Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

BHOOT PRET KI KAHANI HINDI रूह का बदला | darawni Aatma Ki Kahani | Devil Spirit Story In Hindi | Horror Ghost Stories Blog

Bhoot Pret Ki Kahani Hindi :- I Am Sharing the Bhoot Pret Ki Kahani Hindi This is new Ghost Story available on story telling Websites. Kindly comment after reading how much you like this Ghost story. यह एक  बदले की आग  में जलती प्रेत की  सच्ची कहानी है जो बदला और सच्चाई का एक अलग  ही मिलाप है. मरे ब्लॉग  की और भी सबसे Darawni Bhooton Ki Kahani जरुर पढ़े. 

रूह का बदला Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

यह एक बच्ची की भटकती आत्मा की कहानी है. जो बदले की आग में 10 सालोसे जल रही थी और न जाने कितने आदमीयो को उसने अपना शिकार बनाया और फिर एक ऐसा इंसान आया जिसने उसे विश्वास दिलाया कि इस दुनिया में अच्छे इंसान भी होते है. तो शुरू करते आज की भूत प्रेत की कहानी .

मै हूँ संदीप कंपनी ने मुझे क्लाइंट के साथ डील करने के लिया मनाली भेजा था. वह सर्दियों का मौसम था. पूरा दिन वर्क लोड की वज़ह से सफ़र रात को करना पड़ा और दुसरे दिन सुबह मुझे कंपनी के ओर से मनाली के क्लाइंट को प्रेजेंटेशन देना था. मनाली जाते वक़्त रात को बिच रास्ते में मेरी कार बंद पड़गई. पर किस्मतसे एक गेराज वहाँ से कुछ ही दूर था.

बड़ी मुश्किल से में गाड़ी को धक्का लगते हुए वंहा तक ले गया. मैकनिक ने बताया कि गाड़ी सुबह तक ठीक होसकती है. फिर दिमाग़ पर जादा ज़ोर न देते हुए में नज़दीक के गाँव की और होटल ढूंडने निकला. गाँवकी ओर चलते-चलते पीछेसे एक मासूम और कोमल आवाज़ आई. अरे ओ साहबजी आप रेस्ट हाउस की तलाश कर रहे हो क्या? में पीछे मुड़ा और देखा तो वह एक 13 या 14 साल की मासूम बच्ची थी.

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  • गेस्ट हाउस की तलाश

मैंने कहा हाँ क्या तुम जानती हो. उसने कहा हाँ आइये आपको वहा ले चलती हूँ. मैं और मेरे पिताजी ही उस REST HOUSE की देखरेख करते है. फिर वह लड़की और में बात करते हुए रेस्ट हाउस की और निकले बच्ची ने अपना नाम प्रीति बताया. मैंने उससे पूछा तुम्हे डर नहीं लगता. इतनी रात को तुम बाहर घूम रही हो.

वो बोली अब मुझे इन्सानों का से डरने की कोई ज़रूरत नहीं. पिछले 10 सालो से यही काम कर रही हूँ. मुझे उसकी बाते कुछ अजीब लग रही थी. पर फिर मैंने सोचा कि एक 13 साल की बच्ची की बातों पर ध्यान देने का कोई मतलब नहीं बच्ची है कुछ भी बोल सकती है.

  • गेस्टहाउस में प्रवेश

आधा घंटा पैदल चलने के बाद हम रेस्ट हाउस पहुँचे वह गाँव से काफ़ी दूर था. वहाँ पोहोचने के बाद प्रीती ने मुझे बताया कि उसके पिताजी काम से बाहर गए है और श्याम तक आने वाले थे. पर मौसम अचानक ख़राब होने से वह शहर में ही फस गए है. सुबह तक लौट आयंगे. Bhoot pret Ki Kahani Hindi

मैंने कहा तुम्हारे पिताजी को डर नहीं लगता कि एक छोटी बच्ची को अकेले छोडके जाते है. वो बोली यंही तो गलती थी पिताजी की. उसने फिरसे अजीब और डरावनी आवाज़ में बात करना शुरु किया. फिर मैं कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद वह प्रीती खाना लेक आयी. खाना खाने के बाद वह रूम में मेरे पास बैठी.

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  • बच्ची की अजीब हरकते

मे मेरे खयालो में खोया हुआ था. वह अचानक से मेरे पैर दबाने लगी. मैने उसके हाथ पकडे और पूछा ये तुम क्या कर रही हो. वह बोली पैर दबा रही हूँ और क्या. आप थके हुए है ना. वह मासूम निगांहो से मेरी तरफ़ देख रही थी. मैंने कहा देख छोटी नहीं तो मैं थका हुआ हूँ. और नहीं तो मैं तुमसे कभी पैर नहीं दबाव सकता हूँ.

