Bhoot Pret Ki Kahani

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Bhoot Pret Ki Kahani :- I  am shearing Bhoot Pret Ki Kahani kindly comment after reading how much you like this Hindi Kahani .In this horror ghost story, you will also get to know about the ancient ghost of Indian Puranas. you can read about this type ghost on Wikipedia also आज आप पढ़ रहे है.भूत प्रेत की कहानी हिन्दी में जिसमे पढने में आपको एक अजीब डर और रोमांच का एहसास होगा. यह भूत प्रेत की कहानी बच्चो को सीख देने के लिए भी सुनाई जासकती है. मरे ब्लॉग की और भी  डरावनी  Bhoot Pret Ki Kahani जरुर पढ़े

श्रापित खजाना  Bhoot Pret Ki Kahani

जोक्खो एक ऐसी आत्मा है. जो हजारो सालसे धरती के कुछ ख़ास गुप्त खजानों की रक्षा कर रही है. कहते है अगर कोई लालची इनसान उसका गुप्त खजाना पाने की कोशिश करता है. तो उस इंसान को जोक्खो की भयानक रूह का सामना करना पड़ता है. पर अगर कोई मंत्र. तंत्र विद्या का इस्तेमाल करके खजाने को पाभी ले ता है. तो वह खजाना एक भयंकर श्राप बनकर उसकी पीढीयों में रहता हे.

जोक्खो का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है. वो किसी नेकदिल इनसान को उसकी मर्जी से खजाने में से कुछ सोना दे भी देता है. पर लालची इंसान को वह जिन्दा बाहर आने नहीं देता. हमारी कहनी शुरू होती है. बहत्तरपूरा गाँव से. बहत्तरपूरा में इनामदार नाम का एक सावकार रहता था. वो खानदानी आमिर था .Bhoot Pret Ki Kahani 

उसके पास विरासत में मिली हुई करोडो की सम्पति थी. फिरभी उसने लगबघ आधे गाँव की जमींन धोके से हड्डप ली थी. सावकार बहुत ही लालची और कपटी इन्सान था. एक दिन सुबह उसकी की हवाली पर एक आदमी उससे मिलने आया. उसे दरवाजे पर सिपाहियों ने रोकलिया. उसने अन्दर बैठे इनामदार को एक सन्देश भिजवाया कि वह धन कमाने का एक नया तरीक़ा बताने आया है.

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  • दो लालची इंसानों की मुलाकात हुई

धन का नाम सुनते ही इनामदार का लालच जाग उठा उसने उस आदमी को अपने कमरे में बुलवाया. इनामदार को उसने अपना परिचय दिया. उसका नाम बावनभाई था. वह एक लकडहारे का बेटा था. उसने सावकार से कहा कि उसके पिताजी ने मरने से पाहिले उसे एक प्राचीन खजाने का नक़्शा दिया है. जो उसी गाँव के घने जंगलो में किसी खंडहर में छुपाया हुआ है.

वहा जाने के लिये उसे सिर्फ़ सावकार के मदत की ज़रूरत है. और बदले में वह और सावकार आपस में खजाना बाटलेंगे. खजाने का नाम सुनते ही सावकार ने तुरंत हा कर दी. पर बावन भाई ने शर्त रखी की खजाने की खोज में सिर्फ़ वह दोनों जायेंगे. फिर दुसरे दिन इनामदार सुबह बावनभाई को जंगल के पास वाले पुराने शिव मंदिर में मिला. और सबसे पाहिले नक़्शा देखने की मांग की.

 श्रापित खजाना  #Bhoot Pret Ki Kahani

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बावन भाई ने इनामदार को नक़्शा दिखाया. तस्सली होने के बाद वह दोनों घने जंगल में गये. जंहा कोई इन्सान गलती से भी पांव नहीं रखता था. नक़्शे के मुताबिक खजाने तक पोहोचने का रास्ता जंगल के पुराने खंडहर में छुपे तैखाने से होकर जाता था. वो दोनों खंडहर के अन्दर दाखिल हुए. खंडहर की दीवारों पर कुछ चित्र थे. सभी चित्र तो खजाने के थे.

