ से २१ सेंटीमीटर लंबा होता है.हरियल पक्षी का रंग हलका पीला हरा होता है. जो ओलिव फल के रंग समान प्रतीत होता है. इस पक्षी के सिर के उपरी भाग पर हलके नीले भूरे रंग के बाल(पंख) होते है.

इनकी आंखे काले रंग होती है, जिनके आस पास लाल रंग कि पतली रिंग होती है. इस पक्षी कि चोंच अन्य पक्षियों की तुलना में कम सक्त है, अर्थात नर्म होती है. क्योंकी हरियाल पक्षी शाकाहारी होता है. हारिल के पैर पीले रंग के होते है.

इनके पैरों के तलवे सपाट होते है. जिसकी मदत से यह पक्षी पेड़ों की डालियों पर दीर्घ काल तक अपनी मजबूत पकड जमाकर बैठते है. हरियल पक्षी की उम्र २६ साल होती है. लेकिन अगर इसे इंसानों द्वरा पालतू बनाया जाता है.तो इसकी उम्र घट सकती है.

हरियल पक्षी का प्रजनन, बच्चे व घोंसला

हरियल पक्षी का प्रजनन काल मार्च से जून महीने तक होता है. इस विशेष समय में  हरियल नर, मादाओं को रिझाने के लिए. अपने गर्दन की थैली को फुलाकर नृत्य करते है. मादा हरीयाल पक्षी १ या २ अंडे देती है. जिनका रंग चमकीला सफेद होता है.

नर और मादा हरियल पक्षी दोनों भी अण्डों को सेते है. उसकेबाद १३ दिनों के बाद इनके अंडों में से चूजे बाहर आते है. यह पक्षी अपना घोंसला घने पेड़ों एवं झड़ियों के बिच बनाते है, जिसे तैयार करने के लिए वह पत्तियां, टहनियाँ, घास और लकड़ी के टुकडे इस्तेमाल करते है.

हरियल पक्षी घोंसला ज्यादा मजबूत नहीं होता लेकिन वे इसे काफी ऊँची एवं छुपी जगह पर बनाते है. यह पक्षी अपने घोंसला की रखवाली के लिए एक अनोखी तरकीब अजमाता है. जिसके विषय में आगे हम बात करनेवाले है.

हरियल बर्ड अपने बच्चों की सुरक्षा कैसे करता है

हरियल बर्ड निरिक्षण में एक बहुतही महत्वपूर्ण एवं रोचक बात सामने आयी है. काफी बार ऐसा देखा गया है की काला भुजंगा नामक पक्षी जिसे अंग्रेजी में black drongo कहते इस पक्षी का घोंसला. जिस पेड़ पर होता है.

उसी पेड पर हरियल पक्षी अपना घोंसला बनाते है. इसकी वजह यह है की  काला भुजंगा पक्षी बहुत ही आक्रामक होता है. वह अपना घोंसला व बच्चों के नजदीक किसी भी परजीवी को भटकने भी नहीं देता. इसी बता का फायदा हरियल पक्षी को होता है. काला भुजंगा पक्षी की वजह से हरियल पक्षी का घोंसला एवं बच्चों को संरक्षण प्राप्त हो जाता है.

हरियल पक्षी कहा पाया जाता है

हरियल पक्षी ऊंचे-ऊंचे पेड़ों वाले घने व सदाबहार जंगलों में जीवन बिताना पसंद करते है. इस पक्षी के अध्ययन में यह बात भी निरीक्षण मे आयी है कि हरियल पक्षी ज्यादातर पीपल और बरगद के पेड़ों पर घोंसला बनाते है.

यह ज्यादातर पेड़ की सबसे ऊँची वाली डाली पर बैठते है.हारिल पक्षी भारत के लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार इन द्वीपों को छोडकर अन्य सभी राज्यों में पाए जाते है.

इनके के रहने योग्य आवासों में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम तराई के जंगल, तलहटी के जंगल, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम मोंटाने के वन और शुष्क झाड़ी वाले क्षेत्र शामिल है.

हरियल पक्षी का आहार

हरियल पक्षी के भोजन मे अधिकतर ताजी व कुदरती चीजे अधिक होती है. यह पक्षी दाना बहुत ही कम खाते है. यह पक्षी अधिकतर फूलों की कलियां, छोटे पौधों के अंकुर, एवं बीज खाना पसंद करते है.

इनका प्रिय भोजन फल का आहार होता है. जिसमे जंगली फल, बगीचे में उगनेवाले फल, ओलिव, बदाम, चेरी, जामुन, अंजीर व इत्यादी होते है.

हरियल पक्षी का वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • हरियल पक्षी का वैज्ञानिक नाम Treron phoenicopterus है. यह शब्द ग्रीक भाषा शैली से लिया गया है. इसका अर्थ शर्मिला या डरा हुआ कबूतर ऐसा होता है.
  • हरियल पक्षी “ट्रेरन” के वशं का पक्षी है. ट्रेरन शब्द का मूल अर्थ है हरा कबूतर.
  • यह कबूतरों के Columbidae वशं का ही सदस्य है.
  • हरियल पक्षी की तादाद संतुलित है इसी वजह से इसकी संरक्षण स्थिति “संकटमुक्त जाति” की श्रेणी में आती है.

हरियल पक्षी के विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें – hariyal bird

  • यह भारत में स्थित महाराष्ट्र का “राज्य पक्षी” है.
  • इनकी आवाज किसी मधुर सिटी जैसी होती है. जिसका उच्चारण कुछ इस तरह होता है ‘kwa-kow’.
  • हरियल पक्षी का शिकार करनेवालों में कौवा, बाज, उल्लू ,सांप इन जैसे परभक्षी शामिल है.
  • यह पक्षी मनुष्य व अन्य जीवों के लिए घातक नहीं होते है बल्कि यह इंसानों से दूर भागते है.

Frequently asked questions about hariyal bird in hindi | हरियल पक्षी के बारे में बार बार पूछे जाने वाले सवाल

Q1) हरियल पक्षी की उम्र कितनी होती है?
A- हरियल पक्षी का जीवनकाल २६ साल तक हो सकता है.

Q2) हरियल पक्षी कौनसा पानी पीते है?
A- जरुरत पडने पर हरियल पक्षी प्यास बुझाने के लिए पेड़ों की पतियाँ, एवं फूलों पर इक्कटा हुई पानी की बूंदों का उपयोग भी करते है.

Q3) हरियल पक्षी कौनसी जाती का है?
A- हरियल पक्षी भारत उपमहाद्वीप पर पायी जानेवाली हरे कबूतर की ही एक जाती है.

Q4) क्या हरियल पक्षी कबूतर की जाती का है?
A- हरियल पक्षी कबूतरों के कोलम्बिडाए कुल का ही सदस्य है. यह हरे कबूतरों के वशं से है.

Q5) हरियल पक्षी को इंग्लिश में क्या बोलते हैं?
A- हरियल पक्षी को इंग्लिश में Yellow-footed green pigeon कहते है.

हमारा लेख hariyal bird in hindi पढने के लिए धन्यवाद. इसके लेख में दी गई hariyal pakshi की जानकरी आपको कैसी लगी ये हमे कमेंट करके जरुर बताएं.और इस जानकरी से परिपूर्ण इसे लेख को अन्य लोगों से साथ जरुर शेयर करें.

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