वो बोली क्या में इतनी बुरी लड़की हूँ. मैंने कहा नहीं रे पगलू तुम मेरी छोटी बहन जैसी है. और हमारे यहाँ छोटी बहनों से पैर नहीं दबवाते. थोड़ी देर वह मुझे देखते ही रही. उसके चेहरे पर मुस्कान थी. वो बोली क्या सचमे आप मुझे अपनी बहन मानते हो. मैंने कहा हाँ बिलकुल और तू मुझे ये साहबजी-साहबजी नहीं भैया बोल ठीक है.”Bhoot pret Ki Kahani Hindi”

मैंने उसे कहा मुझे खाने के बाद कॉफ़ी पिने की आदत है. नहीं तो मेरा सिर दुखता है. मेरी कॉफ़ी वाली बात सुनके उसके चहरे से हंसी गायब-सी हो गई. वह बोली उसको भी खाने के बाद कॉफ़ी पिने की आदत थी. मैने पूछा किसको? उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कॉफ़ी लाने चली गई.

थोड़ीही देर में वह कॉफ़ी लेकर आयी. मैंने कॉफ़ी पिते हुए फिर से पूछा. तुम कुछ बोल रही थी. उसको भी कॉफ़ी की आदत थी. वह बोली जाने दो भैया आप दुखी हो जाओगे. मैने कहा अब बोल भी दे छोटी अगर हम अपना दुःख किसी के साथ बाटते है तो अच्छा महसूस होता है.

  • दर्दभरी दास्तान

वो बोली तो फिर सुनो ये कहनी है एक मासूम लड़की की और दरिन्दे की. ऐसाही एक रेस्ट हाउस था. उसकी देखभल एक गरीब बाप बेटी करते थे. एक दिन लड़की पिताजी श्याम को तूफान की वज़ह से शहर में फस गए थे. रातको वापस नहीं आसके. पर उसी रात रेस्ट हाउस में एक बड़ा सरकारी अफसर मेहमान आया हुआ था.

बदले को आग Bhoot Pret Ki Kahani Hindi

रात में खाने के बाद उस लड़की ने उसे कॉफ़ी पिलाई थी. वह मेहमान उसकी पिताजी के उमर का था. उसने लड़की को कमरे में ही रुकनेके लिये कहा उस लड़की को भी अकेले डर लग रहा था. एसलिये वह वही रुक गई. उस अफसरने उसे पैर दबाने के लिय कहा. उसके बाद उस हैवान ने उस मासूम-सी बची के साथ वह किया जससे उस लड़कीकी ज़िन्दगी बर्बाद हो गई.

उस हादसे के बाद उस मासूम ने तालाब में कूदकर आत्महत्या कर ली. ये सब देखकर उसका बाप अधमार हो गया क्योंकि 2 महीने पहले ही उसने अपनी बीवी को खोया था और अब 13 साल की बेटी. ये हादसा सुनते वक़्त प्रीती काफ़ी भावूक हो गई थी. वो बोली भैया अगर ऐसा मेरे साथ हुआ तो तुम क्या करोगे. क्या मेरा बदला लोगे?

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मेने कहा तू यकींन नहीं करेगी प्रीती मेरे मन में भी ऐसाही बुरा खयाल आ रहा है. मे कल सुबह तुम्हारे पिताजी से बात करूंगा और तुम दोनों को मुम्बई ले जाऊंगा. मेरी काफ़ी अच्छी पहचान है. तुम्हारे पिताजी वंहा नोकरी करेंगे और तुम स्कूल जाना. प्रीती बोली अभी ऐसा नहि हो सकता भैया आपको आने में देर हो गई. उसकी आवाज़ गहरी हो गई थी.

मैंने पूछा क्यों नहीं हो सकता? वह बोली बस है कोई कारण. मैने कहा भगवान नकारे तेरे साथ अगर ऐसा कुछ हुआ तो मुझे वादा कर की तू कभी ग़लत क़दम नहीं उठाएगी. तू मेरे आने का इंतज़ार करेगी. तेरा भाई अभी जिन्दा है. में भी भावुक हो गया था. प्रीती की आखों भर आयी वह बोली तुमने मुझे शांत कर दिया भैया मुझे शांत कर दिया. मैंने उसके सर पर हाथ रखा. तो वह बच्ची मेरे सिने से लगकर रोने लगी.

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मेने कहा अरे पगली तू रो मत में सुबह तेरे पिताजी से बात करूँगा. फिर सब ठीक हो जायेगा. वो बोली सब ठीक हो गया है भैया सब ठीक हो गया. मुझे उसकी बात समज नहीं आयी. मने कहा सब ठीक होगया तो रो क्यों रही है. वह बोली ये-ये ख़ुशी के आसू है. मैंने घडी पर नज़र डाली तो रात के 2 बज रहे थे. मेने उसे कहा चल अब रात बहुत हो गई है सोजा.