पर उनमे से सबसे अजीब चित्र था खजाने पर बैठा हुआ विचित्र आदमी. उन चित्रों पर ज़्यादा ध्यान न देते हुए. वो दोनों खजाने तक जाने का रास्ता खोजने लगे. उन्होंने उस वीरान खंडहर का कोना-कोना छान मारा. पर उन्हें छुपे हुए तैखाने तक जाने का रास्ता मिल नहीं रहा था. फिर वह दोनों थक कर ज़मीन पर बैठ गए. बावन भाई ने एक बार फिरसे नक़्शा खोला और उसका ठीक से नीरिक्षण किया.

  • दिवार के विचित्र चिन्ह  #Bhoot Pret Ki Kahani blog

तो उसे नक़्शे में छुपी हुई वह आकृति दिखी. जो पूरा ध्यन लगाकर देखने पर ही दिखती थी. उसी का चित्र दिवार पण बने हुए विचित्र आदमी से मिलता जुलता था. फिर बावन भाई ने उस दिवार के चित्र पर हात फेर कर तलाशन शरू किया. तभी उस चित्र पर एक छोटा पत्थर मिला जो थोडा बहार निकला हुआ था. वो उसने ताकत लगाके अन्दर ढकेला.

फिर उसी चित्र के सामने जमींन पर तैखाने का गुप्त दरवाज़ा खुल गया. इनामदार ने साथ में लालटेन लायी थी. बावन भाई ने लालटेन जलाके अपने हातो में ली और वह दोनों धीरे-धीरे तैखाने की सीढिया उत्तर ने लगे. सीढिया काफ़ी निचे तक जाती थी. और उनपर ऊपर चढ़ते हुए ढेर सारे नर कंकाल और मशाले दिखी. दोनों को ऐसा लग रहा था उन सभी इंसानों ने सीढियों पर ही दम तोडा था. 

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  • लालच का भूत  

पर कहते हे ना लालच बुरी बला इतने सारे नर कंकाल देखने के बावजूद भी दोनों की आँखों पर सिर्फ़ लालच का पर्दा था. अंधेरे में लालटेन के सहारे नक़्शे को निहारते हुए दोनों तैखाने का कोना-कोना तलाश रहे थे. आखिरकार उन्हें वह कमरा मिला जिसमे सारा धन रखा हुआ था. उसके दरवाजे पर चेतावनी देने वाले चिह्न भी थे. पर सब चेतावनियों को अनदेखा करते हुए. #Bhoot Pret Ki Kahani

उन्होंने उस कमरेका ताला तोड़ दिया. जसे ही वह दो नो अन्दर गए. अचानक से उनकी लालटेन बिना हवा के अपने आप बुज गई. और ज़ोर से दरवाज़ा बंद हो गया. उन्हें किसीकी मंत्र पढने ने की-की आवाज़ आने लगी. दोनों वहासे भागना चाहते थे. वो दरवाज़ा पीटने लगे उसे खोलने की कोशिस करने लगे पर वहा जाना उनके हाता में था. और वापस लोटना सिर्फ जोक्खो के वश में था.

  • कहानी का अंत  #Bhoot Pret Ki Kahani

दोनों के हात पैर बर्फ की तरह जगह पर ही जम गए. और अचानक रहस्यमय तरीकेसे उस कमरे की मशाले अपने आप जल गई. फिर उन्हें दिखाई दिया जोक्खो जो खजाने पर पहरा दे रहा था. जोक्खो ने इनामदार को देखतेही उसके सिर को धड से अलग कर दिया और कहा कि इससे लालच की बदबू आ रही थी और ज़ोर जोर से हसने लगा. उसने बावनभाई से हस्ते हुए कहा में तुम्हे एक मौका देता हु. जितना तेज भाग सकते हो भागो.

और तुम इनमेसे कोई भी मशाल लेजा सकते हो. पर अगर मशाल को तुमने जमींन पर रखा. तो मैं तुम्हे उसी वक़्त मार दूंगा. बावनभाई डर के मारे काँप रहा था. उसने एक मशाल उठाई और जी जान लगाकर भागा. जब वह सीढियो पर डरके मारे भाग रहा था.

वहा पर इतने सारे कंकाल थे की उनमेसे ही किसी एक कंकाल में पैर अटक कर बावनभाई सीढियोपे गिर गया. और उसके हात से मशाल छुट गई. फिर अगले ही पल जोक्खो ने उसकी जान लेली और उन कंकालो में एक और कंकाल जमा होगया.

तो दोस्तों आपको ये प्रचीन जोक्खो की Bhoot Pret Ki Kahani कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताये और इस ब्लॉग पर और भी हिंदी कहानिया जरुर पढ़े.

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