वो रूम के बाहर जाने लगी मैंने उसे रोका और कहा कि तू यही सोजा बेड पे. नहीं तो बाहर अकेली डरती रहेगी रात भर. में नाराज हो जाऊंगा इस डर से प्रीती मुझे मना नहीं कर पाई. में उसे बेड पर सुला कर ख़ुद आराम खुर्ची पर सो गया. कुछ देर में प्रीती ने बताए हुए हादसे के बारे में सोचता रहा फिर याद आया उस हादसे वाली लड़की का नाम उसने बताया ही नहीं.

  • गाँव के लोगोसे मुलाकात

बाद में सोचा कि कल सुबह पूछ लूँगा. सुबह-सुबह मेरी नींद पंछी योंके चहकने की मधुर आवाज़ से खुली. और मेने जब बेड पर देखा तब प्रीती वहा नहीं थी. दरवाज़ा खुला था मुझे लगा वह बाहर अपने पिताजे के आने का इंतजारकर रही होगी. में ताजी हवा लेने और प्रकृति को निहारने के लिय बालकनी में गया और देखा निचे कुछ गाँव के लोग इमारत के निचे खड़े है. और सभी मेरी तरफ़ आश्चर्य और डर की भावना से देख रहे थे.

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मेने उन्हें हाथ जोड़ के राम-राम किया. उनमेसे सबसे बुज़ुर्ग आदमी ने मुझे इशारा कर के निचे बुलाया. और जब में निचे गया तब बुज़ुर्ग ने पूछा तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रहे हो. मैंने कहा में संदीप हूँ. और कार ख़राब होने की वज़ह से एक रात के लिय इस रेस्ट हाउस में रुका हूँ. बुज़ुर्ग ने कहा क्या एक 13 साल की छोटी लड़की तुम्हे यहाँ लाई थी.

  • रूह का राज खुला

मेंने हाँ में जवाब दिया तभी सब के चहरे का रंग उड गया. मेने कहा क्या हुआ सब डरे हुए क्यों है. बुज़ुर्ग बोले तुम तूम्हारा सामान लेकर हमारे साथ चलो. बाकि बाते तुम्हे शिवमंदिर में समझा देंगे. उन सबके चहरे देखकर में कुछ-कुछ बाते समज में आ रही था. और में जब सामान लेने रेस्ट हाउस में गया तब वह नजारा देखकर दंग रह गया. रात को जिस साफ़ सुतरे रेस्ट हाउस में आया था.

वो अब पुराने खंडहर जैसा दिख रहा था. मैंने बिना डरे मेरा बैग और कपडे समेटे और उनके साथ शिवमंदिर गया. वहा पर गाँव के और भी लोग आये थे. मैंने रेस्ट हाउस में जो कुछ हुआ वह सब बताया. और फिर उनमे से एक बुज़ुर्ग उठा और मेरे पैर पड़ने लगा. मैंने कहा आप एसा क्यों कर हो.

वो रोने लगे और बोले तुमने मेरी बेटी की भटकती रुह को मुक्ति दे दी. जो 10 साल से बदले की आग में जल रही थी. मंदिर के पुजारी ने बताया. जो लड़की तुम्हे रात को रेस्ट हाउस ले गई थी. वो 10 साल पहले मार चुकी है. और ये उसी के पिताजी है. रेस्ट हाउस में ले जाके उस रूहने ना जाने कितनो की जाने ली. पर तुम अच्छे इंसान हो संदीप तुमने उसे विश्वास दिलाया कि इस दुनिया में अच्छे लोग भी होते है.

  • आत्मा को मुक्ति मिली — Bhoot Pret Ki Kahani Hindi 

आज उसकी आत्मा को मुक्ति मिलगई है. मेंने सवाल किया. आपको कैसे पता चला के में रेस्ट हाउस में ठेहरा हूँ. रेस्ट हाउस तो गाँव से काफ़ी दूर है. उन्होंने मंदीर के तालाब की और इशारा करते हुए कहा. प्रीती ने उस तालाब में कूद के आत्महत्या कि थी. 10 सालोसे तालब में कोई कमल का फूल नहीं खिला कलिया तो दिखती थी पर कभी फूल नहीं खिला. और हर उस आदमी की लाश उसी तालाब में सुबह हम निकल ते थे.

जिसकी नियत उस 13 साल की लड़की पर खराब होती थी. और आज वही तालाब 10 सालो के बाद कमल के फूलों से भर गया है. इस तरह से सुबह की पहली आरती ले के मेंने गाँव वालो को RAM-RAM कहके में अपनी गाड़ी लेकर में मनाली चला गया.

तो दोस्तों आपको ये Bhoot Pret Ki Kahani Hindi कैसी लगी ये कमेंट करके जरुर बताये और मरे ब्लॉग की कुछ सच्ची और कुछ मरी लिखी हुई कहनियाँ निचे दी हुई लिंक पर क्लिक करके जुरूर पढ़े.

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